महाराष्ट्र सदन में MHADA का दिखा दमखम, 75 विधायी मामलों का निपटारा, 64 सवालों का दिया जवाब, रखे गए 2 बड़े कानून

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में इस बार यदि किसी सरकारी एजेंसी ने अपने विधायी कामकाज, जवाबदेही और नीतिगत फैसलों से सबसे अधिक ध्यान खींचा, तो वह थी महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA)। एक ओर सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों ने आवास, पुनर्विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े अनेक मुद्दे उठाए, वहीं दूसरी ओर MHADA ने हर सवाल का तथ्यात्मक जवाब देने के साथ-साथ ऐसे महत्वपूर्ण विधायी कदम भी उठाए, जिनका असर आने वाले वर्षों में मुंबई और महाराष्ट्र के लाखों लोगों की जिंदगी पर दिखाई देगा। पूरे मानसून सत्र के दौरान MHADA से जुड़े 75 विधायी मामलों (Legislative Matters) पर कार्रवाई की गई। विधानसभा और विधान परिषद में विधायकों द्वारा पूछे गए 64 प्रश्नों के विस्तृत उत्तर तैयार कर प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा MHADA से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक दोनों सदनों से पारित हुए, जबकि आवास, पुनर्विकास और शहरी विकास से जुड़े छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।

अब तेज होगा महाराष्ट्र का शहरी पुनर्विकास – संजीव जायसवाल

मानसून सत्र की समाप्ति के बाद MHADA के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जायसवाल ने कहा कि हर सत्र हमें यह सिखाता है कि अच्छा प्रशासन मजबूत तैयारी, टीमवर्क और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर आधारित होता है। सार्वजनिक पद की जिम्मेदारी केवल किसी प्रश्न का उत्तर देना नहीं है, बल्कि पूरी ईमानदारी, मेहनत और स्पष्ट उद्देश्य के साथ जनता के प्रति जवाबदेही निभाना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है और उस विश्वास को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है—समय पर, सटीक और पारदर्शी जवाब।

64 सवाल, लेकिन हर सवाल के पीछे हजारों लोगों की उम्मीदें

विधानसभा और विधान परिषद में इस बार MHADA से जुड़े प्रश्न केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं थे। सदन में पुराने भवनों के पुनर्विकास, पुलिस आवास, जर्जर इमारतों की सुरक्षा, पुनर्विकास परियोजनाओं में देरी, किरायेदारों के अधिकार, क्लस्टर डेवलपमेंट, लॉटरी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे गए। इन सभी सवालों के जवाब तैयार करने के लिए MHADA के विभिन्न विभागों ने कई सप्ताह तक तथ्य जुटाए। प्रत्येक उत्तर तैयार करने से पहले संबंधित परियोजनाओं की प्रगति, कानूनी स्थिति, वित्तीय पहलुओं और प्रशासनिक प्रक्रिया की समीक्षा की गई। यही कारण रहा कि मानसून सत्र में MHADA के जवाब केवल औपचारिक नहीं थे, बल्कि उनमें परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, भविष्य की कार्ययोजना और सरकार की नीति भी स्पष्ट दिखाई दी।

केवल जवाब नहीं, कानून बनाने में भी निभाई अहम भूमिका

इस मानसून सत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल प्रश्नों के उत्तर देना नहीं रही। MHADA से जुड़े दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को विधानसभा और विधान परिषद दोनों ने मंजूरी दी। इनमें सबसे अहम ‘महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास (संशोधन) विधेयक-2026’ रहा, जिसने दक्षिण मुंबई की हजारों जर्जर सेस इमारतों के पुनर्विकास का रास्ता साफ कर दिया। इसके अलावा आवास विकास और पुनर्विकास प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने वाले अन्य विधायी संशोधनों को भी मंजूरी मिली। इससे आने वाले समय में परियोजनाओं की स्वीकृति, पुनर्विकास की प्रक्रिया और नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर हुई व्यापक चर्चा

मानसून सत्र के दौरान MHADA से जुड़े छह महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी सदन में आए। इन प्रस्तावों में प्रमुख रूप से दक्षिण मुंबई की जर्जर सेस इमारतों का पुनर्विकास, चारकोप और गोराई MHADA कॉलोनियों का समूह पुनर्विकास, जोगेश्वरी स्थित PMGP परियोजना, मुंबई पुलिस हाउसिंग टाउनशिप, पुनर्विकास परियोजनाओं में किरायेदारों की सुरक्षा, नागरिक सुविधाओं के विकास से जुड़े मुद्दे शामिल रहे। इन सभी प्रस्तावों पर MHADA ने विस्तृत तथ्य रखे और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति से सदन को अवगत कराया। यही वजह रही कि मानसून सत्र में MHADA ने 64 प्रश्नों के जवाब समय पर प्रस्तुत किए और 75 विधायी मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया।

20 लाख मुंबईकरों के लिए ऐतिहासिक फैसला, MHADA को मिला सक्षम प्राधिकरण का दर्जा

महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में पारित ‘महाराष्ट्र गृहनिर्माण एवं क्षेत्र विकास (संशोधन) विधेयक-2026’ को इस सत्र का सबसे बड़ा और दूरगामी फैसला माना जा रहा है। वर्षों से कानूनी उलझनों, प्रशासनिक अड़चनों और न्यायालय में लंबित मामलों के कारण रुका पड़ा दक्षिण मुंबई की पुरानी सेस (Cessed) इमारतों का पुनर्विकास अब तेजी से आगे बढ़ सकेगा।
इस संशोधन के बाद MHADA को सक्षम प्राधिकरण (Competent Authority) का अधिकार मिल गया है। यानी अब पुनर्विकास से जुड़े कई ऐसे फैसले, जो पहले कानूनी अस्पष्टता के कारण अटक जाते थे, उन्हें स्पष्ट कानूनी आधार मिल गया है। इसका सीधा लाभ करीब 13,800 पुरानी और खतरनाक इमारतों में रहने वाले लगभग 20 लाख नागरिकों को मिलेगा।

मुंबई की सबसे बड़ी हाउसिंग समस्या थी जर्जर सेस इमारतें

दक्षिण मुंबई की बड़ी आबादी आज भी उन इमारतों में रहती है जिनका निर्माण कई दशक पहले हुआ था। इनमें से अधिकांश इमारतें ‘सेस बिल्डिंग’ या ‘पगड़ी सिस्टम’ के अंतर्गत आती हैं। समय के साथ इन इमारतों की संरचना कमजोर होती गई, लेकिन कानूनी विवादों और स्वामित्व संबंधी समस्याओं के कारण उनका पुनर्विकास आगे नहीं बढ़ पाया। बारिश शुरू होते ही इन इमारतों में रहने वाले हजारों परिवारों के मन में एक ही डर रहता था कि कहीं इमारत गिर न जाए। सरकार के सामने चुनौती केवल नए मकान बनाना नहीं थी, बल्कि उन लाखों लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी था, जो हर दिन जान जोखिम में डालकर इन इमारतों में रहने को मजबूर थे।

हाईकोर्ट में कानूनी विवाद बना सबसे बड़ा रोड़ा

वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने MHADA अधिनियम में धारा 79(ए) और 79(बी) जोड़ी थी। इन प्रावधानों का उद्देश्य था कि यदि कोई भवन मालिक जर्जर इमारत का पुनर्विकास नहीं करता, तो MHADA हस्तक्षेप कर सके और जरूरत पड़ने पर किरायेदारों को भी 51 प्रतिशत सहमति के आधार पर पुनर्विकास का अधिकार मिल सके। लेकिन बाद में इन प्रावधानों की वैधानिकता को लेकर मामला अदालत पहुंच गया। विशेष रूप से यह सवाल उठाया गया कि क्या MHADA को ऐसे मामलों में सक्षम प्राधिकरण माना जा सकता है। इसी कानूनी अस्पष्टता के कारण हजारों इमारतों का पुनर्विकास वर्षों तक ठप रहा। अब विधानसभा और विधान परिषद से संशोधन विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने इस कानूनी अस्पष्टता को दूर कर दिया है। इससे अदालत में सरकार की स्थिति भी मजबूत होगी और पुनर्विकास परियोजनाओं को नई गति मिलेगी।

हादसों ने दिखाई थी कानून बदलने की जरूरत

मुंबई में पिछले कई वर्षों से जर्जर इमारतों के गिरने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2021 से अगस्त 2025 के बीच मुंबई में 345 इमारतें पूरी या आंशिक रूप से ढह गईं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई। इससे पहले भी शहर कई दर्दनाक हादसे देख चुका है, 2012 में डोंगरी इमारत हादसे में 14 लोगों की मौत हुई। 2017 में भिंडी बाजार स्थित हुसैनी बिल्डिंग गिरने से 33 लोगों की जान चली गई। 2020 में फोर्ट इलाके में इमारत गिरने से 10 लोगों की मौत हुई। इन हादसों ने सरकार पर लगातार दबाव बनाया कि पुनर्विकास की प्रक्रिया को तेज करने के लिए कानून में बदलाव किया जाए।

MHADA के लिए क्यों अहम रहा यह मानसून सत्र?

इस विधेयक के पारित होने के साथ ही MHADA ने मानसून सत्र में यह संदेश देने की कोशिश की कि संस्था अब केवल आवासीय लॉटरी निकालने तक सीमित नहीं है। वह राज्य की सबसे बड़ी पुनर्विकास एजेंसी के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है। 75 विधायी मामलों का निपटारा, 64 प्रश्नों के जवाब, दो महत्वपूर्ण कानूनों को मंजूरी और छह बड़े प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में महाराष्ट्र की आवास नीति के केंद्र में MHADA की भूमिका और मजबूत होने वाली है।

विधानसभा में गूंजे MHADA के बड़े प्रोजेक्ट

जोगेश्वरी PMGP से लेकर चारकोप-गोराई क्लस्टर तक, हर सवाल पर रखा सरकार ने पक्ष। मानसून सत्र के दौरान सदन में केवल कानून पारित नहीं हुए, बल्कि मुंबई और महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में चल रही MHADA की परियोजनाओं को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सवाल उठे। विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को सदन में रखा, जिन पर MHADA ने विस्तृत जानकारी और आगे की कार्ययोजना प्रस्तुत की। इन चर्चाओं से स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार आने वाले वर्षों में पुनर्विकास परियोजनाओं को तेज गति से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

जोगेश्वरी की PMGP कॉलोनी: 17 जर्जर इमारतों के पुनर्विकास की प्रक्रिया तेज

अंतिम सप्ताह प्रस्ताव के दौरान विधायक बाला नर ने जोगेश्वरी (पूर्व) स्थित PMGP (Prime Minister Grant Project) कॉलोनी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कॉलोनी की 17 इमारतें बेहद जर्जर स्थिति में हैं और वहां रहने वाले परिवार लंबे समय से पुनर्विकास का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने विस्थापित परिवारों को दिए जा रहे किराए में बढ़ोतरी और ट्रांजिट कैंप (PTC) की व्यवस्था जल्द करने की मांग की। इस पर MHADA ने सदन को बताया कि PMGP कॉलोनी की 17 इमारतों में कुल 984 आवास हैं, जिनका निर्माण वर्ष 1990 से 1992 के बीच प्रधानमंत्री अनुदान योजना के तहत हुआ था। शुरुआत में पुनर्विकास का जिम्मा निजी डेवलपर को दिया गया था, लेकिन परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद वर्ष 2020 में राज्य सरकार ने परियोजना को सीधे MHADA के माध्यम से पूरा करने का निर्णय लिया।

313 परिवारों ने खाली किए मकान, किराया और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था

सदन में दी गई जानकारी के अनुसार अब तक 313 परिवार अपने फ्लैट खाली कर चुके हैं। प्रभावित परिवारों को प्रति माह 20 हजार रुपये किराया दिया जा रहा है। यह राशि दो चरणों में उपलब्ध कराई जा रही है ताकि लोगों को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा जिन परिवारों को तत्काल वैकल्पिक आवास की जरूरत है, उनके लिए चांदीवली, मालाड, भांडुप और मानखुर्द में ट्रांजिट आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। MHADA ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में किराए की राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है क्योंकि परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

चारकोप और गोराई का होगा सबसे बड़ा क्लस्टर रीडेवलपमेंट

विधान परिषद में सदस्य संजय उपाध्याय ने बोरीवली स्थित चारकोप और गोराई MHADA कॉलोनियों के समूह पुनर्विकास का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी को देखते हुए इन पुराने आवासीय परिसरों को आधुनिक स्वरूप देने की जरूरत है। MHADA ने सदन को बताया कि चारकोप परियोजना लगभग 200 एकड़ में फैली हुई है, जहां करीब 20 हजार आवास हैं। गोराई परियोजना लगभग 256 एकड़ क्षेत्र में स्थित है और यहां करीब 26 हजार आवास मौजूद हैं। प्राधिकरण ने कहा कि अभी अलग-अलग इमारतों का पुनर्विकास हो रहा है, लेकिन भविष्य में पूरे क्षेत्र का Cluster Redevelopment किया जाएगा। इससे बेहतर सड़कें, पार्किंग, खुली जगह, आधुनिक बुनियादी सुविधाएं और बड़े आकार के फ्लैट उपलब्ध कराए जा सकेंगे। MHADA का अनुमान है कि इस परियोजना के बाद अतिरिक्त आवास भी तैयार होंगे, जिन्हें भविष्य में लॉटरी के माध्यम से आम नागरिकों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। फिलहाल परियोजना की व्यवहार्यता का अध्ययन जारी है और अंतिम प्रस्ताव मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

मुंबई पुलिस को मिलेंगे 45 हजार नए सरकारी आवास

मानसून सत्र में विधायक कालिदास कोलंबकर ने मुंबई पुलिस कर्मियों के आवास का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि हजारों पुलिसकर्मी वर्षों से सरकारी आवास का इंतजार कर रहे हैं और सेवानिवृत्ति के बाद कई कर्मचारियों को भारी किराया देकर निजी मकानों में रहना पड़ता है। इस पर MHADA ने जानकारी दी कि राज्य सरकार पहले ही मुंबई पुलिस हाउसिंग टाउनशिप परियोजना को मंजूरी दे चुकी है। इस परियोजना के तहत मुंबई शहर और उपनगरों में 40 हजार से 45 हजार आधुनिक सरकारी आवास बनाए जाएंगे। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए MSIDC को नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है, जबकि MHADA अपनी पुलिस कॉलोनियों के पुनर्विकास के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रहा है।
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