TMC में बड़ी टूट: 23 सांसदों के बाद 58 विधायक अलग, ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें

The CSR Journal Magazine
ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत का सिलसिला थम नहीं रहा है। हाल ही में राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने पार्टी से इस्तीफा दिया है। पिछले चार दिनों में यह तीसरा इस्तीफा है। एक दिन पहले सुष्मिता देव ने भी पार्टी छोड़ने का फैसला किया। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु ने भी TMC और सांसद पद से इस्तीफा दिया। अब तक कुल 23 सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, जिसमें 28 लोकसभा सांसदों में से 20 और 13 राज्यसभा सांसदों में से 3 शामिल हैं।

58 विधायकों ने बनाया अलग गुट

3 जून को पश्चिम बंगाल के 80 विधायकों में से 58 ने एक अलग गुट बना लिया है। इन विधायकों ने स्पीकर को पत्र भेजकर ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने की मांग की। ऋतब्रत ने कहा कि हमारे पास 64 विधायक हैं और बाकी 6 विधायक भी जल्द ही पत्र देंगे। यह स्थिति TMC के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

राजनीतिक हलचल: TMC के भीतर और बगावत?

अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को राहुल गांधी से मुलाकात की, जबकि ममता सोणिया गांधी से मिलीं। इन बैठकों से यह संकेत मिलता है कि TMC की वर्तमान स्थिति को लेकर पार्टी के भीतर गंभीर चर्चाएँ हो रही हैं। पिछले 28 सालों में TMC के पास जो ताकत थी, वह अब धीरे-धीरे कम होती जा रही है।

बागी सांसदों की स्थिति स्पष्ट

8 जून को 20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का निर्णय लिया। पूर्व सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बताया कि एक पत्र लोकसभा स्पीकर को भेजा गया, जिसमें अलग संसदीय ब्लॉक बनाने की मांग की गई। इससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।

ममता और बागियों के बीच कानूनी लड़ाई

अब सवाल यह है कि बागियों और mamata के गुट के बीच कानूनी विवाद बढ़ेगा। दल-बदल कानून और दोनों पक्षों के दावों पर अदालत में सुनवाई होने की संभावना है। बागी विधायकों का दावा है कि उनके पास दो-तिहाई संख्या है, जिससे उनकी वैधता को चुनौती दी जा सकती है।

TMC की राजनीतिक स्थिति पर दबाव

ममता बनर्जी को अब संगठन में असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। कुछ और विधायकों और सांसदों के पार्टी के अलग होने की संभावना है। ममता अब डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर सकती हैं और असंतुष्टों को मनाने का प्रयास कर सकती हैं।

भाजपा और कांग्रेस का ध्यान

विपक्षी दल भी TMC के संकट का फायदा उठाने की फिराक में हैं। यदि यह बगावत और गहरी होती है, तो आने वाले चुनावों में TMC के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।

बागियों की नई राजनीतिक राह

यदि बागी खेमे के नेता समझौता नहीं करते, तो एक नए राजनीतिक दल या स्थायी गुट का उदय हो सकता है। यह स्थिति TMC के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

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