राशन से कटे नाम, पासपोर्ट बनाने में दिक्कत, एक साल में SIR ने कैसे बदल दी देश के 6 करोड़ लोगों की लाइफ

The CSR Journal Magazine
24 जून 2025 को बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के एक साल में देश के 13 राज्यों में लगभग 6 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इसके चलते लोगों को राशन कार्ड रद्द होने और पासपोर्ट अटकने जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय चुनाव आयोग की ओर से चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत यह प्रक्रिया शुरू की गई थी।

राज्यों में समस्याएं बढ़ती जा रही हैं

इस प्रक्रिया के तहत यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में नामों की कटौती सबसे ज्यादा हुई। ऐसे में लाखों लोगों का नाम राशन लिस्ट से भी काटा गया, जिससे उनकी खाद्य सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया। जैसे ही इन लोगों ने प्रशासनिक दफ्तरों का दौरा किया, उन्हें राशन कार्ड डिलीट होने की खबर मिली।

बिहार में 65 लाख नामों की कटौती

बिहार में पहले चरण में 65 लाख लोगों का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया। इसके बाद से सामाजिक कार्यकर्ता और विपक्षी पार्टियां आरोप लगा रही हैं कि कई लोगों को जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण वोट देने से रोका गया है। जब इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को स्वीकार कर लिया।

पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में परेशानियां

वोटर लिस्ट से काटे गए नामों की वजह से पश्चिम बंगाल में पासपोर्ट रिन्यूअल की प्रक्रिया भी अटक गई है। खासी संख्या में ऐसे लोग सामने आए हैं जिनका पासपोर्ट सत्यापन रोक दिया गया है। यह स्थिति ना सिर्फ व्यक्तियों के लिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी काफी मुश्किल बन गई है। इस मामले पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

केवल वोटर लिस्ट ही नहीं, राशन भी प्रभावित

बिहार में 5.5 लाख राशन कार्ड धारकों के नाम इस प्रक्रिया के तहत रद्द कर दिए गए हैं। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह एक वैध कदम है, ताकि कल्याण योजनाओं का लाभ केवल योग्य लोगों तक पहुंचे। ऐसे में लाखों परिवारों को सरकारी सहायता से वंचित होने के चलते जीविकोपार्जन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

मृत मतदाताओं की संख्या बढ़ रही है

अव्वल डेटा के मुताबिक, वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों में 66.88 लाख मृत मतदाता शामिल हैं। यूपी और पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा संख्या दर्ज की गई है। इसके अलावा अन्य राज्यों में भी लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए कठिनाइयों में डालने वाली समस्याएं सामने आई हैं।

एक पूर्व संपादक की व्यक्तिगत कहानी

आर. राजगोपाल, जो एक पूर्व संपादक हैं, ने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार वोटर लिस्ट से उनका नाम हटा दिया गया, जिससे उनका पासपोर्ट रिन्यूअल अटक गया। इसके चलते वे अपनी बेटी की शादी में अमेरिका नहीं जा सके। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि समाज के कई गरीब लोगों की जीवनशैली पर इसके दूरगामी प्रभाव पड़े हैं।

आगे की प्रक्रिया

SIR का तीसरा चरण 14 मई 2026 से 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ, जिसमें लाखों मतदाता शामिल हैं। इस प्रक्रिया का पूरा होना आवश्यक है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लोग बिना किसी बाधा के अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें।

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