अब चेहरे की सुंदरता के लिए इंजेक्शन नहीं! सरकार ने कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट पर कसी लगाम

The CSR Journal Magazine
चेहरे की चमक और इंस्टेंट ब्यूटी के नाम पर बढ़ते इंजेक्टेबल कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट पर केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद का उपयोग अब इंजेक्शन के रूप में नहीं किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि कॉस्मेटिक उत्पाद केवल बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं और इन्हें इंजेक्ट करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

कॉस्मेटिक उत्पादों के इंजेक्शन पर पूरी तरह रोक

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने नए निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 और कॉस्मेटिक्स नियम 2020 के तहत किसी भी कॉस्मेटिक उत्पाद का इस्तेमाल इंजेक्शन के रूप में नहीं किया जा सकता। सरकार ने साफ किया कि कॉस्मेटिक उत्पाद केवल त्वचा की सफाई, देखभाल और बाहरी सुंदरता बढ़ाने के लिए बनाए जाते हैं। इनका उद्देश्य किसी बीमारी का इलाज या मेडिकल थेरेपी देना नहीं है। ऐसे में इन्हें शरीर के अंदर इंजेक्ट करना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। यह आदेश ब्यूटी क्लिनिक, एस्थेटिक सेंटर, डॉक्टरों और उपभोक्ताओं सभी पर लागू होगा।

सोशल मीडिया ट्रेंड और इंस्टेंट ब्यूटी बना चिंता का कारण

पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्लोइंग स्किन, एंटी-एजिंग और फेस शेप सुधारने वाले इंजेक्टेबल ट्रीटमेंट का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। कई ब्यूटी क्लिनिक और अप्रशिक्षित लोग बिना पर्याप्त मेडिकल जानकारी के ऐसे इंजेक्शन आधारित उपचार देने लगे थे। विशेषज्ञों के अनुसार गलत तरीके से लगाए गए इंजेक्शन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इनमें एलर्जी, त्वचा संक्रमण, सूजन, चेहरे की नसों को नुकसान और शरीर के अन्य अंगों पर असर जैसी समस्याएं शामिल हैं। कुछ मामलों में स्थायी नुकसान और जान का खतरा भी हो सकता है।

भ्रामक विज्ञापनों और गलत दावों पर भी सख्ती

सीडीएससीओ ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि किसी कॉस्मेटिक उत्पाद के विज्ञापन या पैकेजिंग पर भ्रामक दावे करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा। कंपनियां अपने उत्पादों को चमत्कारी इलाज या मेडिकल थेरेपी बताकर प्रचार नहीं कर सकेंगी। इसके अलावा निर्माता कंपनियों को उत्पाद के तय उपयोग निर्देशों में बदलाव करने की अनुमति भी नहीं होगी। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स पहले ही असुरक्षित और प्रतिबंधित कॉस्मेटिक सामग्रियों की सूची जारी कर चुका है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को गलत जानकारी देकर जोखिम भरे उपचार के लिए प्रेरित करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

तेजी से बढ़ते बाजार के बीच सुरक्षा पर सरकार का फोकस

भारत में इंजेक्टेबल ब्यूटी और स्किन केयर ट्रीटमेंट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिसर्च फर्म के अनुसार देश में फेशियल इंजेक्टेबल्स का मौजूदा बाजार करीब 97.6 मिलियन डॉलर का है। अनुमान लगाया जा रहा है कि 2030 तक यह बाजार 9.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ लगभग 194.30 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार का मानना है कि तेजी से बढ़ते इस कारोबार के बीच लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसी वजह से इंजेक्टेबल कॉस्मेटिक उत्पादों पर सख्त नियम लागू किए गए हैं, ताकि सुंदर दिखने की चाहत लोगों की सेहत पर भारी न पड़े।

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