महिला आरक्षण पर शरद पवार का बड़ा दांव, NDA में शामिल होने की अटकलों पर लगाम

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महिला आरक्षण पर नया मोड़, शरद पवार की राजनीतिक हलचल से गूंज उठी महाराष्ट्र की राजनीति

महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिति तेजी से बदल रही है। शरद पवार की नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक का समर्थन करने की बातचीत कर रही है, जबकि पहले इसका कड़ा विरोध किया गया था। हाल ही में भाजपा के नेताओं से हुई चर्चा के बाद यह बदलाव आया है। सूत्रों का कहना है कि यह कदम पार्टी में संभावित टूट को रोकने और सांसदों को एकजुट रखने की रणनीति के तहत उठाया जा रहा है।

बंद कमरे की बैठक में उठे मुद्दे

मंगलवार की रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ पर शरद पवार की एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच एक गुप्त बैठक हुई। इस बैठक में एनसीपी (शरद पवार) के नेता जयंत पाटिल, प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे शामिल थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य क्या था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर देंगे ‘मुद्दा-आधारित’ बाहरी समर्थन

आगामी संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SP) के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की अटकलों के बीच पार्टी ने अपना रुख साफ कर दिया है। एनसीपी (एसपी) एनडीए का हिस्सा नहीं बनेगी, बल्कि वह संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक पर केंद्र सरकार को केवल बाहरी व मुद्दा-आधारित समर्थन दे सकती है।

सुप्रिया सुले ने अटकलों को बताया ‘चाय की प्याली में तूफान’

पार्टी प्रमुख शरद पवार, जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद कार्यकारी अध्यक्ष व सांसद सुप्रिया सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में NDA में शामिल होने की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने इन खबरों को ‘चाय की प्याली में तूफान’ करार देते हुए कहा कि पार्टी ने गठबंधन बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया है। हालांकि, परिसीमन और महिला आरक्षण पर उन्होंने नरम संकेत दिए हैं। सुले ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार संसद की सीटों को 50 प्रतिशत बढ़ाने की शर्त को लिखित में शामिल करती है, तो पार्टी सकारात्मक रूप से चर्चा और समर्थन के लिए तैयार है।

INDIA गठबंधन के सहयोगियों से चर्चा के बाद अंतिम फैसला

NCP (SP) ने स्पष्ट किया है कि भले ही वह जनहित और महिला सशक्तिकरण के राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार के साथ खड़ी दिख सकती है, लेकिन कोई भी अंतिम फैसला विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के सहयोगियों के साथ व्यापक चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। सुप्रिया सुले ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी हिस्सा लिया था, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। उन्होंने सरकार के सामने यह मांग भी रखी कि परिसीमन का ऐसा फॉर्मूला तैयार किया जाए जिससे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ कोई अन्याय न हो।

BJP ने NDA में किसी नए दल के प्रवेश को नकारा

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आधिकारिक आवास ‘वर्षा’ पर हाल ही में एनसीपी के दोनों गुटों (अजीत पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल व सुनील तटकरे और शरद पवार गुट के जयंत पाटिल) की बैक-टू-बैक बैठकों के बाद इन अफवाहों को हवा मिली थी। हालांकि, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि महाराष्ट्र में एनडीए के कुनबे में अब किसी भी नए दल या विधायक-सांसद को शामिल करने के लिए जगह नहीं बची है।

ऐतिहासिक फैसलों की विरासत बना रणनीतिक कदम

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार का यह कदम उनकी पुरानी राजनीतिक विरासत के अनुकूल है। जब पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए ऐतिहासिक नीतिगत फैसले लेते हुए 33% आरक्षण लागू किया था (जो बाद में 50% हुआ) और रक्षा मंत्री रहते हुए सेना में महिलाओं को 11% आरक्षण दिया था। यही वजह है कि पार्टी महिला आरक्षण से जुड़े इस बड़े राष्ट्रीय मुद्दे पर विपक्ष की लीक से हटकर मोदी सरकार के प्रस्तावों का समर्थन करने पर विचार कर रही है।

आगामी चुनावों पर संभावित प्रभाव

शरद पवार द्वारा महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर ‘मुद्दा-आधारित’ समर्थन देने के फैसले का आगामी महाराष्ट्र स्थानीय निकाय और भावी चुनावों पर गहरा राजनीतिक प्रभाव पड़ेगा। यद्यपि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और महायुति (भाजपा, शिंदे गुट, अजीत पवार गुट) की सरकार कार्यरत है, फिर भी राज्य में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय, नगर निगम और विधान परिषद चुनावों पर इस फैसले के दूरगामी रणनीतिक प्रभाव देखे जा रहे हैं।

महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में आंतरिक अविश्वास

सहयोगियों में संशय: शरद पवार द्वारा विपक्षी ‘इंडिया’ या महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन की लीक से हटकर मोदी सरकार के विधेयकों का समर्थन करने से कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में संशय की स्थिति पैदा हो सकती है।
सीट शेयरिंग में खींचतान: इस रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) के बाद आगामी स्थानीय निकाय और विधान परिषद चुनावों में सीट बंटवारे के दौरान शरद पवार की पार्टी अघाड़ी के भीतर अधिक मजबूत सौदेबाजी (Bargaining) की स्थिति में आ जाएगी।

महिला मतदाताओं के बीच ‘पवार ब्रांड’ की री-ब्रांडिंग

महायुति सरकार ने ‘लाडकी बहिन‘ जैसी योजनाओं के दम पर महिला मतदाताओं के बीच बड़ी पैठ बनाई थी। शरद पवार का राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन देना, राज्य की महिला वोटर्स को यह संदेश देगा कि महिलाओं के अधिकारों के मामले में पवार राजनीति से ऊपर उठकर सोचते हैं।

ऐतिहासिक विरासत की याद

एनसीपी (एसपी) इस कदम के जरिए जनता को यह याद दिलाने में सफल होगी कि शरद पवार ने ही सर्वप्रथम महाराष्ट्र में महिलाओं को नीतिगत आरक्षण दिया था, जिससे महायुति के महिला-केंद्रित नैरेटिव को कमजोर किया जा सके।

‘पवार बनाम पवार’-अजीत पवार गुट पर दबाव

अजीत पवार के महायुति सरकार में शामिल होने का मुख्य तर्क ‘राज्य के विकास के लिए केंद्र का समर्थन करना’ था। अब शरद पवार द्वारा एनडीए में शामिल हुए बिना ही दिल्ली में ‘मुद्दा-आधारित समर्थन’ देने से अजीत पवार का यह तर्क कमजोर पड़ेगा।

पार्टी विलय या पुनर्गठन की सुगबुगाहट

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि इस प्रकार के वैचारिक लचीलेपन से दोनों एनसीपी गुटों के कार्यकर्ताओं और कुछ विधायकों के बीच भविष्य में विलय या आपसी सामंजस्य का रास्ता खुल सकता है, जिससे शरद पवार की पार्टी फिर से राज्य में मुख्य ताकत बनकर उभरे।

परिसीमन (Delimitation) पर क्षेत्रीय अस्मिता का कार्ड

सुप्रिया सुले द्वारा परिसीमन विधेयक पर दक्षिण भारतीय राज्यों और महाराष्ट्र जैसी प्रगतिशील जनसंख्या नियंत्रण वाले राज्यों के हितों की पैरवी करना एक बड़ा क्षेत्रीय मुद्दा बनेगा। इसके जरिए शरद पवार की पार्टी स्थानीय चुनावों में खुद को ‘महाराष्ट्र के हकों की रक्षा करने वाली’ एकमात्र राष्ट्रीय सोच वाली पार्टी के रूप में पेश कर सकेगी।

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