खतरे में निष्पक्ष चुनाव, EVM और SIR विवाद को लेकर 23 विपक्षी दल पहुंचे CJI के द्वार

The CSR Journal Magazine

23 विपक्षी दलों ने CJI को लिखा पत्र, ECI और SIR पर उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों सहित 23 विपक्षी दलों और स्वतंत्र सांसद कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। इस पत्र में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के कामकाज पर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं। विपक्षी गठबंधन की 8 जून की बैठक में विचार-विमर्श के बाद यह पत्र तैयार कर उच्चतम न्यायालय को सौंपा गया।

चुनावी प्रक्रिया पर विपक्षी दलों की चिंता

देश में चल रहे चुनावी माहौल को लेकर 23 विपक्षी दलों ने CJI सूर्यकांत को पत्र लिखा है, जिसमें चुनावी प्रक्रिया पर गहरी चिंता जताई गई है। इन दलों ने हाल के चुनावों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए ED, CBI जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग और निर्वाचन आयोग में नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि हाल के चुनावों के नतीजे ‘जनता की इच्छा’ के खिलाफ हैं।

मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)

विपक्ष का आरोप है कि निर्वाचन आयोग की ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया का पक्षपातपूर्ण इस्तेमाल कर वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से मनमाने ढंग से हटाए जा रहे हैं। इसमें विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में गड़बड़ी का दावा किया गया है। “तार्किक विसंगतियों” के बहाने लाखों मतदाताओं के नाम हटाए जाने का हवाला देते हुए, दलों ने न्यायपालिका से हस्तक्षेप करने और मतदाता हेरफेर को रोकने के लिए जारी SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।

निर्वाचन आयोग (ECI) पर आरोप

पत्र में निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर चुनावों के दौरान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अनुचित लाभ पहुंचाने और खुलेआम पक्षपात करने का आरोप लगाया गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में हाल के चुनावों में हेरफेर की गई और चुनाव परिणाम मतदाताओं की वास्तविक इच्छा को नहीं दर्शाते। विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि ED, CBI और NIA जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल लोकतंत्र की नींव को हिला सकता है।

EVM और पारदर्शिता पर चिंता

मतदाता सूची के अलावा, विपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) को लेकर अपनी पुरानी चिंताओं को फिर से दोहराया है। गठबंधन का तर्क है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग पर जनता का भरोसा बहाल करने के लिए व्यापक चर्चा की जरूरत है और न्यायपालिका को जहां आवश्यक हो, वहां पारंपरिक मतपत्रों को वापस लाने पर विचार करना चाहिए।

न्यायपालिका से अंतिम उम्मीद

चार पन्नों के इस पत्र में सीधे तौर पर “न्यायपालिका के विवेक” से अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि जब संवैधानिक संस्थाएं निष्पक्षता बनाए रखने में विफल हो जाती हैं, तो विपक्ष के लिए न्यायपालिका ही राहत का एकमात्र कानूनी रास्ता बचती है। हाल के राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जैसी पार्टियों ने इंडिया (INDIA) गठबंधन के साथ मिलकर इस संयुक्त ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

कौन-कौन से दल हैं शामिल?

इस पत्र पर “बीजेपी का विरोध करने वाली” पार्टियों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें इंडियन नेशनल कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), समाजवादी पार्टी, आरजेडी, तृणमूल कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार), आम आदमी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा, भाकपा) और अन्य शामिल हैं।

मैनिपुलेशन के आरोप

पत्र में कहा गया है कि 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से चुनाव आयोग में नियुक्तियों पर सवाल उठते रहे हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में हाल ही में किया गया SIR प्रक्रिया गैर-जरूरी है। दलों का कहना है कि हाल के चुनावों में मैनिपुलेटेड नतीजे सामने आए हैं।

नियुक्तियों पर सवाल

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के अपॉइंटमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि भाजपा से जुड़े लोग लगातार महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किए जा रहे हैं, जो सरकार के लिए काम कर रहे हैं। यह मुद्दा इलेक्ट्रोल इंटीग्रिटी को प्रभावित करता है।

बिहार में SIR प्रक्रिया का तर्क

बिहार में किए गए SIR एक्सरसाइज के बारे में पत्र में बताया गया है कि चुनाव आयोग का तर्क वोटर रोल का “सैनिटाइजेशन” था। लेकिन, इसमें बांग्लादेशी घुसपैठियों के वोटर रोल में शामिल होने का दावा किया गया था। विपक्ष का कहना है कि इस बारे में कोई ठोस डेटा उपलब्ध नहीं है।

ज्यूडिशियरी पर भरोसा

पत्र में यह भी अपील की गई है कि जब सब कुछ असफल हो जाता है, तो लोग ज्यूडिशियरी पर भरोसा करते हैं। अगर ज्यूडिशियरी भी जवाब देने में असफल होती है, तो यह रिपब्लिक के टूटने का संकेत माना जाएगा। यह लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

2027 चुनावों से पहले SIR पर रोक की मांग

विपक्षी दलों ने यह भी उम्मीद जताई है कि 2027 में होने वाले चुनावों के पहले SIR एक्सरसाइज को रोका जाए। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को तब तक रोकना चाहिए, जब तक राज्य विधानसभाओं के चुनाव कम से कम 5 साल दूर हों। यह स्थिति वोटरों के लिए सही नतीजे सुनिश्चित करती है।

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