भारतीय रेलवे की बड़ी कामयाबी: वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को मिला ग्रीनको गोल्ड का तमगा

The CSR Journal Magazine

भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: पर्यावरण संरक्षण में अव्वल वटवा लोको शेड को मिली ‘ग्रीनको गोल्ड’ की रेटिंग

पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में स्थित वटवा इलेक्ट्रिक लोको शेड को पर्यावरणीय उत्कृष्टता और सतत औद्योगिक प्रबंधन के लिए प्रतिष्ठित ‘ग्रीनको गोल्ड’ (GreenCo GOLD) रेटिंग से सम्मानित किया गया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने वाला यह पश्चिम रेलवे का पहला इलेक्ट्रिक लोको शेड बन गया है। यह पुरस्कार भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) – सोहराबजी गोदरेज ग्रीन बिजनेस सेंटर (GBC) द्वारा प्रदान किया गया है और इसे नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 15वें ग्रीनको समिट 2026 में आधिकारिक रूप से सौंपा जाएगा।

इलेक्ट्रिक लोको शेड की अद्भुत पहल

वटवा शेड ने डीजल चलाने वाली ट्रेनों की बजाय अब पूरी तरह से बिजली पर चलने का निर्णय लेने के साथ पूरी तरह से डीजल आधारित परिचालन को समाप्त कर स्वच्छ इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन (विद्युत कर्षण) को अपना लिया है, जिससे कार्बन उत्सर्जन लगभग 100% कम हो गया है। इस बदलाव से साल 2022-23 में 1.88 करोड़ लीटर से ज्यादा डीजल की बचत हुई।

ऊर्जा की बचत के लिए सख्त कदम

कम बिजली खर्च करने के लिए शेड की संरचना में कई नवीन परिवर्तन किए गए हैं। परिसर में सौर ऊर्जा उत्पादन (सोलर पैनल) को बड़े पैमाने पर लागू किया गया है। पुराने बल्ब और हाई-इलेक्ट्रिसिटी पंखों को हटाकर LED लाइटें और 5-स्टार BLDC पंखे लगाए गए हैं। ऑक्यूपेंसी सेंसर और एस्ट्रोनॉमिकल टाइमर का उपयोग करके बिजली की खपत को लगातार कम किया जा रहा है।

पानी की बचत में भी मिल रही सफलता

वटवा लोको शेड ने पानी की बचत के लिए Rainwater Harvesting और Groundwater Recharge के सिस्टम लगाए हैं। इससे हर साल लगभग 20.5 लाख लीटर पानी सुरक्षित रखा जाता है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहतरीन कदम है।

नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता प्रभाव

अहमदाबाद मंडल में लगभग 1,863 किलोवाट पीक (kWp) क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इनसे प्रतिवर्ष लगभग 24.22 लाख यूनिट क्लीन एनर्जी का उत्पादन होता है। वटवा शेड के लिए समर्पित रूफटॉप सौर परियोजना भी प्रस्तावित है, जो भारतीय रेल के नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी का रिकॉर्ड

वटवा शेड में Scope-1, Scope-2, और Scope-3 के अंतर्गत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता में साल दर साल कमी दिखी जा रही है। यहां 800 से अधिक वृक्षों का संरक्षण किया गया है, जो पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस कदम से भारतीय रेलवे के वर्ष 2030 तक ‘नेट जीरो कार्बन उत्सर्जक’ (Net Zero Carbon Emitter) बनने के राष्ट्रीय संकल्प को बड़ी गति मिली है।

वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में नया अध्याय

लोको शेड ने वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। Zero Waste to Landfill दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें सही रीसाइक्लिंग और उत्पादों की छंटाई शामिल है। इस प्रक्रिया से सालाना लगभग 38 लाख रुपये की आर्थिक बचत सुनिश्चित हुई है। इस हरित पहल के बारे में विस्तृत जानकारी आप CII GreenCo Rating System की आधिकारिक वेबसाइट और पश्चिम रेलवे (Western Railway) के प्रेस पोर्टल पर देख सकते हैं।

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