मेघालय के ईस्ट जैंतिया हिल्स जिले में गुरुवार सुबह एक अवैध कोयला खदान में जोरदार विस्फोट हुआ। इस दिल दहला देने वाले हादसे में कम से कम 18 मजदूरों की जान चली गई।
अब भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका
अधिकारियों का कहना है कि खदान के भीतर अभी भी कुछ मजदूर फंसे हो सकते हैं। राहत और बचाव टीम मौके पर लगातार काम कर रही है। राज्य के पुलिस महानिदेशक ने बताया कि अभी तक 18 शव बरामद किए गए हैं। खदान में हादसे के वक्त कितने लोग अंदर थे, इसकी पूरी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है।
अवैध तरीके से हो रहा था कोयला खनन
इस हादसे में एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया। पहले उसे सुतंगा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और फिर हालत बिगड़ने पर शिलांग अस्पताल रेफर कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि ये खदान अवैध तरीके से संचालित की जा रही थी और खनन के दौरान ही विस्फोट हुआ। धमाके की असली वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जांच जारी है।
NGT पहले ही लगा चुका है ऐसे खनन पर बैन
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने साल 2014 में मेघालय में रैट-होल और अवैज्ञानिक कोयला खनन पर रोक लगा दी थी। इसका मकसद पर्यावरण की रक्षा करना और मजदूरों की जिंदगी सुरक्षित रखना था।
रैट-होल माइनिंग की खतरनाक तकनीक
रैट-होल खनन में बेहद संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिनकी ऊंचाई केवल 3 से 4 फीट होती है। मजदूर इन सुरंगों में जान जोखिम में डालकर घुसते हैं और कोयला निकालते हैं। एक बार में सिर्फ एक ही मजदूर अंदर जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट भी कर चुका है इस पर सख्ती
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी NGT की रोक को कायम रखते हुए साफ किया था कि केवल वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीकों से ही कोयला खनन की अनुमति दी जाएगी। मेघालय का यह हादसा फिर एक बार इस बात की याद दिला गया कि नियमों को ताक पर रखकर चलने वाली अवैध खदानें कितनी खतरनाक हो सकती हैं। प्रशासन अब इस मामले की गहराई से जांच में जुट गया है।
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