क्या पायलटों के डोप टेस्ट से उड़ान की सुरक्षा का पता चलता है?

The CSR Journal Magazine
पायलट का काम केवल विमान उड़ाना नहीं है, बल्कि हजारों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होती है। जब किसी पायलट के डोप टेस्ट में गांजा या अन्य नशीला पदार्थ मिलता है, तो यह स्वाभाविक है कि चालक के नशे में होने पर सवाल उठें। हाल में एयर इंडिया की Phuket-दिल्ली उड़ान AI2379 में ऐसी ही स्थिति सामने आई। 4 अगस्त को फ्लाइट क्रूज़िंग करते समय अचानक लगभग 300 फीट नीचे चली गई, जिससे यात्रियों और क्रू के सदस्यों को चोटें आईं। इसके बाद पायलटों की जांच की गई, जिसमें कमांडर का कन्फर्मेटरी टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव आया। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि डोप टेस्ट का परिणाम फ्लाइट के नीचे जाने का कारण था या नहीं।

डोप टेस्ट की प्रक्रिया

डोप टेस्ट करने के लिए, पायलटों का शराब के लिए ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट किया जाता है। वहीं, नशीले पदार्थों के लिए आमतौर पर यूरिन सैंपल लिया जाता है। पहले स्क्रीनिंग टेस्ट होता है, जिसके बाद पॉजिटिव या ‘नॉन-नेगेटिव’ नतीजे मिलने पर लैब में कन्फर्मेटरी जांच होती है। DGCA की प्रक्रिया में सैंपल की पहचान और उसके सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी शामिल होती है, जिसे चेन ऑफ कस्टडी कहा जाता है।

डोप टेस्ट का पॉजिटिव नतीजा

अगर कन्फर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो इसका मतलब है कि जांच में उस नशीले पदार्थ या उसके मेटाबोलाइट की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पायलट उस समय नशे में था या उसकी कार्य क्षमता प्रभावित थी। खासकर गांजे के मामले में, यूरिन टेस्ट पुराने इस्तेमाल के बाद भी कई दिनों तक मेटाबोलाइट दिखा सकता है।DGCA के नियमों के अनुसार, कैनाबिस, कोकीन, ओपिओइड, एम्फेटामीन, मेथाम्फेटामीन, बार्बिट्यूरेट, बेंजोडायजेपीन और MDMA जैसे नशीले पदार्थों की जांच की जाती है।

मेडिकल रिव्यू की जरूरत, पायलट पर संभावित कार्रवाई

जब कन्फर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो मेडिकल रिव्यू ऑफिसर नतीजे की जांच करता है। यह देखता है कि कहीं किसी वैध दवा या अन्य सामान्य कारण से यह परिणाम तो नहीं आया। उदाहरण के लिए, कोडीन वाली दवाएं ओपिओइड टेस्ट को पॉजिटिव कर सकती हैं। DGCA के अनुसार, अगर कन्फर्मेटरी टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो पायलट को सुरक्षा से जुड़ी ड्यूटी से हटा दिया जा सकता है। पहली बार पॉजिटिव आने पर पुनर्वास और आगे की जांच की प्रक्रिया होती है। अगर दूसरी बार पॉजिटिव पाया गया, तो लाइसेंस तीन साल के लिए निलंबित किया जा सकता है, जबकि तीसरी बार लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

असली सवाल अभी बाकी

इसलिए, एयर इंडिया मामले में केवल पॉजिटिव डोप टेस्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि पायलट के नशे में होने से विमान 300 फीट नीचे गया। जांच में फ्लाइट डेटा, विमान की तकनीकी स्थिति, क्रू की कार्रवाई और अन्य परिस्थितियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल डोप टेस्ट एक अहम जांच बिंदु है, लेकिन घटना का कारण साबित करने वाला अकेला सबूत नहीं

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