इमरजेंसी में जेल गए लोकतंत्र सेनानियों को मासिक पेंशन, पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र सेनानी सम्मान

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इमरजेंसी में जेल गए लोगों को हर महीने मिलेगी 10,000 रुपये पेंशन, पश्चिम बंगाल सरकार की बड़ी घोषणा

पश्चिम बंगाल सरकार ने आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों के लिए ₹10,000 मासिक पेंशन योजना की ऐतिहासिक घोषणा की है। राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने देश में 1975 से 1977 के बीच लगी इमरजेंसी का विरोध करने वाले नागरिकों को वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा देने का बड़ा वादा पूरा किया। सरकार ने प्राथमिक तौर पर ऐसे 325 लोगों को चिह्नित किया है, जिन्हें हर महीने आर्थिक मदद के साथ-साथ मुफ्त परिवहन और चिकित्सा लाभ दिया जाएगा।

लोकतंत्र के प्रहरियों को सलाम: पश्चिम बंगाल सरकार का ऐतिहासिक फैसला

लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने जीवन के स्वर्णिम वर्ष जेल की कालकोठरी में बिताने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बाद अब ‘लोकतंत्र सेनानियों’ के लिए एक बेहद राहत भरी और सम्मानजनक खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सरकार ने एक युगांतकारी निर्णय लेते हुए घोषणा की है कि साल 1975 में देश पर थोपे गए आपातकाल (इमरजेंसी) का शांतिपूर्ण व राजनीतिक विरोध करने के कारण जेल जाने वाले राज्य के सभी नागरिकों को अब ₹10,000 प्रति माह सम्मान पेंशन प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में आयोजित ‘पश्चिमबंगा लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ समारोह में इस कल्याणकारी योजना का औपचारिक ऐलान किया। इस योजना के तहत न केवल मासिक आर्थिक सहायता दी जाएगी, बल्कि सरकार ने इन बुजुर्ग सेनानियों के दैनिक जीवन को सुगम बनाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण सुविधाएं भी निःशुल्क देने की घोषणा की है।

‘पश्चिमबंगा लोकतंत्र सेनानी सम्मान’ योजना के मुख्य बिंदु

पश्चिम बंगाल सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना को अत्यधिक पारदर्शी और प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं-
₹10,000 मासिक सम्मान राशि: चिह्नित किए गए प्रत्येक लोकतंत्र सेनानी के बैंक खाते में सीधे ₹10,000 की मासिक पेंशन भेजी जाएगी।
मुफ्त सरकारी बस यात्रा: इन सभी लाभार्थियों को पश्चिम बंगाल राज्य परिवहन निगम की सभी सरकारी बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा की पात्रता होगी।
₹1,000 चिकित्सा सहायता: वृद्धावस्था और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए, राज्य सरकार इन्हें सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए प्रति माह ₹1,000 की अतिरिक्त चिकित्सा सहायता राशि भी प्रदान करेगी।
पारिवारिक पेंशन का लाभ: यदि चिन्हित किए गए किसी लोकतंत्र सेनानी का पूर्व में निधन हो चुका है या भविष्य में होता है, तो यह पेंशन और इसके साथ मिलने वाले लाभ उनके जीवित पति या पत्नी (Spouse) को ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।

325 सेनानियों की हुई पहचान, 90 दिनों के भीतर पूरा हुआ वादा

मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन ने पूरी जांच-पड़ताल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पहले चरण में 325 व्यक्तियों की सूची तैयार की है। ये वे लोग हैं जिन्होंने नागरिक अधिकारों की बहाली के लिए तत्कालीन दमनकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी और जिन्हें जेल में अमानवीय यातनाएं झेलनी पड़ी थीं। मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा, “हमारी नई सरकार अपने गठन के महज 90 दिनों के भीतर इस ऐतिहासिक वादे को पूरा कर रही है। लोकतंत्र की नींव इन वीर प्रहरियों के त्याग और बलिदान पर टिकी है। इन बहादुर लोगों ने जो कष्ट सहे, उसी के परिणामस्वरूप आज हम स्वतंत्र और लोकतांत्रिक माहौल में सांस ले रहे हैं। नई राज्य सरकार इन्हीं के आदर्शों और सिद्धांतों पर आगे बढ़ रही है।”

इतिहास के सुधार और राष्ट्रवाद पर सरकार का जोर

पेंशन योजना की घोषणा के साथ ही मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती वाम मोर्चा (Left Front) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल के गौरवशाली इतिहास में राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले महान सपूतों, विशेषकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान को पिछली सरकारों ने पूरी तरह से दरकिनार कर दिया था। इस भूल को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने घोषणा की है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती को पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर मनाया जाएगा। इसके अलावा, युवा पीढ़ी को सही इतिहास से अवगत कराने के लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आगामी 13 अगस्त को एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति स्कूल पाठ्यपुस्तकों के पाठ्यक्रम की समीक्षा करेगी और बंगाल के विभाजन के “वास्तविक इतिहास” तथा राष्ट्रवादी महापुरुषों के विचारों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का रोडमैप तैयार करेगी।

देश के अन्य राज्यों में क्या है व्यवस्था?

आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को पेंशन देने वाला पश्चिम बंगाल पहला राज्य नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा हर साल 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस‘ के रूप में मनाए जाने की पृष्ठभूमि में, भारत के कई अन्य राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और हरियाणा में भी लोकतंत्र सेनानियों (जिन्हें पहले ‘मीसा बंदी’ कहा जाता था) को सम्मान राशि और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद पहली बार इस तरह की योजना को इतने बड़े स्तर पर लागू किया गया है, जिसने राज्य के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

लाभार्थी कैसे उठा सकते हैं लाभ?

राज्य सरकार के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जिन 325 लोगों की सूची तैयार की गई है, उन्हें सीधे जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रमाण पत्र और योजना के दस्तावेज सौंपे जाएंगे। इसके अतिरिक्त, ‘लोकतंत्र सेनानी संघ’ नामक संगठन ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। मुख्यमंत्री ने संघ के सदस्यों को आश्वस्त किया है कि यदि भविष्य में कुछ और योग्य व्यक्तियों के नाम सामने आते हैं, तो सरकार उनके रचनात्मक सुझावों और आवेदनों पर पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति इस सम्मान से वंचित न रहे। यह कदम न केवल उन बुजुर्गों के बुढ़ापे का सहारा बनेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी देश के लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देगा।

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