बदल जाएगी देश की टोल प्रणाली, नो बैरियर, नो जाम- सैटेलाइट टोल से 60% कम होगा खर्च

The CSR Journal Magazine

60 प्रतिशत कम होगा टोल, 80 KM/H की स्पीड से चलेंगी गाड़ियां, क्या बदलेगा हाईवे का गेम?

2026 के अंत तक भारत का हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह बदलने जा रहा है क्योंकि सरकार सैटेलाइट और AI आधारित ‘मल्टी-लेन फ्री फ्लो’ (MLFF) टोलिंग सिस्टम लागू करने जा रही है। इस नई तकनीक के आने से नेशनल हाईवे पर लगे पारंपरिक फिजिकल टोल प्लाजा और उनके बैरियर पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इस क्रांतिकारी कदम से हाईवे पर सफर करने का पूरा तरीका बदल जाएगा।

बदल जाएगी टोल प्रणाली

देश के हाईवे पर टोल प्लाजा का चेहरा पूरी तरह बदल सकता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि सरकार सैटेलाइट आधारित टोल सिस्टम लागू करने जा रही है। इससे वाहन चालक बिना रुके 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से टोल प्वाइंट पार कर सकेंगे। नई व्यवस्था से समय, ईंधन और पैसा तीनों बचने का दावा किया जा रहा है। यह आधुनिक तकनीक जल्द ही पूरे देश के हाईवे पर लागू की जाएगी।

डिजिटल टोलिंग का नया तरीका

नई व्यवस्था के तहत मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) और सैटेलाइट टोलिंग का परीक्षण दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर शुरू किया गया है। इस तकनीक के माध्यम से वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नंबर प्लेट पहचान तकनीक से टोल स्वयं कट जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली कतारें पूरी तरह खत्म हो जाएंगी।

टोल दरों में 60% की कमी

सरकार ने दावा किया है कि नई डिजिटल टोलिंग व्यवस्था से टोल शुल्क में 60 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। इस नई प्रणाली से टोल कलेक्शन शुद्ध और सटीक होगा, जिससे हाईवे निर्माण लागत और भुगतान भी अधिक पारदर्शी बन सकेगा। वर्तमान में, टोल वसूली कई जटिलताओं से भरी होती है, लेकिन डिजिटल मॉडल के तहत यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी।

सैटेलाइट टोल सिस्टम क्या है?

सैटेलाइट टोल सिस्टम या GNSS (Global Navigation Satellite System) आधारित टोलिंग एक खास तकनीक है, जिससे टोल प्लाजा की आवश्यकता कम हो जाती है। व्यवस्था के अनुसार, वाहन की यात्रा का पूरा रिकॉर्ड सैटेलाइट और डिजिटल ट्रैकिंग द्वारा रखा जाएगा। इससे उपयोग के अनुसार टोल का चालान किया जाएगा, जो वर्तमान प्रणाली की तुलना में अधिक निष्पक्ष होगा।

कैसे काम करेगा नया डिजिटल टोल मॉडल?

नई व्यवस्था में वाहन में एक ओन-बोर्ड यूनिट (OBU) लगेगा जो वाहन की लोकेशन और यात्रा मार्ग को ट्रैक करेगा। जैसे ही वाहन टोल क्षेत्र में प्रवेश करेगा, सिस्टम तय दूरी को कैलकुलेट कर लेगा। इसके बाद निर्धारित राशि सीधे वाहन मालिक के बैंक अकाउंट या वॉलेट से कट जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी बैरियर या मैनुअल जांच के होगी।

रफ्तार का नया गेम-80 KM/H की स्पीड में बिना रुके सफर

अभी FASTag होने के बावजूद गाड़ियों को टोल बूथ पर धीमा होना या रुकना पड़ता है। नए MLFF और GNSS (Global Navigation Satellite System) के तहत गाड़ियां 80 किमी/घंटा की अधिकतम रफ्तार से बिना रुके टोल पार कर सकेंगी और टैक्स अपने आप कट जाएगा। टोल प्लाजा पर लगने वाला जाम हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा, जिससे सफर का समय काफी घट जाएगा।

बिना डिवाइस वाले वाहनों का क्या?

सरकार ने बिना ओबीयू वाले वाहनों के लिए भी उपाय किया है। ऐसे वाहनों की पहचान ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक से की जाएगी। हाईवे पर लगे हाई रिजोल्यूशन कैमरे नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और उसी आधार पर टोल काटा जाएगा। इस प्रणाली से टोल चोरी रोकने में मदद मिलेगी और राजस्व संग्रह बढ़ेगा।

टोल का नया गणित-दूरी के हिसाब से भुगतान

अभी अगर आप हाईवे पर सिर्फ 10 या 20 किलोमीटर चलते हैं, तो भी आपको पूरे टोल ब्लॉक का फिक्स चार्ज देना पड़ता है। नई तकनीक में गाड़ी में लगे ऑन-बोर्ड यूनिट (OBU) और सैटेलाइट ट्रैकिंग की मदद से केवल उतनी ही दूरी का टोल कटेगा जितनी दूरी आपने असल में तय की है। छोटे सफर तय करने वालों का टोल खर्च इससे 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है।

टेस्टिंग चरण में है नया सिस्टम

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर डिजिटल टोलिंग मॉडल की टेस्टिंग शुरू कर दी गई है। इस दौरान यह देखा जाएगा कि सैटेलाइट, कैमरा, फास्टैग और एआई आधारित सिस्टम कितनी सटीकता से कार्य करते हैं। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो 2027 तक यह प्रणाली अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी लागू की जाएगी।

देश के राजस्व में बढ़ोतरी

गाड़ियों को बार-बार रुकना और स्टार्ट नहीं करना पड़ेगा, जिससे हर साल लगभग ₹1,500 करोड़ का ईंधन बचेगा। टोल चोरी पूरी तरह बंद होने से सरकारी राजस्व में ₹6,000 करोड़ का इजाफा होने की उम्मीद है। वर्तमान में NHAI द्वारा दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) के दौलतपुरा टोल प्लाजा पर इसका सफल पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू कर दिया गया है।

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