राम रहीम फिर जेल से बाहर: 16वीं बार मिली पैरोल, इस साल का कोटा हुआ खत्म

The CSR Journal Magazine

गुरमीत राम रहीम को 16वीं बार मिली पैरोल, जानें जेल मैन्युअल की बातें

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 26 मई 2026 को रोहतक की सुनारिया जेल से 30 दिनों की नियमित पैरोल पर रिहा कर दिया गया है, जो 2017 में उसकी सजा के बाद से 16वीं बार अस्थाई रिहाई है। इससे पहले इसी साल जनवरी 2026 में भी उसे 40 दिनों की पैरोल मिली थी। बार-बार मिलने वाली इस राहत को लेकर कानून, राजनीति और जेल प्रशासन के नियमों (जेल मैनुअल) पर लगातार सवाल उठते रहते हैं।

खास मौके पर दी जाती है पैरोल

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 16वीं बार पैरोल पर जेल से बाहर आ गया है। वह यौन शोषण के मामले में सजा काट रहे हैं और अब तक कुल 454 दिन पैरोल या फरलो पर बाहर रह चुके हैं। अक्सर उनकी रिहाई का समय चुनावी गतिविधियों या डेरा के बड़े आयोजनों से मेल खाता है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह एक संयोग है। आज पंजाब में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव हैं और इसी के चलते गुरमीत राम रहीम को पैरोल दी गई है।

पैरोल का लंबा सफर

गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद हैं। उस दिन सीबीआई कोर्ट ने उन्हें दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा सुनाई थी। उन्होंने अपनी सजा की अवधि में अब तक 454 दिन पैरोल पर बिताए हैं। यह एक चिंतनीय पहलू है, क्योंकि उनकी पैरोल की समय सीमा अक्सर चुनावों से पहले तय होती है। गुरमीत राम रहीम का जेल से बाहर आना उनके डेरा सच्चा सौदा में होने वाले कार्यक्रमों से भी जुड़ा रहा है।

जब-कब मिली पैरोल?

गुरमीत राम रहीम की यह 16वीं बार है जब उन्हें पैरोल मिली है। इससे पहले इस वर्ष जनवरी में वह 40 दिन के लिए बाहर आए थे। अक्तूबर 2020 में अपनी माँ से मिलने के लिए उन्हें सूर्योदय से सूर्यास्त तक रिहा किया गया था। हरियाणा में चुनावों से पहले, जैसे कि आदमपुर विधानसभा उपचुनाव, उन्हें कई बार लंबे समय की पैरोल दी गई है। पहले भी उन्होंने 30 से 40 दिन की पैरोल पाई है। यह समय चुनाव के साथ मेल खाता है जो आशंकाएं बढ़ाता है।

जेल मैन्युअल के अनुसार पैरोल के नियम

गुरमीत राम रहीम के बार-बार रिहा होने के पीछे जेल मैन्युअल का हवाला दिया जाता है। जेल में बंद कैदियों को पैरोल और फरलो के तहत रियायतें दी जाती हैं। पैरोल तब दी जाती है जब सजा का एक साल पूरा हो चुका हो। यह पैरोल कई कारणों पर निर्भर करती है, जैसे बीमारी, पारिवारिक विवाह, या व्यक्तिगत जिम्मेदारियाँ। अधिकतम, एक वर्ष में किसी कैदी को तीन बार, कुल 91 दिन की पैरोल मिल सकती है।

पैरोल और फरलो के नियम

जेल नियमों के अनुसार, एक कैदी एक कैलेंडर वर्ष में कुल 10 हफ्ते (70 दिन) की पैरोल और 3 हफ्ते (21 दिन) की फरलो का हकदार होता है। जनवरी 2026 में 40 दिन और अब मई 2026 में 30 दिन की पैरोल मिलने के बाद राम रहीम ने इस साल का अपना 70 दिनों का पूरा पैरोल कोटा खत्म कर लिया है। अब उसके पास केवल 21 दिन की फरलो बची है। पैरोल के दौरान कैदी जितने दिन जेल से बाहर रहता है, वह दिन उसकी मूल सजा में नहीं गिने जाते, यानी उसे उतने दिन जेल में अतिरिक्त काटने पड़ते हैं। इसके विपरीत, फरलो में बाहर बिताया गया समय सजा का हिस्सा माना जाता है। पैरोल की मंजूरी के लिए कैदी को जेल प्रशासन के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट (DM) को आवेदन देना होता है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद ही कमिश्नर या राज्य सरकार इसे मंजूरी देती है।

फरलो और उसकी विशेषताएँ

फरलो का उद्देश्य कैदियों के मानसिक संतुलन को बनाए रखना है और समाज से उनके संबंधों को जोड़ना है। फरलो की अनुमति तब मिलती है जब कैदी की सजा का तीन साल पूरा हो चुका हो। फरलो में कोई विशेष कारण बताने की आवश्यकता नहीं होती। जेल प्रबंधन को पांच दिनों के भीतर आवेदन पर निर्णय लेना होता है।

कौन कैदियों को मिलती है पैरोल?

जेल में कैदियों द्वारा आवेदन करने के बाद, जेल प्रबंधन यह सुनिश्चित करता है कि पैरोल से शांति भंग नहीं होगी। इसके बाद उपायुक्त इस पर निर्णय लेते हैं। यदि कोई कैदी अच्छे आचरण का प्रदर्शन करता है, तो उसे पैरोल दी जा सकती है। ऐसे में गुरमीत राम रहीम की बार-बार पैरोल से यह स्पष्ट होता है कि नियमों का पालन किया गया है, लेकिन चुनावों के समय उनकी रिहाई चर्चा का विषय बनी हुई है।

पैरोल के दौरान कड़े प्रतिबंध

इस 30 दिनों की अवधि के दौरान राम रहीम हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में ही रहेगा। वह डेरा परिसर से बाहर किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम, राजनीतिक गतिविधि या बड़ी सभा में भाग नहीं ले सकता। प्रशासन और स्थानीय पुलिस की टीमें पैरोल की अवधि के दौरान उसकी गतिविधियों और सुरक्षा पर 24 घंटे कड़ी नजर रखेंगी।

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