UP में बिजली की रिकॉर्डतोड़ मांग, आपूर्ति पर सवाल उठ रहे
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के चलते बिजली की मांग 32,348 मेगावाट के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो पूरे देश में अब तक की सर्वाधिक मांग है। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) और ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा के अनुसार, राज्य ने 21 जून 2026 की रात को महाराष्ट्र के पुराने रिकॉर्ड (32,317 मेगावाट) को पीछे छोड़ते हुए इस भारी मांग की आपूर्ति का नया कीर्तिमान बनाया है। हालाँकि, इस रिकॉर्ड आपूर्ति के दावों के बीच जमीन पर स्थानीय फॉल्ट, ओवरलोडिंग और तकनीकी खामियों के कारण अघोषित बिजली कटौती की शिकायतें भी तेजी से बढ़ी हैं।
गर्मी के बीच बढ़ी बिजली की मांग
उत्तर प्रदेश में इस साल भीषण गर्मी ने बिजली की मांग को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है, जो अब 32,348 मेगावाट हो गई है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने यह दावा किया है कि यह संख्या देश में सबसे अधिक है। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। स्थानीय स्तर पर कई लोग बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से परेशान हैं, जबकि बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए मंत्री के वादे सामने आ रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री का आश्वासन
एके शर्मा ने कहा कि गर्मी के चरम दौर में शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में 22 से 22.5 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का भी दावा किया गया है। मंत्री का कहना है कि अगर कहीं तकनीकी खराबी या प्राकृतिक कारणों से बिजली सप्लाई प्रभावित होती है, तो उनके विभाग के कर्मचारी तुरंत मरम्मत कार्य में जुट जाते हैं।
बिजली कटौती की समस्या
हालांकि, बढ़ती मांग के साथ-साथ बिजली कटौती की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। कई इलाकों में नागरिकों ने बिजली कटौती के खिलाफ प्रदर्शन किया है। विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मंत्री शर्मा का कहना है कि रिकॉर्ड स्तर की मांग का पूरा करना इस बात का प्रमाण है कि ऊर्जा व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है।
बिजली कटौती और शिकायतों के मुख्य कारण
राज्य की कई प्रमुख उत्पादन इकाइयां (जैसे अनपरा, ओबरा, घाटमपुर और सिंगराउली की ट्रांसमिशन लाइनें) तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रभावित हुई हैं, जिससे रात के समय बिजली की उपलब्धता कम हो रही है। अत्यधिक गर्मी में लगातार एसी और कूलरों के चलने से ट्रांसफार्मर फुंकने, ट्रिपिंग और तारों के जलने जैसी शिकायतें आ रही हैं। शहरों में तो आपूर्ति को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में देर रात 1-2 बजे तक और दिन के कुछ हिस्सों में रोस्टरिंग (कटौती) के जरिए लोड को नियंत्रित किया जा रहा है।
सरकार और विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजली संकट पर सख्त रुख अपनाते हुए समीक्षा बैठकें की हैं और लापरवाही बरतने वाले कई अधिकारियों को तत्काल निलंबित भी किया है। UPPCL एनर्जी एक्सचेंज से महंगी दरों पर और अन्य राज्यों से अतिरिक्त बिजली खरीदने के निरंतर प्रयास कर रहा है ताकि मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटा जा सके। तकनीकी खराबियों को तत्काल ठीक करने और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए बिजली कर्मचारियों को चौबीसों घंटे तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली डिमांड के नए रिकॉर्ड
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में यूपी ने अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए नई ऊँचाइयों को छुआ है। पहले, राज्य में 31 हजार मेगावाट की मांग को पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन आज यह आंकड़ा 32,348 मेगावाट तक पहुंच गया है। मंत्रियों का कहना है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।
सकारात्मक संकेत के रूप में बढ़ती मांग
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का मानना है कि यह बढ़ती मांग विकास का संकेत देती है। उन्होंने कहा कि उद्योग, कृषि, घरेलू उपभोग और शहरीकरण के कारण बिजली की आवश्यकता बढ़ रही है। उनका लक्ष्य है कि प्रदेश के सभी उपभोक्ताओं को बिजली के लिए जूझना न पड़े और हर समय पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
बिजली कटौती की शिकायत कहाँ दर्ज करें?
यदि आप भी अपने क्षेत्र में बिजली की समस्या या अघोषित कटौती का सामना कर रहे हैं, तो आप निम्नलिखित माध्यमों से सीधे शिकायत दर्ज करा सकते हैं:
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राष्ट्रीय बिजली हेल्पलाइन: किसी भी शिकायत या पूछताछ के लिए सीधे 1912 पर कॉल करें (यह टोल-फ्री नंबर पूरे राज्य में सक्रिय है)।
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ट्विटर/एक्स (X): आप अपने जिले के बिजली विभाग (जैसे @UpenergyNews, @puvvnlhq, @mvvnlhq आदि) को टैग करके सीधे शिकायत पोस्ट कर सकते हैं।

