2023 की आपदा में तबाह हुआ था स्कूल, बाढ़ के तीन साल बाद सीएसआर से फिर गूंजी बच्चों की आवाज  

The CSR Journal Magazine
साल 2023 में आई भीषण बाढ़ ने हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में कई घर, सड़कें, पुल और सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इन्हीं में शलीन गांव का Government High School भी शामिल था। स्कूल के क्षतिग्रस्त होने के बाद करीब तीन वर्षों तक बच्चों की पढ़ाई APMC परिसर में बनी दुकानों में अस्थायी व्यवस्था के तहत चलती रही। अब इस गांव के बच्चों को आखिरकार एक नया और आधुनिक स्कूल भवन मिल गया है। पुनर्निर्माण के बाद स्कूल का उद्घाटन किया गया, जिससे इलाके के छात्रों को बेहतर शिक्षा का माहौल उपलब्ध होगा।

150 छात्रों की क्षमता, आधुनिक सुविधाओं से लैस नया स्कूल

मेक माय ट्रिप फाउंडेशन के सीएसआर (MakeMyTrip Foundation CSR) से नया स्कूल भवन लगभग 150 छात्रों की क्षमता के हिसाब से तैयार किया गया है। इसमें 8 क्लासरूम, 2 स्मार्ट क्लासरूम, साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और मल्टीपर्पज हॉल जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। पहाड़ी क्षेत्र के इस सरकारी स्कूल में अब वे सुविधाएं उपलब्ध होंगी जो आमतौर पर बड़े शहरों के स्कूलों में देखने को मिलती हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

शिक्षा विभाग ने बताया बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा कदम

हिमाचल प्रदेश के उच्च शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों ने कहा कि शलीन गांव कुल्लू-मनाली क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां रहने वाले बच्चों को भी बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। उनका मानना है कि नया स्कूल आने वाली पीढ़ियों के लिए लंबे समय तक उपयोगी साबित होगा। स्थानीय प्रशासन ने भी कहा कि आधुनिक सुविधाओं वाले इस विद्यालय से छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों को भी बेहतर वातावरण मिलेगा और पढ़ाई की गुणवत्ता में सुधार होगा।

बाढ़ राहत से आगे बढ़कर पुनर्वास पर रहा जोर

स्कूल के पुनर्निर्माण के अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वास के तहत कई अन्य कार्य भी किए गए। इनमें Bailey Bridges के निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध कराना, भूस्खलन रोकने के लिए सुरक्षा दीवारों में उपयोग होने वाली सामग्री देना, सिंचाई और पेयजल व्यवस्था बहाल करने में सहयोग करना तथा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए उपकरण उपलब्ध कराना शामिल रहा। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई और वृद्धाश्रम, अनाथालय तथा दिव्यांग महिलाओं के छात्रावास को भी सहायता प्रदान की गई।

आपदा के बाद शिक्षा व्यवस्था को मिली नई मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद केवल राहत कार्य ही नहीं, बल्कि शिक्षा और सार्वजनिक संस्थानों का पुनर्निर्माण भी बेहद जरूरी होता है। शलीन गांव का यह नया स्कूल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। करीब तीन वर्षों तक अस्थायी व्यवस्था में पढ़ाई करने वाले बच्चों को अब सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक परिसर मिल गया है, जिससे उनकी पढ़ाई पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और प्रभावी हो सकेगी।
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