लाठियों से कुचला युवाओं का भविष्य! JPSC-JSSC परीक्षा धांधली के खिलाफ रांची में भारी बवाल

The CSR Journal Magazine

झारखंड विधानसभा मार्च: छात्रों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन का इस्तेमाल, छात्रों का प्रदर्शन भड़का

रांची में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ विधानसभा घेराव करने जा रहे हजारों छात्रों पर पुलिस ने सोमवार (10 अगस्त 2026) को बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। राजधानी रांची के जगन्नाथपुर मंदिर रोड पर हुए इस भारी बवाल में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। अपनी 13 सूत्री मांगों को लेकर पिछले 17 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्र जब सुरक्षा बलों द्वारा लगाए गए 6 लेयर के बैरिकेड्स को तोड़ते हुए विधानसभा के नजदीक पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पानी की तेज बौछारें कीं। इसके बाद भी जब छात्र पीछे नहीं हटे, तो पुलिस ने उन पर बेरहमी से लाठियां भांजीं, जिसके जवाब में आक्रोशित छात्रों ने भी पुलिस पर जूते-चप्पल और खाली बोतलें फेंकी। इस हिंसक टकराव के कारण पूरे विधानसभा क्षेत्र में अफरा-तफरी और तनाव का माहौल व्याप्त हो गया।

लाठियों की गूंज और छात्रों का आक्रोश

युवाओं के भविष्य और रोजगार की मांग को लेकर झारखंड की राजनीति आज एक बार फिर सुलग उठी है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन सोमवार को एक भयानक हिंसक टकराव में तब्दील हो गया। हजारों की संख्या में प्रदेशभर से जुटे छात्र हाथों में तिरंगा और तख्तियां लिए नए विधानसभा भवन का घेराव करने निकले थे, लेकिन पुलिसिया कार्रवाई के बाद रांची की सड़कें जंग के मैदान जैसी नजर आने लगीं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि: 17 दिनों का सब्र जब सड़क पर फूटा

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं के आयोजन, पेपर लीक और परिणामों में आ रही विसंगतियों को लेकर छात्र ‘JPSC-JSSC सुधार मंच’ के बैनर तले पिछले 17 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे थे। इस आंदोलन में छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो समेत छह अभ्यर्थी पिछले 9 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे। रविवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल और छात्र नेताओं के बीच करीब दो दौर की मैराथन वार्ता हुई। सरकार का दावा था कि उसने छात्रों की 98 फीसदी मांगों को मान लिया है, जिसमें 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा और कुछ बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करना या उन पर पुनर्विचार करना शामिल था। लेकिन पेंच मुख्य रूप से JSSC-CGL परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने और पूरे प्रकरण की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग पर फंसा हुआ है। छात्र सीआईडी (CID) जांच को नाकाफी बताते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने की जिद पर अड़े हैं। वार्ता विफल होने के बाद छात्रों ने पहले से घोषित ‘विधानसभा घेराव मार्च’ पर आगे बढ़ने का अंतिम फैसला किया।

सुबह 10 बजे से शुरू हुआ मार्च: तिनके की तरह बिखरे बैरिकेड्स

सोमवार सुबह करीब 10 बजे पुरानी विधानसभा परिसर से छात्रों का जत्था अनुशासित और शांतिपूर्ण ढंग से नए विधानसभा भवन की तरफ रवाना हुआ। जैसे-जैसे मार्च आगे बढ़ा, इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए हजारों की संख्या में अभ्यर्थी शामिल होते गए। सुरक्षा के मद्देनजर रांची प्रशासन ने पहले ही पूरे इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू कर रखी थी और ड्रोन कैमरों से चप्पे-चप्पे की निगरानी की जा रही थी। विधानसभा परिसर की सुरक्षा के लिए पुलिस ने कुल 6 से 7 लेयर की बैरिकेडिंग तैयार की थी, जिसमें लोहे के भारी गेट और कटीले तारों का इस्तेमाल किया गया था। मार्च जब दोपहर करीब 12 बजे जगन्नाथपुर मंदिर के पास पहुंचा, तो पुलिस ने छात्रों को रोकने का प्रयास किया। करीब 10 मिनट तक कतार में खड़े रहने के बाद छात्रों का सब्र का बांध टूट गया। “रोजगार दो या जेल दो” और “भ्रष्टाचारियों को बाहर करो” जैसे गगनभेदी नारों के बीच छात्रों ने कटीले तारों और बैरिकेड्स पर चढ़ना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उग्र प्रदर्शनकारियों ने एक के बाद एक कई सुरक्षा घेरे तोड़ डाले।

वॉटर कैनन के हाई प्रेशर के बीच छात्रों का अनूठा विरोध

बैरिकेड्स टूटने के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ी) को आगे बढ़ाया। जैसे ही आंदोलनकारियों पर ठंडे पानी की तेज बौछारें छोड़ी गईं, प्रदर्शन स्थल पर एक बेहद ही हैरान करने वाला और अनूठा नजारा देखने को मिला। भागने या पीछे हटने के बजाय सैकड़ों छात्र पानी के उसी हाई प्रेशर के नीचे सड़कों और बैरिकेड्स पर खड़े होकर नाचने और झूमने लगे। छात्रों का यह अनूठा प्रतिरोध सोशल मीडिया पर भी तुरंत वायरल हो गया, जो यह संदेश दे रहा था कि वे इस दमनकारी नीति से डरने वाले नहीं हैं। पानी की बौछारें भी जब युवाओं के जोश को ठंडा नहीं कर सकीं और छात्र सातवें व अंतिम सुरक्षा घेरे को पार कर विधानसभा की मुख्य दीवार की तरफ बढ़ने लगे, तब पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार किया।

अचानक हुआ लाठीचार्ज, चप्पल और बोतलों से जवाबी हमला

दोपहर करीब 1:30 बजे जैसे ही छात्रों का एक बड़ा समूह अंतिम बैरिकेडिंग को लांघने में सफल हुआ, पुलिस ने अचानक चारों तरफ से लाठीचार्ज शुरू कर दिया। पुलिस के जवानों ने पुरुष और महिला अभ्यर्थियों, दोनों पर बेरहमी से लाठियां भांजीं। घटनास्थल पर मौजूद एक घायल छात्र ने रोते हुए अपना सिर दिखाते हुए कहा:”हम पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लेकर मार्च कर रहे थे। पुलिस ने पीछे से आकर अचानक हम पर हमला कर दिया। नियम के मुताबिक लाठी हमेशा कमर के नीचे मारी जानी चाहिए, लेकिन पुलिसकर्मियों ने जानबूझकर हमारे सिर, चेहरे, पेट और हाथों पर वार किया है।” लाठीचार्ज होते ही मौके पर भगदड़ मच गई। तितर-बितर हो रही भीड़ में से कुछ असामाजिक तत्वों और आक्रोशित छात्रों ने पुलिस बल पर जवाबी हमला कर दिया। छात्रों की ओर से पुलिसकर्मियों पर जूते, चप्पलें और खाली पानी की बोतलें फेंकी गईं। इस बीच भीड़ ने एक पुलिस जवान को घेरकर पीटने की भी कोशिश की, जिसे आंदोलन के कुछ वॉलंटियर्स (स्वयंसेवकों) ने बीच-बचाव कर सुरक्षित बाहर निकाला। लाठीचार्ज में दर्जनों अभ्यर्थियों के सिर फट गए और कई के हाथ-पैर में गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें तुरंत एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

स्ट्रेचर पर आंदोलन: भूख हड़ताल के बावजूद शामिल हुए देवेंद्र महतो

इस पूरे ऐतिहासिक छात्र आंदोलन की सबसे भावुक कर देने वाली तस्वीर छात्र नेता और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता देवेंद्रनाथ महतो की रही। पिछले 9 दिनों से अन्न का एक दाना त्यागे बैठे देवेंद्रनाथ महतो का वजन इस दौरान करीब 10.5 किलोग्राम घट चुका है। उनकी तबीयत बेहद नाजुक थी, फिर भी वे डॉक्टरों की मनाही के बावजूद अस्पताल की एंबुलेंस से सीधे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। एंबुलेंस से उतरकर उन्हें व्हीलचेयर और स्ट्रेचर के सहारे मार्च के अग्रिम मोर्चे पर लाया गया। हाथों में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर थामे देवेंद्र महतो ने कमजोर आवाज में मीडिया से कहा:”आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का जन्मदिन है, और हम राज्य के मुखिया से उपहार में लाठियां नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और साफ-सुथरी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। मेरी तबीयत चाहे कितनी भी खराब हो, जब तक हमारी परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित नहीं की जातीं और CBI जांच नहीं होती, तब तक यह शरीर थमेगा नहीं। हम स्ट्रेचर पर रहकर भी अपनी आवाज बुलंद करेंगे।”

राजनीतिक घमासान: विपक्ष का प्रदर्शन, कई नेता हिरासत में

चूंकि राज्य विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा था, इसलिए इस छात्र आंदोलन की गूंज सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह पुरजोर तरीके से सुनाई दी। मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को चौतरफा घेरा। छात्रों के समर्थन में भाजपा के कई विधायक और प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी मुख्यमंत्री आवास (CM House) के बाहर धरने पर बैठ गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार राज्य के युवाओं की आवाज को पुलिस के दम पर दबाना चाहती है। हंगामे और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पुलिस ने बाबूलाल मरांडी समेत कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं को हिरासत में ले लिया। इधर, सदन के भीतर भी विपक्ष के भारी शोर-शराबे और हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही को दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सरकार का पक्ष: “संवाद से निकलेगा रास्ता, हिंसा और हठ ठीक नहीं”

छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार कभी भी बल प्रयोग के पक्ष में नहीं रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी पूर्व में कहा था कि लाठियों से नहीं, बल्कि बातचीत और संवाद से ही घर की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। सरकार के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने छात्रों की लगभग सभी जायज मांगें मान ली हैं। एक न्यायिक निगरानी वाली उच्च स्तरीय जांच का भी प्रस्ताव दिया गया है। लेकिन कानूनन किसी भी चालू परीक्षा प्रक्रिया या आयोग के फैसलों को बिना पुख्ता तकनीकी वजहों के एकतरफा रद्द करने की अपनी कानूनी सीमाएं होती हैं। सरकार ने छात्रों से आंदोलन खत्म करने और पुनः वार्ता की मेज पर आने की अपील की है। इस बीच, सोमवार को ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी झारखंड में हुई इस परीक्षा गड़बड़ी के मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू कर दी है, जिससे यह साफ है कि सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है।

वर्तमान स्थिति

फिलहाल रांची के विधानसभा क्षेत्र में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई है। लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शनकारी छात्र पीछे जरूर हटे हैं, लेकिन उनका हौसला टूटा नहीं है। युवाओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल परीक्षा की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों परिवारों के स्वाभिमान और भविष्य की है। जब तक सरकार परीक्षाओं की निष्पक्ष सीबीआई जांच का लिखित आदेश जारी नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।

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