Thackeray Brothers Lost Election: मुंबई में आगामी बीएमसी चुनाव (BMC Election) से पहले ठाकरे बंधुओं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की साझेदारी को पहला बड़ा झटका लगा है। बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट (BEST) के कर्मचारी क्रेडिट सोसायटी चुनाव में ‘उत्कर्ष’ पैनल के तहत चुनाव लड़ने वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) (Shivsena-MNS) को सभी 21 सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा।
Thackeray Brothers Lost Election: गठबंधन की पहली परीक्षा में मिली नाकामी
उद्धव और राज ठाकरे लगभग दो दशकों बाद एक मंच पर आए थे, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई थी। माना जा रहा था कि यह गठबंधन महाराष्ट्र में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों, विशेषकर बीएमसी चुनाव के लिए एक परीक्षण होगा। लेकिन BEST की इस हाई-प्रोफाइल क्रेडिट सोसायटी के चुनाव में मिली 0-21 की हार ने इस साझेदारी की ताकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘उत्कर्ष’ पैनल का सूपड़ा साफ
शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने ‘उत्कर्ष’ नाम से गठित पैनल में कुल 21 उम्मीदवार उतारे थे जिनमें 18 शिवसेना से, 2 मनसे से और एक अनुसूचित जाति एवं जनजाति संघ से था। लेकिन नतीजों में इस पैनल का खाता तक नहीं खुला। इस चुनाव में शशांक राव के नेतृत्व वाले पैनल ने 14 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बाकी सीटों पर अन्य प्रतिद्वंद्वियों ने बाजी मारी।
धनबल का आरोप, साख पर सवाल
BEST कामगार सेना के प्रमुख सुहास सामंत ने इस हार को “हैरान करने वाला” बताया और चुनाव में धनबल के दुरुपयोग का आरोप लगाया। मनसे नेता संदीप देशपांडे ने भी दावा किया कि मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसों का खुलकर इस्तेमाल हुआ।
बीएमसी चुनाव पर पड़ेगा असर?
इस हार से ठाकरे बंधुओं के संभावित गठबंधन की दिशा और धार पर असर पड़ सकता है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की मनसे बीएमसी चुनावों में साथ आकर बीजेपी और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट को चुनौती देना चाह रहे थे। लेकिन BEST चुनाव के नतीजों ने इस जोड़ी की चुनावी ताकत और जनाधार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Thackeray Brothers Lost Election: क्या है BEST चुनाव?
BEST एम्प्लॉइज कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड के चुनाव में इस उपक्रम के मौजूदा और पूर्व कर्मचारी मतदाता होते हैं। करीब 15,000 सदस्यों वाली इस सोसायटी पर लंबे समय से शिवसेना (उबाठा) से जुड़ी बेस्ट कामगार सेना का दबदबा रहा है। लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बदलते नजर आए। BEST चुनाव के नतीजों ने सिर्फ उद्धव और राज ठाकरे के गठबंधन को झटका नहीं दिया, बल्कि बीएमसी चुनाव से पहले विपक्ष के खेमे में चिंता की लहर दौड़ा दी है। अब देखना यह होगा कि ठाकरे बंधु इस हार से सबक लेकर भविष्य की रणनीति कैसे तय करते हैं।
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