महाराष्ट्र में मराठा आंदोलन तेज: जालना में बिना छांव के अनशन पर बैठे मनोज जरांगे पाटिल

The CSR Journal Magazine

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई बहस, मनोज जरांगे का आमरण अनशन शुरू

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) की मांग को लेकर आंदोलन एक बार फिर उग्र हो गया है और 30 मई 2026 से मनोज जरांगे पाटिल ने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। राज्य सरकार के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ जालना में हुई कई घंटों की बैठक बेनतीजा रहने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है।

नए सिरे से शुरू हुआ संघर्ष

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल ने आज से अनशन शुरू कर दिया है। जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में मनोज जरांगे इस बार बिना किसी टेंट, छांव, छत या पंखे के खुले आसमान के नीचे तपती धूप में अनशन कर रहे हैं। उन्होंने मराठा समुदाय से अपील की है कि वे भीड़ लगाकर अनशन स्थल पर न आएं, बल्कि वे इस बार अकेले ही इस कड़े आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यदि इस भीषण गर्मी में उन्हें कुछ भी होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस की होगी।

OBC कोटे के तहत आरक्षण की मांग

मराठा आंदोलनकारी मांग कर रहे हैं कि मराठा समाज को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी के तहत आरक्षण दिया जाए। सरकार द्वारा कुनबी जाति प्रमाणपत्र (Kunbi Certificate) जारी करने के लिए SOP तो तैयार की गई है, लेकिन प्रमाणपत्रों के वितरण में हो रही देरी को लेकर आंदोलनकारी नाराज हैं। मनोज जरांगे का आरोप है कि सरकार बार-बार मराठा समाज को केवल आश्वासन दे रही है और ठोस कदम नहीं उठा रही है।

सरकारी बातचीत का नतीजा

अंतरवाली सराटी में चल रहे इस अनशन का पहला दिन है। पिछले कुछ समय से सरकार के साथ बातचीत विफल होने के बाद, जरांगे ने यह निर्णय लिया। बताया जा रहा है कि सरकार आज कुछ मांगों को लिखित में स्वीकार कर सकती है। इससे पहले, गुरुवार को मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे पाटिल से मुलाकात की। हालांकि, इस बैठक के बाद भी जरांगे ने अनशन खत्म करने का निर्णय नहीं लिया।

क्या स्वीकार करेगी सरकार?

सूत्रों के मुताबिक मनोज जरांगे पाटिल की कुछ मांगों को आज स्वीकार किया जा सकता है। इसके चलते, सरकार उनकी मांगों का एक ड्राफ्ट तैयार कर सकती है। साथ ही, यह भी चर्चा है कि मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल एक बार फिर जरांगे से मिलने आ सकते हैं ताकि उन्हें अनशन खत्म करने के लिए समझाया जा सके। इस समय, मराठा आरक्षण आंदोलन पर राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

विरोध का कारण

जरांगे ने भूख हड़ताल पर जाने की घोषणा करते हुए कहा है कि अगर गर्मी के चलते उनकी सेहत बिगड़ती है, तो इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ही जिम्मेदार होगी। वे आरक्षण सर्टिफिकेट में गड़बड़ियों को लेकर विरोध कर रहे हैं। जारी किए गए सर्टिफिकेट में कमी होने और लंबित प्रमाण पत्रों को जारी करने में देरी के चलते यह आंदोलन तेज हुआ है।

मंत्री विखे पाटिल की प्रतिक्रिया

आरक्षण को लागू करने में आ रही दिक्कतों पर रोशनी डालते हुए, मंत्री विखे पाटिल ने कहा कि आरक्षण देने के लिए समय-सीमा तय कर दी गई है। हालांकि, कुछ कानूनी शर्तों जैसे सर्टिफिकेट के सत्यापन में समय लग रहा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सरकार काम नहीं कर रही है। राज्य सरकार इस गतिरोध को सुलझाने के लिए लगातार रास्ते तलाशने का दावा कर रही है, लेकिन समाधान न निकलने से महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक स्थिति एक बार फिर संवेदनशील मोड़ पर आ गई है।

राज्य की स्थिति पर नजर

अंतरवाली सराटी में चल रहे इस आंदोलन ने एक बार फिर से मराठा समुदाय के राजनीतिक पुलों को उखाड़ फेंका है। टकराव और सामाजिक मुद्दों के बीच, महाराष्ट्र के लोग इस घंटी की आवाज सुनने को तैयार हैं। अब देखना यह है कि क्या सरकार जरांगे की मांगों को तवज्जो देती है या फिर स्थिति और भी बिगड़ती है।

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