मुंबई में बनेगा अण्णाभाऊ साठे का विश्वस्तरीय शोध एवं प्रशिक्षण केंद्र, SRA परियोजना का मुख्यमंत्री फडणवीस ने किया भूमिपूजन

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र की सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घाटकोपर के चिरागनगर में लोकशाहीर साहित्यरत्न अण्णाभाऊ साठे संशोधन एवं प्रशिक्षण संस्थान के महत्वाकांक्षी प्रकल्प का भूमिपूजन किया। यह परियोजना स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA), मुंबई द्वारा विकसित की जा रही है। संस्थान का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, शोध, कौशल विकास और प्रशिक्षण के माध्यम से अण्णाभाऊ साठे के विचारों और साहित्य को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है।

SRA सिर्फ पुनर्विकास नहीं, सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी

स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) अब केवल झुग्गी पुनर्विकास तक सीमित नहीं है। मुंबई में पुनर्विकास परियोजनाओं के साथ सामाजिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी SRA महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। चिरागनगर में बनने वाला यह संस्थान इसी सोच का हिस्सा है, जहां शोध, प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ा जाएगा।

SRA की पहल से सामाजिक विकास को मिलेगी नई दिशा – डॉ. महेंद्र कल्याणकर

SRA CEO Dr. Mahendra Kalyankar ने कहा कि यह संस्थान केवल एक इमारत नहीं होगा, बल्कि लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे के विचारों, साहित्य और सामाजिक दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाला ज्ञान केंद्र बनेगा। शोध, प्रशिक्षण, कौशल विकास और आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके कार्यों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। यह परियोजना सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों को नई दिशा देने के साथ समाज के वंचित वर्गों के सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कौन थे लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे?

लोकशाहीर साहित्यरत्न अण्णाभाऊ साठे (1920–1969) महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लोककवि, साहित्यकार और समाज सुधारक थे। उन्होंने श्रमिकों, दलितों, वंचितों और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के संघर्ष को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया। उनका प्रसिद्ध उपन्यास “फकीरा” मराठी साहित्य की कालजयी कृतियों में गिना जाता है। उनके लोकगीत, पोवाड़े और साहित्य आज भी सामाजिक न्याय और समानता की प्रेरणा माने जाते हैं।

शोध, प्रशिक्षण और स्किल डेवलपमेंट पर होगा फोकस

प्रस्तावित संस्थान में अण्णाभाऊ साठे के साहित्य और विचारों पर शोध, डिजिटल अभिलेखागार (Digital Archive), पुस्तकालय, प्रशिक्षण कार्यक्रम, युवाओं के लिए Skill Development पाठ्यक्रम और आधुनिक तकनीक आधारित अध्ययन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को एक समर्पित मंच मिलेगा। राज्य सरकार का मानना है कि यह संस्थान महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
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