महाराष्ट्र में इस साल नहीं लागू होगा केवल मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं का नियम, सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताई बड़ी वजह
महाराष्ट्र में इस वर्ष आयोजित होने वाले गणेशोत्सव के दौरान केवल मिट्टी (Clay) की गणेश प्रतिमाओं के उपयोग का नियम लागू नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने इस संबंध में बॉम्बे हाईकोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया है कि गणेशोत्सव शुरू होने में अब बहुत कम समय बचा है और प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की अधिकांश प्रतिमाएं पहले ही तैयार की जा चुकी हैं। ऐसे में इस वर्ष अचानक नियम लागू करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मौजूदा दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और अगले वर्ष से चरणबद्ध तरीके से मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देने तथा PoP प्रतिमाओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
बॉम्बे हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष
मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि इस वर्ष गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू हो रहा है। त्योहार में लगभग 40 दिन का ही समय शेष है, जबकि अधिकांश मूर्तिकार पहले ही PoP की प्रतिमाओं का निर्माण कर चुके हैं। सरकार ने कहा कि यदि इस समय अचानक केवल मिट्टी की प्रतिमाओं का नियम लागू किया जाता है तो लाखों मूर्तिकारों, दुकानदारों और श्रद्धालुओं के सामने गंभीर व्यावहारिक और आर्थिक समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। इसलिए इस वर्ष पुराने प्रावधानों के तहत ही उत्सव आयोजित किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की अपील का दिया हवाला
सरकार ने अदालत को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर देशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए मिट्टी से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं का उपयोग करने की अपील करते रहे हैं। राज्य सरकार भी इस दिशा में काम करना चाहती है, लेकिन इतने कम समय में इसे पूरी तरह लागू करना संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि इस वर्ष जनजागरूकता बढ़ाने और अगले वर्ष के लिए आवश्यक तैयारियां करने पर जोर दिया जाएगा।
2025 के हाईकोर्ट आदेश का होगा पालन
सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि जुलाई 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। इन निर्देशों के तहत—
-
विसर्जन के बाद 24 घंटे के भीतर जलाशयों से प्रतिमाओं के अवशेष हटाए जाएंगे।
-
सफाई अभियान को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
-
स्थानीय निकायों को विशेष जिम्मेदारी दी जाएगी।
-
प्रदूषण नियंत्रण के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी।
सरकार ने कहा कि इससे जल स्रोतों में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
प्राकृतिक जलाशयों में PoP प्रतिमाओं को रोकने की तैयारी
सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि भविष्य में प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं को सीधे नदियों, झीलों और समुद्र में विसर्जित होने से रोकने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके लिए—
-
कृत्रिम विसर्जन कुंडों (Artificial Ponds) की संख्या बढ़ाई जाएगी।
-
नगर निगमों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
-
लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने के लिए जागरूक किया जाएगा।
-
पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
31 जुलाई की बैठक में उठा था मुद्दा
इस विषय पर 31 जुलाई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अखिल सार्वजनिक उत्सव समिति के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत बैठक की थी। बैठक में समिति ने सरकार के सामने कई व्यावहारिक समस्याएं रखीं। समिति का कहना था कि पूरे महाराष्ट्र में पर्याप्त मात्रा में प्राकृतिक मिट्टी उपलब्ध नहीं है। राज्य भर में लाखों प्रतिमाओं की मांग इतनी कम अवधि में मिट्टी से पूरी नहीं की जा सकती। हजारों मूर्तिकार पहले ही PoP प्रतिमाएं तैयार कर चुके हैं। अचानक प्रतिबंध से छोटे कारीगरों को भारी आर्थिक नुकसान होगा। समिति ने सरकार से इस वर्ष प्रतिबंध लागू न करने का आग्रह किया।
समिति ने दिए वैकल्पिक सुझाव
बैठक में सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों और मूर्तिकारों ने सरकार को कई सुझाव भी दिए। इनमें प्रमुख रूप से—
-
इको-फ्रेंडली रंगों का अनिवार्य उपयोग।
-
कृत्रिम तालाबों में अधिक से अधिक विसर्जन।
-
PoP प्रतिमाओं के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था।
-
श्रद्धालुओं के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता अभियान।
-
अगले वर्ष से चरणबद्ध बदलाव की योजना।
क्या है प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) विवाद?
प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी प्रतिमाएं लंबे समय तक पानी में नहीं घुलतीं। इनमें उपयोग होने वाले कई रासायनिक रंग और धातुएं जल प्रदूषण का कारण बन सकती हैं। विसर्जन के बाद ये प्रतिमाएं नदी, झील और समुद्र के तल में जमा होकर पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। दूसरी ओर, प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं अपेक्षाकृत जल्दी पानी में घुल जाती हैं और पर्यावरण पर उनका प्रभाव कम माना जाता है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों से पर्यावरणविद् मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग पर जोर देते रहे हैं।
कारीगरों की भी अपनी चुनौतियां
मूर्तिकारों का कहना है कि केवल मिट्टी की प्रतिमाओं के निर्माण में कई व्यावहारिक कठिनाइयां हैं। उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी आसानी से उपलब्ध नहीं होती। मिट्टी की प्रतिमाएं अधिक नाजुक होती हैं और इनके निर्माण में अधिक समय लगता है। बड़े आकार की प्रतिमाएं बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। लागत भी कई मामलों में बढ़ जाती है। इसी कारण कई कारीगर अभी भी PoP पर निर्भर हैं।
सरकार की आगे की रणनीति
सरकार ने अदालत को संकेत दिया है कि अगले वर्ष से व्यापक स्तर पर तैयारी की जाएगी। इसके लिए—
-
मिट्टी की उपलब्धता बढ़ाने की योजना बनाई जाएगी।
-
मूर्तिकारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-
पर्यावरण अनुकूल प्रतिमाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
-
स्थानीय निकायों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
-
विसर्जन प्रबंधन को और मजबूत किया जाएगा।
पर्यावरण और परंपरा के बीच संतुलन की चुनौती
गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा पर्व माना जाता है। हर वर्ष लाखों प्रतिमाओं की स्थापना और विसर्जन होता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक परंपराओं के बीच संतुलन बनाना सरकार, न्यायपालिका, मूर्तिकारों और समाज—सभी के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अचानक प्रतिबंध लगाने के बजाय चरणबद्ध परिवर्तन अधिक व्यावहारिक होगा। इससे पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी और मूर्तिकारों की आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
महाराष्ट्र में अनुमानित गणेश प्रतिमाएं
-
घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाएं: लगभग 65–70 लाख प्रतिमाएं।
-
सार्वजनिक गणेश मंडल (पंडाल): लगभग 2.3–2.5 लाख सार्वजनिक गणेश प्रतिमाएं/मंडल। यह आंकड़ा महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) की अध्ययन रिपोर्ट में दर्ज अनुमान पर आधारित है।
कुल प्रतिमाएं
महाराष्ट्र में हर वर्ष लगभग 68 लाख से अधिक गणेश प्रतिमाओं की स्थापना होती है, जिनमें लगभग 65.67 लाख घरों में स्थापित होती हैं।लगभग 2.34 लाख सार्वजनिक गणेश मंडलों में स्थापित की जाती हैं।
मुंबई की स्थिति
मुंबई में गणेशोत्सव सबसे बड़े स्तर पर मनाया जाता है। हाल के वर्षों के आंकड़ों के अनुसार:
-
सार्वजनिक गणेश मंडल: लगभग 10,000–12,000
-
घरेलू गणेश प्रतिमाएं: लगभग 1.8 लाख से 2 लाख प्रतिवर्ष विसर्जित होती हैं।
पुणे के बप्पा
-
सार्वजनिक मंडल: लगभग 3,500–4,000
-
घरेलू प्रतिमाएं: लगभग 3–4 लाख (विभिन्न स्थानीय प्रशासनिक अनुमानों के अनुसार)
नागपुर, ठाणे, नासिक, कोल्हापुर सहित अन्य शहर
इन शहरों को मिलाकर हजारों सार्वजनिक मंडल और लाखों घरेलू प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। पूरे राज्य में गणेशोत्सव का दायरा ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अत्यंत व्यापक है।
ध्यान देने योग्य बात
वर्ष 2026 में मिट्टी (Clay) और PoP प्रतिमाओं को लेकर चल रही बहस के बीच भी राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया है कि इस वर्ष अधिकांश PoP प्रतिमाएं पहले ही बन चुकी हैं और अगले वर्ष से चरणबद्ध तरीके से मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की योजना है।
फिलहाल क्या रहेगा नियम?
इस वर्ष महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान PoP प्रतिमाओं पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं होगा। राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट को आश्वस्त किया है कि मौजूदा न्यायिक निर्देशों का पालन करते हुए विसर्जन के बाद सफाई, कृत्रिम विसर्जन स्थलों के उपयोग और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, अगले वर्ष से पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की प्रतिमाओं के व्यापक उपयोग के लिए आवश्यक प्रशासनिक और व्यावहारिक तैयारियां पूरी करने की दिशा में काम किया जाएगा।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections.
Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast,
crisp, clean updates!
Google Play Store –

