बैंक या लेनदार भी नहीं छू सकते बीमा का पैसा! जानिए MWP एक्ट की ताकत

The CSR Journal Magazine
क्या आपकी जीवन इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा आपकी मृत्यु के बाद सीधे परिवार को मिलेगा? ज्यादातर लोग यही मानते हैं, लेकिन सच्चाई इससे अलग हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति पर भारी कर्ज, बिजनेस लोन या पर्सनल गारंटी की जिम्मेदारी है, तो उसके इंश्योरेंस का पैसा परिवार को नहीं मिल सकता। इस स्थिति में, पत्नी और बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक खास कानून मदद कर सकता है।

कर्ज होने पर भी परिवार को मिलेगा इंश्योरेंस का पैसा, जानिए कैसे?

विवाहित महिला संपत्ति अधिनियम, 1874 (Married Women’s Property Act – MWPA) की धारा 6 यह कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है। यदि कोई व्यक्ति इस कानून के तहत जीवन बीमा पॉलिसी लेता है, तो उसकी मृत्यु के बाद मिलने वाला क्लेम का पैसा केवल उसकी पत्नी और बच्चों का होता है। इस पैसे पर किसी भी लेनदार, बैंक या रिश्तेदार का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है।

किस प्रकार का कर्ज बन सकता है समस्या

अगर कोई व्यक्ति अपने जीवन के दौरान विभिन्न प्रकार के कर्ज लेता है, तो ये उसकी पॉलिसी के भुगतान में बाधा डाल सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति बैंकों या फाइनेंस कंपनियों से लोन लेता है और उसकी मृत्यु होती है, तो उस पर बकाया राशि इंगित कर सकती है कि इंश्योरेंस का पैसा कर्ज चुकाने के लिए पहले इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रकार, परिवार को उस पैसे का लाभ नहीं मिल सकता जो वे उम्मीद करते हैं।

कानून जो पत्नी और बच्चों की मदद कर सकता है

लेकिन यहां एक राहत की खबर है। भारतीय कानून किसी भी जीवन बीमा पॉलिसी की राशि को कर्ज से बचाने के लिए प्रावधान करता है। अगर पति या पिता की मृत्यु हो जाती है, तो पत्नी और बच्चों को यह धन सीधे प्राप्त होगा। यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे और कर्ज के बोझ तले ना दबे।

यदि पॉलिसीधारक पर बड़ा कर्ज या लोन है

यदि व्यक्ति ने बैंक, व्यवसाय या किसी व्यक्ति से कर्ज लिया है, तो लेनदार इस बीमा राशि को ज़ब्त नहीं कर सकते। अदालत भी कर्ज चुकाने के लिए इस पैसे को कुर्क (Attach) करने का आदेश नहीं दे सकती।

यदि पॉलिसीधारक का दिवाला (Bankruptcy) निकल जाए

व्यक्ति के दिवालिया घोषित होने पर भी सरकारी रिसीवर या ट्रस्टी इस पैसे को हाथ नहीं लगा सकते। क्लेम का पूरा धन सुरक्षित रूप से सीधे पत्नी और बच्चों के पास जाता है।

परिवार के अन्य सदस्यों या रिश्तेदारों का दावा

पॉलिसीधारक के भाई, माता-पिता या अन्य कानूनी वारिस इस राशि पर अपना हक नहीं जता सकते। यह पॉलिसी कानूनी रूप से एक ट्रस्ट बन जाती है, जिससे परिवार के आपसी विवाद खत्म हो जाते हैं।

पॉलिसी लेते समय चुनाव

इस सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए पॉलिसी खरीदते समय ही MWPA फॉर्म भरना अनिवार्य है। एक बार इस अधिनियम के तहत पॉलिसी रजिस्टर होने के बाद, पॉलिसीधारक न तो इसे सरेंडर कर सकता है और न ही इसमें नामांकित व्यक्ति (Nominee) को बदल सकता है।

जिंदगी बिता रहे हैं लोन के साथ

भारत में कई लोग अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा कर्ज चुकाने में व्यतीत कर देते हैं। परिस्थितियों के कारण, कई बार लोन चुकाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में, यह जानना जरूरी है कि उनकी इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा अंतिम समय में उनके परिवार की मदद कर सकता है। यह उन्हें कुछ आर्थिक राहत दे सकता है, जिससे वे कर्ज के बोझ से मुक्त हो सकें।

फाइनेंशियल प्लानिंग का महत्व

ऐसे कानूनी प्रावधानों का लाभ उठाने के लिए सही फाइनेंशियल प्लानिंग आवश्यक है। परिवार की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए, जीवन बीमा पॉलिसी और कर्ज की जिम्मेदारियों का सही संतुलन बनाना जरूरी है। सही समय पर सही निर्णय लेने से भविष्य में परिवार को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

क्या करना चाहिए?

अगर आप भी कर्ज में हैं और आपकी जीवन बीमा पॉलिसी है, तो आपको अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लेनी चाहिए। उन्हें आपके विशेष हालात के अनुसार सही सलाह देने की क्षमता होती है। इससे आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके परिवार को किसी भी संकट में आर्थिक सुरक्षा मिले। जीवन का कोई भी अनिश्चित पहलू, आपके परिवार के लिए एक सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित कर सकता है।

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