महाराष्ट्र के पालघर जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने एक युवा की जान ले ली। जव्हार तालुका के तिलोंडा (आंबेपाड़ा) गांव में सड़क और एम्बुलेंस की सुविधा न होने के कारण 18 वर्षीय शैलेश मगन वागदड़ा की समय पर इलाज न मिल पाने से दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना मंगलवार, 4 फरवरी की तड़के की बताई जा रही है। परिजनों के मुताबिक शैलेश की तबीयत अचानक गंभीर रूप से बिगड़ गई थी। गांव में न तो स्वास्थ्य केंद्र है और न ही एम्बुलेंस पहुंचने लायक सड़क। मजबूरी में परिवार और ग्रामीणों ने शैलेश को डोली में बांधकर पहाड़ी और पथरीले रास्तों से अस्पताल तक ले जाने की कोशिश की। लेकिन दुर्गम रास्ते, लंबी दूरी और इलाज में हुई देरी ने उसकी जान ले ली।
सड़क न होने की सजा भुगत रहा आदिवासी इलाका
तिलोंडा (आंबेपाड़ा) गांव एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां आज भी सड़क, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। ऐसे हालात में किसी भी गंभीर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना एक बड़ा संघर्ष बन जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार प्रशासन से सड़क और एम्बुलेंस की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शैलेश की मौत ने एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है।
पहले भी जा चुकी हैं जानें
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इलाज के अभाव और खराब सड़कों की वजह से कई मरीजों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, जमीन पर काम नजर नहीं आया।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर सड़क और एम्बुलेंस की सुविधा होती, तो शैलेश की जान बचाई जा सकती थी। अब गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जल्द से जल्द गांव तक पक्की सड़क बनाई जाए और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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