छात्रों पर लाठीचार्ज की क्रूरता: मनोज जरांगे का समर्थन, जंतर-मंतर में होगा बड़ा आंदोलन

The CSR Journal Magazine
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक से जुड़े छात्रों के आंदोलन में अब मराठा आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे का समर्थन मिल रहा है। मंगलवार को हुई लाठीचार्ज की घटना ने पूरे देश के छात्रों को आंदोलित कर दिया है। जरांगे ने बीजेपी सरकार से अपील की है कि छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार दिया जाए।

दिल्ली पहुंचकर देंगे समर्थन

जानकारी के अनुसार, मनोज जरांगे आज सुबह लगभग 7 बजे अपने गांव से दिल्ली के लिए रवाना होंगे। वे छत्रपति संभाजीनगर से विमान द्वारा दिल्ली जाकर सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों से मिलकर अपने समर्थन का इजहार करेंगे। NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र पहले से ही आंदोलन कर रहे हैं।

कड़ी निंदा की जरांगे ने

जरांगे ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की घोर निंदा की है। उन्होंने कहा, “जिस अमानवीय तरीके से लाठीचार्ज किया गया, उसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है। यह पहली बार है कि इतनी क्रूरता देखी जा रही है।” उन्होंने दोहराया कि इस तरह के दमन को सहन नहीं किया जाएगा।

सरकार पर लगाया आरोप

जरांगे ने यह भी कहा कि अगर महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की अनुमति नहीं देगी, तो सरकार का घमंड तोड़ना पड़ेगा। उन्होंने यह सवाल उठाया कि कैसे छात्र जी सकते हैं यदि उन्हें आवाज उठाने की इजाजत ही नहीं है।

भयावह लाठीचार्ज की घटना

मनोज जरांगे ने कहा कि लाठीचार्ज की घटना बेहद भयावह थी। उनके अनुसार, इस घटना से यह साफ हो गया है कि सरकार में अहंकार बढ़ गया है। उन्होंने सरकार से पुनः अनुरोध किया कि छात्रों को अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक विकल्पों का उपयोग करने की पूरी आज़ादी दी जाए।

पुलिस ने की कार्रवाई

मंगलवार को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की भी खबर आई है। बताया जा रहा है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया था। इसके बाद पुलिस ने इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है और शांति बनाए रखने की अपील की है।

छात्रों का संघर्ष जारी

मनोज जरांगे ने आश्वासन दिया है कि वे छात्रों के संघर्ष के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। उनका कहना है कि यह मुद्दा केवल NEET पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के अधिकारों की भी लड़ाई है। उन्होंने सरकार को आगाह किया है कि यदि दमन जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

एकजुटता की ज़रूरत

अब देखना यह होगा कि क्या बीजेपी सरकार छात्रों की आवाज़ को सुनती है या इस आंदोलन को और बढ़ने का मौका देती है। मनोज जरांगे का आंदोलन में शामिल होना, छात्रों के लिए एक नई उम्मीद का संकेत है।

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