UPI ट्रांजैक्शन पर नए नियम को लेकर Priyanka Chaturvedi ने उठाए सवाल, जानें क्या है मामला?

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली: हाल ही में यूपीआई ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने के दावों के बीच, प्रियंका चतुर्वेदी ने कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने सीधे बुनकर से हैंडलूम साड़ी खरीदने के संदर्भ में पूछा कि क्या उस पर कोई चार्ज लगेगा। अगर वह 2,000 रुपये से अधिक की साड़ी खरीदती हैं, तो इस ट्रांजैक्शन पर चार्ज कौन देगा? क्या यह बुनकर के खाते में जाएगा या फिर दुकानदार इसे उनके बिल में जोड़ देगा? उनकी यह चिंता ऐसे समय में आई है जब सरकार ने पहले ही कहा था कि आम यूजर्स को कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं देना होगा।

सरकार का बयान और संदेह

प्रियंका चतुर्वेदी ने एक प्रेस रिलीज साझा की है जिसमें सरकारी बयान को देखकर उन्होंने आम आदमी के दृष्टिकोण से सवाल किया है। उनकी पंक्तियों में चिंता झलकती है कि किस प्रकार की चार्जिंग प्रणाली लागू होगी। क्या चार्ज सीधे बुनकर से संबंधित होगा या यह प्रक्रिया कहीं और जाकर हस्तांतरण होगी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यह स्पष्ट किया है कि यह मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के आधार पर लागू होगा या नहीं।

बिजनेस रेवेन्यू का प्रभाव

प्रियंका चतुर्वेदी ने यह भी सवाल उठाया है कि क्या चार्ज व्यापार के आकार और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के आधार पर तय होगा। क्या यह निर्धारित होगा कि किस प्रकार के व्यापारी पर कितनी दर से चार्ज लगेगा? जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान का चलन बढ़ रहा है, यूजर्स के लिए यह जानना जरूरी हो गया है कि छोटे व्यापारियों पर क्‍या प्रभाव पड़ेगा।

सरकार की सफाई

इस संदर्भ में, केंद्र सरकार ने स्पष्ट जानकारी दी है कि यूपीआई सेवाएं निःशुल्क रहेंगी। हालांकि, व्यवसायों के लिए कुछ सीमाओं के बाद मामूली MDR लागू होंगे। वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि ये शुल्क केवल एक निश्चित सीमा से ऊपर और कुछ विशिष्ट लेनदेन पर लागू होंगे, जो डेबिट या क्रेडिट कार्ड के MDR से काफी कम होंगे। इस तरह, यह बात सामने आती है कि आम उपभोक्ता को बड़ी मात्रा में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विधेयक का महत्व

दरअसल, यह बयान लोकसभा में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन के लिए पारित विधेयक के बाद आया है। इस विधेयक के तहत, सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को UPI और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद से यह जानना और भी जरूरी हो गया है कि यह सिस्टम किस तरह से काम करेगा और आम लोगों को इससे क्या लाभ होगा।

मामले की नाजुकता

प्रियंका चतुर्वेदी के उठाए गए सवाल इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यूपीआई जैसे सिस्टम में चार्जिंग का असली असर ग्रामीण और छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार इस दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश दे और आम नागरिकों की भलाई को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए। सभी का ध्यान इस मामले की ओर है, क्योंकि यह डिजिटल ट्रांजैक्शन के भविष्य को प्रभावित कर सकता है।

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