महाराष्ट्र: दही-हांडी गोविंदाओं को मिलेगी 10 लाख की बीमा सुरक्षा

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र सरकार ने दही-हांडी उत्सव में शामिल होने वाले 1.6 लाख गोविंदाओं के लिए बीमा योजना का ऐलान किया है। इस योजना के अंतर्गत किसी भी हादसे में मौत या स्थायी विकलांगता होने पर पीड़ित को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। दही-हांडी त्योहार भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिसमें लोग मानव पिरामिड बनाकर ऊँचाई पर लटके मिट्टी के बर्तन तोड़ते हैं। इस उत्सव के दौरान होने वाले हादसों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।

बीमा के लिए खर्च उठाएगी सरकार

इस बीमा योजना के लिए 75 रुपये प्रति प्रतिभागी की दर से खर्च होगा, जो भी सरकार अपनी खेल विकास कोष से उठाएगी। खेल विभाग ने बताया कि इस वर्ष दही-हांडी उत्सव में हिस्सा लेने वाले सभी गोविंदाओं को यह कवरेज दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य गोविंदाओं की सुरक्षा को मजबूत करना है, खासकर उन परिजनों के लिए जो ऐसे हादसों के कारण वित्तीय रूप से प्रभावित होते हैं।

घायलों को होगा मुफ्त इलाज

दही-हांडी के दौरान घायल होने वाले गोविंदाओं को सरकारी और अर्ध-सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे पहले से मौजूद सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा, ताकि हादसे की संख्या को कम किया जा सके। बीमा योजना को सरकारी बीमा कंपनी ‘द ओरिएंटल इंश्योरेंस’ के जरिए लागू किया जाएगा।

एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा

दही-हांडी उत्सव में मानव पिरामिड बनाने को महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही एडवेंचर स्पोर्ट का दर्जा दे चुकी है। इसने उत्सव के दौरान गोविंदाओं की सुरक्षा के लिए ज़रूरी दिशा-निर्देश भी तय किए हैं। राज्य सरकार का यह निर्णय पिछले साल हुए हादसों को देखते हुए उठाया गया है, जिसमें कई गोविंदाओं की जान गई थी।

पिछले साल का आंकड़ा

पिछले वर्ष, दही-हांडी उत्सव के दौरान मुंबई और ठाणे में 2 मौतें हुई थीं, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए। इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि उत्सव में सुरक्षा की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है। इसलिए राज्य सरकार ने अब गोविंदाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह क़दम उठाया है।

युवाओं के लिए है उत्सव का महत्व

दही-हांडी उत्सव का महत्व केवल धार्मिक नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र के युवा वर्ग में एक जोश और उत्साह का प्रतीक भी है। युवा-युवतियाँ इस उत्सव में बड़े उत्साह से भाग लेते हैं और मानव पिरामिड बनाने की कला को प्रदर्शित करते हैं। ऐसे में यह बीमा योजना उनके लिए एक सौगात की तरह है, जो उन्हें और उनके परिवारों को सुरक्षा का एहसास दिलाती है।

योजना का शुभारंभ

सरकार की ओर से इस बीमा योजना को महाराष्ट्र राज्य दही-हांडी गोविंदा एसोसिएशन और खेल एवं युवा सेवा विभाग के सहयोग से शुरू किया जाएगा। खेल विकास कोष से आर्थिक सहायता मिलने से यह योजना सफल होने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि गोविंदाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च महत्व दिया जाएगा।

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