भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) प्रणालियों के लिए बर्न मेमोरी की जांच करने का एक नया मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी किया है। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 2024 के निर्णय के बाद उठाया गया है, जिसमें एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। यह SOP मुख्य रूप से दो सरकारी कंपनियों, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) द्वारा तैयार की गई है।
EVM और VVPAT की जांच का तरीका
इस नए SOP के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में, यदि दूसरे और तीसरे स्थान पर रह रहे उम्मीदवार लिखित अनुरोध करते हैं, तो EVM और VVPAT माइक्रोकंट्रोलरों का 5% तक सत्यापन किया जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और लोकतांत्रिक है, जिससे चुनावी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बढ़ती है।
मॉक पोल का महत्व
इस प्रक्रिया के तहत, प्रत्येक मशीन पर 1,400 वोट तक का मॉक पोल कराया जाएगा। यह मॉक पोल एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यदि इसके परिणाम VVPAT पर्चियों से मेल खाते हैं, तो यह साबित हो जाएगा कि बर्न मेमोरी के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है। ईवीएम के सफल सत्यापन से मतदाता का विश्वास और मजबूत होगा।
विसंगति का क्या होगा?
हालांकि, मॉक पोल के दौरान यदि किसी प्रकार की विसंगति सामने आती है, तो इसके लिए स्पष्ट प्रक्रिया अभी तक निर्धारित नहीं की गई है। इससे चुनावी प्रक्रिया में कुछ अनिश्चितता बनी हुई है। तकनीकी SOP का यह पहलू महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र हो।
स्वतंत्रता और पारदर्शिता
आधुनिक तकनीक के उपयोग से चुनावी प्रक्रियाओं में स्वतंत्रता और पारदर्शिता लाने की कोशिश की जा रही है। इस SOP से मतदाता को यह भरोसा होगा कि उनका वोट सुरक्षित और सही जन गणना में शामिल होता है। इन प्रक्रियाओं को अपनाकर भारत की चुनावी प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।
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