हमारा टाइम वेस्ट मत करिए- दिल्ली CJP छात्र प्रदर्शन मामले पर CJI सख्त

The CSR Journal Magazine

दिल्ली के छात्रों पर पुलिस के एक्शन के खिलाफ सुनवाई की मांग, CJI ने कहा- हमारा टाइम वेस्ट मत करिए

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांगों को लेकर सोमवार (20 जुलाई) को छात्रों ने ‘संसद चलो’ मार्च निकाला था, जिस दौरान पुलिस ने उन पर कथित तौर पर बल प्रयोग किया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का मामला

दिल्ली में NEET पेपर लीक के छात्रों पर पुलिस के एक्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में की गई। वकील नरेंद्र मिश्रा ने इस मामले की गंभीरता को बताते हुए कहा कि छात्रों के साथ पुलिस ने अनुचित व्यवहार किया है।

CJI का बयान: हमारा टाइम वेस्ट मत करिए

मामले का उल्लेख करते हुए जब वकील नरेंद्र मिश्रा ने तत्काल सुनवाई और पुलिस ज्यादती के वीडियो देखने का अनुरोध किया, तो अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। CJI सूर्यकांत ने वकील से कहा, “हमारा समय बर्बाद मत कीजिए और अपना समय भी बर्बाद मत कीजिए।”

वीडियो में कोई रुचि नहीं

जब वकील ने पुलिस कार्रवाई के साक्ष्य के रूप में वीडियो का हवाला दिया, तो पीठ ने कहा, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।” पीठ (जिसमें जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहाना भी शामिल थे) ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से साफ मना कर दिया और अगली सुनवाई की ओर बढ़ गए।

हाई कोर्ट ने भी पल्ला झाड़ा

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले से जुड़ी एक ऐसी ही याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए टिप्पणी की थी कि “अदालत को इन सब मामलों में मत घसीटें”।

CJI और CJP का दिलचस्प कनेक्शन

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी / Cockroach Janta Party) का कनेक्शन बेहद दिलचस्प और सीधा है। वास्तव में, CJP का जन्म ही CJI सूर्यकांत की एक अदालती टिप्पणी के विरोध और व्यंग्य (Satire) के रूप में हुआ था।

विवादित टिप्पणी (“कॉकरोच” शब्द का इस्तेमाल)

15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान तत्कालीन जस्टिस (अब CJI) सूर्यकांत ने बेरोजगारी और सोशल मीडिया एक्टिविज्म पर टिप्पणी करते हुए कुछ युवाओं की तुलना “कॉकरोच” (तिलचट्टों) और “परजीवी” (Parasites) से कर दी थी।  उन्होंने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म के जरिए सरकारी संस्थाओं पर निशाना साधते हैं।  हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्टीकरण दिया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री वाले लोगों की तरफ था, न कि आम बेरोजगारों की ओर।

CJP का जन्म

इस टिप्पणी से नाराज युवाओं और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों ने विरोध जताने के लिए एक अनोखा रास्ता चुना। उन्होंने इस बयान के अगले ही दिन ‘Cockroach Janta Party’ (CJP) नाम से एक ऑनलाइन पैरोडी और डिजिटल आंदोलन की शुरुआत कर दी। इंटरनेट पर एक मजाक और व्यंग्य के रूप में शुरू हुई यह CJP देखते ही देखते एक बड़े छात्र संगठन और आंदोलन में बदल गई।  वर्तमान में राष्ट्रीय स्तर पर NEET परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के खिलाफ जंतर-मंतर पर जो छात्र प्रदर्शन हो रहे हैं, उसका नेतृत्व यही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) कर रही है।

ताजा घटनाक्रम

इसी सोमवार को दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च कर रहे CJP कार्यकर्ताओं और छात्रों पर लाठीचार्ज किया। जब पुलिस की इस बर्बरता के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, तो इसकी सुनवाई खुद CJI सूर्यकांत की पीठ के सामने आई, जिन्होंने यह कहते हुए तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया कि “हमारा टाइम वेस्ट मत करिए, हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।” संक्षेप में कहें तो, CJI सूर्यकांत की जुबान से निकले “कॉकरोच” शब्द से ही CJP का जन्म हुआ और आज उसी CJP के छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन की याचिका को सुनने से CJI सूर्यकांत ने मना कर दिया है।

प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज

बुधवार को दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज किया था। कई छात्रों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी कारण के पीटा। इस घटना ने छात्रों और उनके परिवार वालों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। यह घटना NEET पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के बीच हुई थी, जो कि काफी विवादास्पद बनी हुई है।

नीट पेपर लीक मामला

नीट परीक्षा का यह पेपर लीक मामला छात्रों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। बहुत से छात्रों का मानना है कि इस मामले की सही तरीके से जांच नहीं हुई है और उन्हें न्याय नहीं मिला है। यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है और कई छात्रों ने विभिन्न न्यायिक फोरम में शिकायतें दर्ज की हैं।

कोर्ट की चिंता

चीफ जस्टिस का यह बयान इस बात का संकेत है कि कोर्ट का ध्यान इस मामले की ओर नहीं है। अनेक वकील इस बात पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि आखिर इस प्रकार के मामलों में न्यायालय का हस्तक्षेप क्यों नहीं हो रहा है। वकील नरेंद्र मिश्रा ने यह भी कहा कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है कि कोर्ट इस मामले को गंभीरता से ले।

छात्रों में आक्रोश

छात्रों और उनके परिवार वाले इस बात से नाराज़ हैं कि उनके साथ इंसाफ नहीं किया गया। पुलिस एक्शन के बाद अब छात्रों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई संगठनों ने इस पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है।

अगला कदम क्या होगा?

अब देखना यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट इस मामले को फिर से सुनेगा या नहीं। छात्रों की मांग है कि उन्हें न्याय मिले और इस मामले की सही तरीके से जांच हो। अगर इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्रों का गुस्सा और बढ़ सकता है, जो कि स्थिति को और भी बिगाड़ सकता है।

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