बंगाल की राजनीति में नया ट्विस्ट: NDA बैठक का बहिष्कार कर तीन TMC बागियों का एंटी-BJP रुख

The CSR Journal Magazine

TMC के तीन बागी सांसदों ने BJP में जाने से किया इनकार, भाजपा से नजदीकी पर सांसदों की प्रतिक्रिया

तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत कर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए तीन लोकसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है। इन तीनों सांसदों, यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान ने स्पष्ट किया है कि वे केवल अपनी वर्तमान पार्टी NCPI के साथ बने रहना चाहते हैं और वैचारिक मतभेदों के चलते वे भाजपा के साथ किसी भी मंच पर नहीं जाएंगे।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में हुई ऐतिहासिक टूट के बाद राज्य की राजनीति में एक नया और बेहद दिलचस्प मोड़ आ गया है। TMC से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामने वाले 20 बागी लोकसभा सांसदों के गुट में अब आंतरिक मतभेद और दरार खुलकर सामने आ गई है। इस गुट के तीन प्रमुख मुस्लिम सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) या उसके नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन का हिस्सा बनने की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है।

NDA की बैठक से लगातार दूसरी बार दूरी

संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में आयोजित एनडीए संसदीय दल की महत्वपूर्ण बैठक (मंगल मिलन) से इन तीनों सांसदों ने खुद को दूर रखा। यह लगातार दूसरा मौका था जब मुर्शिदाबाद जिले से आने वाले इन तीनों जनप्रतिक्षियों ने इस गठबंधन की बैठक में शिरकत नहीं की। संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए मुर्शिदाबाद सीट से सांसद अबू ताहेर खान ने दोटूक शब्दों में कहा, “हम NDA के साथ नहीं हैं और न ही भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं, इस बात को लेकर हर कोई पूरी तरह आश्वस्त रहे। हम ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाएंगे जो हमारे अल्पसंख्यकों और मतदाताओं की भावनाओं के खिलाफ हो।” इस दौरान जंगीपुर से सांसद खलीलुर रहमान भी उनके साथ खड़े नजर आए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर और बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान ने भी इसी रुख का समर्थन किया है।

चुनावी क्षेत्र का दबाव और वैचारिक मतभेद

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीनों सांसदों का यह कदम उनके निर्वाचन क्षेत्रों के समीकरणों से जुड़ा हुआ है। ये तीनों ही सांसद पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल जिलों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूत्रों के मुताबिक TMC छोड़ने और NDA के प्रति झुकाव रखने वाली पार्टी NCPI में शामिल होने के बाद से ही इन्हें अपने जमीनी मतदाताओं के कड़े विरोध और तीखे सवालों का सामना करना पड़ रहा था। मतदाताओं की नाराजगी और वैचारिक असमानता के कारण ही इन नेताओं को भाजपा विरोधी स्टैंड लेने पर मजबूर होना पड़ा है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता सौगत राय ने भी इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इन सांसदों की विचारधारा कभी भी भाजपा या एनडीए से मेल नहीं खा सकती।

शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात, मगर सिर्फ ‘विकास’ के लिए

एक तरफ जहां इन सांसदों ने एनडीए की राजनीतिक बैठक का बहिष्कार किया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक समन्वय बैठक में भाग लिया। इस बैठक में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद थे। इस मुलाकात पर सफाई देते हुए बागी सांसदों ने कहा कि यह कोई राजनीतिक गठबंधन की बैठक नहीं थी, बल्कि विशुद्ध रूप से उनके संसदीय क्षेत्रों के विकास कार्यों और प्रशासनिक मुद्दों से जुड़ी हुई चर्चा थी। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के सामने मतदाता सूची से हटाए गए 27 से 32 लाख मतदाताओं के नामों का मुद्दा उठाया और क्षेत्रों के केंद्रीय फंड को लेकर बात की।

एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल कानून) का गहराया संकट

तीन सांसदों के इस बागी रुख ने अब पूरे गुट के सामने एक बड़ा कानूनी संकट खड़ा कर दिया है। जून 2026 में टीएमसी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत कर खुद को NCPI में विलय घोषित कर दिया था। दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) से बचने के लिए किसी भी मूल दल के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सांसदों का अलग होना अनिवार्य है, जो कि 28 का दो-तिहाई यानी कम से कम 19 सांसद होता है। यदि ये तीन सांसद पूरी तरह से अलग रास्ता चुनते हैं या NCPI के एनडीए में विलय के प्रस्ताव का विरोध करते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास लंबित इस गुट की आधिकारिक मान्यता का मामला पूरी तरह उलझ सकता है। ऐसी स्थिति में इन बागी सांसदों की संसद सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है।

ममता बनर्जी का केंद्रीय एजेंसियों पर बड़ा आरोप

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने एक सोशल मीडिया लाइव में आरोप लगाया कि जो सांसद और विधायक पार्टी छोड़कर गए हैं, उन्होंने स्वेच्छा से ऐसा नहीं किया है। ममता बनर्जी ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई (CBI) और स्थानीय पुलिस के माध्यम से इन नेताओं को डराया-धमकाया गया और “भाजपा के साथ जाओ या जेल जाओ” की धमकी देकर जबरन पाला बदलवाया गया है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos