जनगणना 2027: जारी हुई 40 सवालों की लिस्ट, जाति से लेकर कोविड वैक्सीन तक पर उठेंगे सवाल

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Census 2027: 40 सवालों की लिस्ट जारी, जाति से लेकर बैंक अकाउंट तक पूछे जाएंगे सवाल

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आगामी ‘जनगणना 2027’ के लिए 40 सवालों की आधिकारिक सूची (अधिसूचना) जारी कर दी है, जिसके तहत नागरिकों से जातिगत विवरण से लेकर उनके बैंक खातों की संख्या जैसी बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील जानकारियां मांगी जाएंगी। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब व्यापक स्तर पर इस तरह से जाति की गणना की जा रही है, जो इससे पहले आखिरी बार ब्रिटिश काल में साल 1931 में की गई थी। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी इस गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी।

राष्ट्रीय जनगणना 2027: गृह मंत्रालय ने जारी की 40 सवालों की सूची

देश की आगामी डिजिटल जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने आज एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर ‘जनगणना 2027’ के मुख्य चरण (जनसंख्या गणना) के लिए 40 अनिवार्य सवालों की सूची जारी कर दी है। इस बार की जनगणना में पारंपरिक जनसांख्यिकीय आंकड़ों के अलावा नागरिकों की आर्थिक स्थिति, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक पहचान से जुड़े कई नए और कड़े सवाल शामिल किए गए हैं।

पहली बार पूछी जाएगी जाति

सरकार द्वारा जारी प्रश्नावली में सबसे बड़ा बदलाव 10वें स्थान पर मौजूद सवाल को लेकर है, जिसमें नागरिकों से उनकी अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) के साथ-साथ उनकी विशिष्ट ‘जाति’ की स्पष्ट जानकारी मांगी गई है। स्वतंत्र भारत में यह पहली बार है जब हर नागरिक से उसकी जाति पूछी जाएगी।

पूरी तरह डिजिटल होगी प्रक्रिया; ₹11,718 करोड़ का बजट

भारत सरकार इस महा-अभियान को पूरी तरह आधुनिक और कागज-रहित बनाने जा रही है। देश का यह अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल जनगणना अभियान होगा, जिसमें डेटा संकलन के लिए एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। इस पूरी दशकीय जनगणना प्रक्रिया (जो कि कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी) को पूरा करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट पहले ही 11,718 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर कर चुकी है। बर्फबारी वाले दुर्गम क्षेत्रों (जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्से) में जनसंख्या गणना का यह चरण इसी वर्ष 1 सितंबर से 30 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह प्रक्रिया अगले वर्ष की शुरुआत में शुरू होगी।

पूछे जाने वाले प्रमुख 40 सवालों का वर्गीकरण

नागरिकों से ‘हाउसहोल्ड शेड्यूल’ (परिवार अनुसूची) के माध्यम से जुटाई जाने वाली जानकारियों को मुख्य रूप से निम्नलिखित भागों में वर्गीकृत किया गया है,

व्यक्तिगत और पारिवारिक पहचान

व्यक्ति का नाम और परिवार के मुखिया से उसका संबंध।
लिंग, जन्म तिथि, वर्तमान आयु और राष्ट्रीयता (घोषित रूप में)।
वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र और पति/पत्नी का नाम।
माता-पिता का नाम और परिवार में किसी भी प्रकार की दिव्यांगता की स्थिति।

सामाजिक और धार्मिक पहचान

नागरिक का धर्म।
जातिगत विवरण: अनुसूचित जाति (SC)/अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य विशिष्ट जाति का नाम।

शिक्षा और डिजिटल साक्षरता

मातृभाषा और अन्य भाषाओं का ज्ञान।
साक्षरता की स्थिति के साथ-साथ इस बार ‘डिजिटल साक्षरता’ (इंटरनेट/गैजेट्स इस्तेमाल करने की क्षमता) को भी दर्ज किया जाएगा।
वर्तमान में शैक्षणिक संस्थान में उपस्थिति और हासिल की गई उच्चतम शिक्षा/स्ट्रीम।

आर्थिक गतिविधि और रोजगार

पिछले एक वर्ष में किए गए कार्य का विवरण और आर्थिक गतिविधि की श्रेणी।
मुख्य व्यवसाय, उद्योग, व्यापार या सेवा का क्षेत्र और कर्मचारी का वर्ग।
कार्यस्थल तक जाने के लिए यात्रा का माध्यम (ट्रांसपोर्ट)।
गैर-कामकाजी लोगों के लिए रोजगार की उपलब्धता या काम की तलाश से जुड़ा सवाल।

प्रवासन और महिलाओं से जुड़े आंकड़े

जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान और प्रवासन (माइग्रेशन) का मुख्य कारण।
वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि और स्थायी आवासीय पता।
विवाहित, विधवा या तलाकशुदा महिलाओं से वर्तमान में जीवित बच्चों की संख्या और पिछले एक वर्ष में जन्मे बच्चों का विवरण।

वित्तीय दस्तावेज और नए डिजिटल सवाल (महत्वपूर्ण जुड़ाव)

बैंक खातों की संख्या: परिवार के सदस्यों के पास कुल कितने सक्रिय बैंक खाते हैं।
कोविड-19 टीकाकरण का स्थान: कोरोना वैक्सीन की खुराक किस जगह (अस्पताल/केंद्र) पर ली गई थी।
आधिकारिक दस्तावेज (ऐच्छिक/उपलब्धता के आधार पर): मोबाइल नंबर, आधार नंबर, वोटर आईडी कार्ड नंबर, भारतीय पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता।

क्यों खास है इस बार की जनगणना?

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बार की प्रश्नावली को केवल आबादी गिनने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को गहराई से समझने के लिए डिजाइन किया गया है। बैंक खातों और आधार जैसे डिजिटल नंबरों की मैपिंग से सरकारी योजनाओं के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सकेगा। वहीं, जातिगत आंकड़ों के संकलन से भविष्य की आरक्षण नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के निर्धारण में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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