सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या कम, निजी इलाज खर्चा 8 गुना ज्यादा; क्या होगा समाधान?

The CSR Journal Magazine
भारत में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बहुत सी समस्याओं का सामना कर रही हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में 1,000 आबादी पर सिर्फ 0.79 बेड उपलब्ध हैं। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य मंत्री कई बार सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को बढ़ाने की बात करते हैं। सरकारी अस्पतालों में बेड की कमी के कारण मरीज अक्सर निजी अस्पतालों का रुख करते हैं, जहां इलाज का खर्च सरकारी अस्पतालों से 7.6 गुना ज्यादा है।

प्राइवेट अस्पतालों का महंगा इलाज, क्या होगी बिल पर लगाम?

पार्लियामेंट्री समिति ने हाल ही में निजी अस्पतालों के बढ़ते खर्च पर चिंता जताई है। सरकारी स्वास्थ्य बजट का लगभग 51% हिस्सा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च होता है, जबकि माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निवेश अपेक्षाकृत कम है। नतीजतन, गंभीर बीमारी के लिए आवश्यक सुविधाएं एकदम घट रही हैं, जिससे मरीज निजी अस्पतालों की ओर भागते हैं। संविधानिक समिति ने निजी अस्पतालों में इलाज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सिफारिशें की हैं। उनकी मांग यह है कि इलाज के सामान्य प्रक्रियाएं और विशेषज्ञ उपचार के लिए अधिकतम कीमतें तय की जाएं। इसका उद्देश्य है कि मरीजों को अस्पताल में पहुंचने पर अप्रत्याशित बिल का सामना न करना पड़े।

पारदर्शिता की ज़रूरत, जन औषधि केंद्र का बड़ा सुझाव

अस्पतालों में पारदर्शी फीस व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। मरीजों को पहले से सम्पूर्ण खर्च का पता होना चाहिए, ताकि वे सही फैसला ले सकें। कमरे के किराए और सर्जरी पैकेज रेट के लिए सुझाव भी दिए गए हैं, ताकि भारी बिल को नियंत्रित किया जा सके। सरकारी योजनाओं के तहत निजी अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोलने का सुझाव दिया गया है। यह मरीजों को सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराएगा, जिससे इलाज का खर्च कम होगा। आंकड़े बताते हैं कि जन औषधि केंद्रों ने पिछले 12 वर्षों में लोगों को ₹45,000 करोड़ की बचत कराई है।

स्वास्थ्य बीमा का सुधार

हालांकि, स्वास्थ्य बीमा कवरेज में सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी औसत खर्च ₹34,064 तस्वीर पेश कर रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए समिति ने स्वैच्छिक स्वास्थ्य बीमा मॉडल पेश करने का सुझाव दिया है। यह उन वर्गों के लिए होगा जो सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दायरे में नहीं आते।

नए AIIMS की जरूरत और महंगाई पर नियंत्रण

संविधानिक समिति ने एक नया स्वतंत्र AIIMS या सैटेलाइट सेंटर स्थापित करने की सिफारिश की है, जिससे सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ सके। इस तरह सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और निजी अस्पतालों के दबाव में कमी आएगी। बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों के द्वारा मरीजों से अधिक चार्जिंग की समस्या भी बनी हुई है। समिति ने इस पर सुझाव दिया है कि ऐसे अस्पतालों में क्रॉस-सब्सिडी मॉडल बनाया जाए, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मदद मिले।

स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार का समय

संविधानिक समिति की सिफारिशें स्वास्थ्य प्रणाली के तीन मुख्य स्तरों पर सुधार का लक्ष्य रखती हैं। सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना, निजी इलाज की कीमतों को नियंत्रित करना, और मरीजों के खर्च को कम करना शामिल हैं। हालांकि, इन सभी सिफारिशों को अमल में लाने के लिए सरकार की तरफ से कार्यवाही की जरूरत है।

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