Jaipur में अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग से 8 लोग जिंदा जल गए, एक मां की पुकार, ‘बेटा पानी पिलाने गया था’

The CSR Journal Magazine
जयपुर के खोह-नागोरियान क्षेत्र में 9 जून (मंगलवार) को एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से 8 लोग जिंदा जल गए। यह भीषण अग्निकांड केवल मजदूरों की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कई परिवारों की खुशियों पर गहरा असर डाला है। पूरे इलाके में चीखें और सिसकियां गूंज रही हैं। राक्ष्या की ढाणी में घर संख्या 88 में चल रही इस अवैध फैक्ट्री में हुई ब्लास्ट ने 8 लोगों की जान ले ली, जिनमें एक बच्चा और दो भाई शामिल हैं।

एक मां की बेबसी

हादसे के बाद एक devastated मां, नाजमीन बानों, ने बताया कि उनका 16 वर्षीय बेटा मोहम्मद रब्बिल सिर्फ पानी देने गया था। रब्बिल का घर से निकलना और फिर उसे ढूंढना उनके लिए एक nightmare बन गया है। रब्बिल की मां का कहना है कि बुधवार की सुबह उसने कहा था कि वह दोस्तों को पानी दे रहा है। आग लगने पर उन्होंने जब मौके पर दौड़ लगाई, तो वह अपने बेटे को नहीं ढूंढ पाईं।

परिवार का सहारा टूट गया

रब्बिल के पिता सिकंदर कुरैशी कई समय से गंभीर रूप से बीमार हैं। उनका परिवार पहले से ही आर्थिक तंगी का सामना कर रहा था, और अब रब्बिल की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया है। मां नाजमीन जब भी होश में आती हैं, तो रब्बिल की तस्वीर देख कर फूट-फूट कर रो पड़ती हैं।

भाई-बहनों की दर्दनाक कहानी

इस हादसे का एक और दुखद पहलू है दो सगे भाई, आजीम और बिलाल, जो कि अग्निकांड का शिकार बने। 18 वर्षीय आजीम फैक्ट्री में काम कर रहा था और बड़ा भाई बिलाल केवल उससे मिलने आया था। जब धमाका हुआ, तो दोनों को भयानक आग की लपटों में फंस गए। बिलाल ने अपनी पत्नी और दो छोटी बेटियों को छोड़ दिया है।

बचपन की दोस्ती का अंत

समीर खान (20) और आजीम (18) भी इस आग में झुलस गए। दोनों जब अस्पताल पहुंचाए गए, तब उनकी हालत नाजुक थी। दुख की बात यह है कि दोनों ने अस्पताल में कुछ ही मिनटों के अंतराल में दम तोड़ दिया। बचपन की दोस्ती की यह कहानी अब एक खौफनाक हकीकत बन गई है।

अवैध फैक्ट्रियों का खतरा

जयपुर में यह अग्निकांड एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुआ है, जो कि कई सालों से काम कर रही थी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस इलाके में और भी अवैध फैक्ट्रियां चल रही हैं। इन फैक्ट्रियों के मालिकों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

सिर्फ चीखें और सिसकियां

इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। अब यहां सिर्फ चीखें और सिसकियां सुनाई देती हैं। मृतकों के परिवार धीरे-धीरे इस tragedic घटना के गहरे असर को समझने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हमारी जिम्मेदारियों पर प्रश्न चिन्ह लगाती हैं।

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