साफा-शॉल नहीं, सेवा ही सम्मान राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. सतीश पूनिया की अनोखी अपील चर्चा में

The CSR Journal Magazine
राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद डॉ. सतीश पूनिया ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से एक अनोखी अपील की है। उन्होंने स्वागत कार्यक्रमों में साफा, शॉल, फूल-मालाओं और महंगे उपहारों पर होने वाले खर्च से बचने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि उनका सम्मान करना है तो उस धन को गौशालाओं, दिव्यांगों, अनाथ बच्चों और जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता में लगाया जाए। उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

स्वागत की परंपरा बदलने का आह्वान

राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा उम्मीदवार डॉ. सतीश पूनिया ने नामांकन के बाद जारी वीडियो संदेश में कहा कि वे भविष्य में आयोजित कार्यक्रमों में साफा, शॉल, महंगी मालाओं, गुलदस्तों और उपहारों को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अनावश्यक खर्च से बचें और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दें। पूनिया ने कहा कि यदि कोई उनका सम्मान करना चाहता है तो प्रतीकात्मक रूप से एक फूल पर्याप्त है। उनका मानना है कि सम्मान की भावना उपहारों की कीमत से नहीं बल्कि व्यक्ति के भाव से मापी जाती है।

किताबों को बताया सबसे मूल्यवान उपहार

डॉ. पूनिया ने कार्यकर्ताओं के सामने एक सकारात्मक विकल्प भी रखा। उन्होंने कहा कि यदि कोई उन्हें कुछ भेंट करना चाहता है तो महंगे शो-पीस या उपहारों के बजाय अच्छी और ज्ञानवर्धक पुस्तकें भेंट करे। उनका कहना है कि पुस्तकें समाज में सकारात्मक विचारों का प्रसार करती हैं और ज्ञान के आदान-प्रदान का माध्यम बनती हैं। उनके अनुसार किसी भी पुस्तक का मूल्य किसी महंगे उपहार से कहीं अधिक होता है क्योंकि वह व्यक्ति और समाज दोनों को दिशा देने का कार्य करती है।

गौशालाओं को सहयोग देने की अपील

अपने संदेश में डॉ. पूनिया ने गोसेवा को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग उनके स्वागत में बड़ी राशि खर्च करना चाहते हैं, वे अपने क्षेत्र की किसी पंजीकृत गौशाला को आर्थिक सहयोग प्रदान करें। उन्होंने सुझाव दिया कि सहयोग की रसीद उन्हें भेंट की जाए। उनके अनुसार गौवंश की सेवा और संरक्षण समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है तथा इस दिशा में किया गया योगदान उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।

दिव्यांगों, अनाथ बच्चों और विद्यार्थियों की मदद पर जोर

डॉ. पूनिया ने अपनी अपील को केवल गोसेवा तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने समर्थकों से दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता, अनाथ आश्रमों के बच्चों के सहयोग और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा में योगदान देने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई कार्यकर्ता किसी जरूरतमंद छात्र को पढ़ाई जारी रखने में मदद करता है, किसी दिव्यांग के जीवन को आसान बनाने का प्रयास करता है या किसी अनाथ बच्चे के पालन-पोषण में सहयोग देता है, तो वही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा। उनके इस संदेश को राजनीति में सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

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