श्री चैतन्य गौड़ीय मठ से निकली भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा; भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और महाआरती के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ की भक्ति और श्रद्धा के रंग में रंगी दिखाई दी। शहर की सबसे पुरानी मानी जाने वाली श्री जगन्नाथ रथयात्रा सायन स्थित श्री चैतन्य गौड़ीय मठ से पूरे धार्मिक उल्लास के साथ निकाली गई। लगभग 25 वर्षों से आयोजित हो रही इस रथयात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र तथा बहन देवी सुभद्रा के दर्शन किए और रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य माना।
जय जगन्नाथ के जयकारे से गूंजा सायन
यह रथयात्रा वर्ष 2001 से लगातार आयोजित की जा रही है और इसे मुंबई की सबसे पुरानी जगन्नाथ रथयात्रा माना जाता है। शाम लगभग चार बजे जैसे ही सुसज्जित रथ श्री चैतन्य गौड़ीय मठ परिसर से निकला, “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण-हरे राम” के जयघोष से पूरा सायन क्षेत्र गूंज उठा। फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और पारंपरिक अलंकरण से सजे रथ पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाएं विराजमान थीं। श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ संकीर्तन करते हुए रथ के साथ आगे बढ़ते रहे।
महाआरती और प्रसाद वितरण का भव्य आयोजन
रथयात्रा का निर्धारित मार्ग फ्लैंक रोड, रावली कैंप गुरुद्वारा, पहाड़ी मंदिर और हरि मंदिर से होकर पुनः श्री चैतन्य गौड़ीय मठ पहुंचा, जहां भव्य महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया तथा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और प्रसाद की व्यवस्था भी की गई। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव का भी स्वरूप लिए हुए था। यात्रा के दौरान वैष्णव संकीर्तन मंडलियों ने मृदंग, करताल और झांझ की मधुर धुनों पर भजन प्रस्तुत किए। कई सांस्कृतिक दलों ने ओडिशा और गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़े नृत्य एवं भक्ति कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए, जिससे श्रद्धालुओं का उत्साह और बढ़ गया।
भगवान स्वयं भक्तों के बीच आते हैं
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रथयात्रा वह अवसर है जब भगवान जगन्नाथ अपने मंदिर से बाहर निकलकर स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं। यही कारण है कि रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख मिलता है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ-दर्शन और रथयात्रा में भाग लेने से आध्यात्मिक कल्याण की प्राप्ति होती है। पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा की परंपरा का अनुसरण करते हुए देश और विदेश के अनेक शहरों में भी यह उत्सव मनाया जाता है। मुंबई की सायन रथयात्रा इसी परंपरा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुकी है और हर वर्ष इसमें श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है।
25 वर्षों की परंपरा बनी शहर की पहचान
आयोजकों के अनुसार यह रथयात्रा वर्ष 2001 में प्रारंभ हुई थी और पिछले 25 वर्षों से निरंतर आयोजित की जा रही है। इस कारण इसे मुंबई की सबसे पुरानी जगन्नाथ रथयात्रा कहा जाता है। आज यह आयोजन केवल ओडिशा या बंगाल के श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर भारत और दक्षिण भारत सहित विभिन्न राज्यों के लोग भी इसमें बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि महानगरों में ऐसे आयोजन भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच ऐसे धार्मिक उत्सव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को भी मजबूत करते हैं।
प्रशासन ने की विशेष तैयारी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मुंबई पुलिस और यातायात विभाग ने विशेष प्रबंध किए। यात्रा मार्ग पर आवश्यकतानुसार यातायात डायवर्जन लागू किए गए तथा लोगों से वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई ताकि यात्रा शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
रथयात्रा का आध्यात्मिक संदेश
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समानता, सेवा और मानवता का संदेश भी देती है। भगवान मंदिर से बाहर निकलकर समाज के प्रत्येक वर्ग को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि इस उत्सव को सामाजिक समरसता का प्रतीक भी माना जाता है। पुरी की परंपरा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा विशाल रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। इस यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु रथ खींचते हैं और इसे मोक्षदायी माना जाता है। इसी आध्यात्मिक भावना को देश के अन्य शहरों की रथयात्राओं में भी अपनाया जाता है।
श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह
रथयात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। अनेक परिवार छोटे बच्चों के साथ यात्रा में पहुंचे ताकि वे भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से परिचित हो सकें। कई श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की।
मुंबई में बढ़ रही धार्मिक पर्यटन की पहचान
मुंबई महानगर केवल आर्थिक गतिविधियों का केंद्र ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का भी प्रमुख शहर बनता जा रहा है। गणेशोत्सव, दही हांडी, नवरात्रि और ईद जैसे आयोजनों की तरह अब जगन्नाथ रथयात्रा भी शहर की पहचान बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन सामाजिक सौहार्द, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आध्यात्मिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सायन बना भक्ति और आस्था का केंद्र
मुंबई की सायन स्थित श्री चैतन्य गौड़ीय मठ से निकली 25वीं वर्षगांठ की यह ऐतिहासिक जगन्नाथ रथयात्रा एक बार फिर यह साबित करती है कि महानगर की तेज रफ्तार जिंदगी के बीच भी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं की जड़ें बेहद मजबूत हैं। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की यह दिव्य यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और मानव कल्याण का भी जीवंत संदेश देती है।
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