रैगिंग से तंग जूनियर डॉक्टर हर्ष पंड्या ने की खुदकुशी, 4 सीनियर सस्पेंड

The CSR Journal Magazine

रैगिंग से परेशान होकर डॉक्टर ने की खुदकुशी: चार सीनियर डॉक्टर सस्पेंड, गुजरात के सूरत का चौंकाने वाला मामला

गुजरात के सूरत में न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के फर्स्ट ईयर रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या ने रविवार को फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि वह रैगिंग से काफी परेशान थे। इस मामले में चार सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की पहचान हुई है, जिन पर हर्ष पंड्या के साथ लंबे समय से रैगिंग और वर्बली एब्यूज़ करने के आरोप हैं।

रैगिंग से तंग आकर जूनियर डॉक्टर ने उठाया आत्मघाती कदम

गुजरात के सूरत स्थित न्यू सिविल हॉस्पिटल (NCH) के बॉयज हॉस्टल में रविवार को एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में फर्स्ट ईयर के रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या (30 वर्ष) ने कथित तौर पर सीनियर्स की रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। हॉस्टल के कमरा नंबर 1005 में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

8 घंटे की लंबी जांच के बाद बड़ा एक्शन

घटना की गंभीरता को देखते हुए गुजरात के स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने तत्काल एक उच्चस्तरीय विशेष समिति गठित कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। मेडिकल कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी, स्क्वाड और कॉलेज काउंसिल ने रविवार रात करीब 8 घंटे तक मैराथन बैठक की। इस दौरान विभाग के डॉक्टरों, स्टाफ और जूनियर छात्रों के बयान दर्ज किए गए। जांच में रैगिंग और वर्बल एब्यूज (गाली-गलौज) की पुष्टि होने के बाद, कॉलेज प्रशासन ने आरोपी चारों सेकंड ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों को 6 महीने के लिए तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

निलंबित किए गए आरोपी सीनियर डॉक्टर

अस्पताल की सुपरिटेंडेंट डॉ. पारुल वडगामा के अनुसार, जिन चार सीनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है, उनके नाम निम्नलिखित हैं, डॉ. निराली वसावे, डॉ. अनुज महेश्वरी, डॉ. दीक्षिताबेन गेवरिया और डॉ. हीनाबेन भूत। इसके अलावा, जिम्मेदारी तय करते हुए माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) और तीन फैकल्टी सदस्यों को भी कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी किया गया है।

‘नौकर’ कहकर बुलाते थे, कमरे में बंद कर करते थे टॉर्चर

कमेटी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी सीनियर डॉक्टर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को घंटों तक एक कमरे में बैठाकर रखते थे और उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार करते थे। जूनियर डॉक्टरों को ‘नौकर’ कहकर अपमानित किया जाता था और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि कुछ जूनियर डॉक्टरों ने पहले भी इसकी शिकायत शिक्षकों से की थी, लेकिन उस पर समय रहते कड़ा कदम नहीं उठाया गया।

ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, तो खुला राज

पुलिस के मुताबिक, डॉ. हर्ष पंड्या रविवार सुबह इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात थे। जब वह समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे, तो उनके साथी डॉक्टरों ने उन्हें फोन किया। कोई जवाब न मिलने पर जब वे हॉस्टल के कमरे में पहुंचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। सुरक्षाकर्मियों की मदद से जब दरवाजा खोला गया, तो हर्ष मृत पाए गए।

पुलिस जांच जारी, परिजनों में शोक

खटोदरा थाना पुलिस ने मामले में एक्सीडेंटल डेथ (AD) का केस दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया है। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन रैगिंग के एंगल पर विस्तृत जांच की जा रही है। हर्ष के पिता (जो स्वयं एक डॉक्टर हैं) से स्वास्थ्य मंत्री ने फोन पर बात कर निष्पक्ष जांच और न्याय का पूरा भरोसा दिया है।

पारिवारिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

इस घटना ने न केवल मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग पर एक सवाल खड़ा किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि रैगिंग के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे मामलों में सख्त सजा की आवश्यकता है ताकि भविष्य में कोई और ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर न हो।

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