Sonia Gandhi Vande Mataram Controversy: बीजेपी ने लगाया सोनिया गांधी पर आरोप, वंदे मातरम के पूरा गाने से रोकने की कोशिश 

The CSR Journal Magazine
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाए जाने पर आपत्ति जताई गई और इसे रोकने की कोशिश हुई। कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम गाया गया और सोनिया गांधी का इशारा गाना रोकने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय से खड़े कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मंगाने को लेकर था।

Sonia Gandhi Vande Mataram Controversy: वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में तिरंगा फहराने के बाद वंदे मातरम का गायन हुआ। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से कुछ इशारे करते हुए दिखाई देने के बाद बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाए। बीजेपी ने दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व वंदे मातरम के पूरे संस्करण को गाने के पक्ष में नहीं था।  बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रीय गीत के प्रति कांग्रेस के रवैये से जोड़ते हुए निशाना साधा। बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए।

Sonia Gandhi Vande Mataram Controversy: कांग्रेस ने क्या सफाई दी?

बीजेपी के आरोपों के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि वीडियो में सोनिया गांधी जिस बात की ओर इशारा कर रही थीं, उसका वंदे मातरम को रोकने से कोई संबंध नहीं था। उनके मुताबिक सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी लाने को कह रही थीं, क्योंकि खड़गे काफी देर से खड़े थे। कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम गाया गया और किसी ने इसे बीच में रोकने की कोशिश नहीं की। इसलिए बीजेपी द्वारा वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों को पार्टी ने गलत बताया है।

आखिर पूरा वंदे मातरम क्यों बना विवाद का मुद्दा?

इस विवाद को समझने के लिए वंदे मातरम के इतिहास को समझना जरूरी है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना वंदे मातरम स्वतंत्रता आंदोलन में बेहद महत्वपूर्ण गीत रहा है। इसे 1896 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। बाद में यह स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख राष्ट्रवादी गीत बन गया। हालांकि पूरे गीत के कुछ बाद के अंतरों में धार्मिक संदर्भ होने को लेकर उस समय आपत्तियां उठी थीं। इसी पृष्ठभूमि में 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने फैसला किया था कि राष्ट्रीय सभाओं और सार्वजनिक आयोजनों में वंदे मातरम के पहले दो अंतरे गाए जाएं।

1937 में कांग्रेस ने क्यों तय किए थे पहले दो अंतरे?

28 अक्टूबर 1937 को कांग्रेस कार्यसमिति ने वंदे मातरम को लेकर विस्तृत विचार किया था। समिति ने माना कि गीत के शुरुआती दो अंतरे स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक रूप से गाए जाते रहे हैं और इनमें ऐसी बात नहीं है जिससे किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे। समिति ने राष्ट्रीय सभाओं में पहले दो अंतरे गाने की सिफारिश की। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, गीत के बाद के अंतरे अपेक्षाकृत कम गाए जाते थे और उनमें धार्मिक विचारों से जुड़े संदर्भ थे, जिन पर कुछ समुदायों की आपत्ति थी।

टैगोर की सलाह का भी कांग्रेस ने दिया हवाला

कांग्रेस ने मौजूदा विवाद के बीच रवींद्रनाथ टैगोर की राय का भी उल्लेख किया है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक टैगोर का मानना था कि वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरों ने राष्ट्रीय जीवन में अलग पहचान हासिल कर ली थी और इन्हें सार्वजनिक आयोजनों में गाया जा सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस का कहना है कि पहले दो अंतरों की परंपरा किसी हालिया राजनीतिक फैसले का परिणाम नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लिया गया ऐतिहासिक निर्णय है।

विवाद सिर्फ कांग्रेस बनाम BJP तक सीमित नहीं

वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बहस नई नहीं है। 2026 में संसद में भी राष्ट्रीय गीत को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस हो चुकी है। इस दौरान कांग्रेस ने 1937 के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह फैसला अकेले जवाहरलाल नेहरू का नहीं था, बल्कि कांग्रेस कार्यसमिति के कई प्रमुख नेताओं से जुड़ा सामूहिक निर्णय था। दूसरी ओर, बीजेपी लंबे समय से कांग्रेस पर वंदे मातरम को लेकर कथित तौर पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाती रही है।

क्या सच में राहुल और सोनिया ने वंदे मातरम रोकने को कहा?

मौजूदा उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि राहुल गांधी या सोनिया गांधी ने वंदे मातरम को रोकने का स्पष्ट निर्देश दिया था। विवाद की शुरुआत वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले इशारों से हुई है, जबकि कांग्रेस ने इसकी अलग व्याख्या दी है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि कांग्रेस के मुताबिक कार्यक्रम में पूरा वंदे मातरम गाया गया था। इसलिए फिलहाल मामला बीजेपी के आरोप बनाम कांग्रेस की सफाई के रूप में सामने आया है। स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर सामने आया यह विवाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
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