भारत का अंडरवॉटर न्यूक्लियर शील्ड मजबूत, INS अरिसुदन का एडवांस सी ट्रायल लॉन्च

The CSR Journal Magazine
अरिहंत-क्लास की चौथी और आखिरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी S4* को एडवांस सी ट्रायल के लिए लॉन्च कर दिया गया है। इस पनडुब्बी को औपचारिक रूप से INS Arisudan नाम दिया गया है। यह पनडुब्बी फिलहाल समुद्र में परीक्षण कर रही है और इसे भारतीय नौसेना में साल 2027 तक शामिल किया जाएगा। हरिताश का अर्थ है “दुश्मनों का संहार करने वाला”, जो इस पनडुब्बी के नामकरण की प्रक्रिया को दर्शाता है।

सी-ट्रायल का एडवांस स्टेज

विशाखापट्टनम के शिप बिल्डिंग सेंटर से दिसंबर 2025 के अंत में रवाना होने के बाद, INS Arisudan अपने एडवांस सी-ट्रायल्स से गुजर रही है। इसके प्रोपल्शन, रडार और सोनार सिस्टम का कड़ा परीक्षण शुरू हो गया है। यह ट्रायल प्रक्रिया लगभग एक साल चलेगी, जिससे इसकी कार्यक्षमता की पुष्टि हो सकेगी। इन परीक्षणों के दौरान यह पनडुब्बी गहरे समुद्र में विभिन्न मानकों पर परखी जा रही है।

2027 की शुरुआत में कमीशनिंग की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, INS Arisudan को 2027 की शुरुआत में या 2026 के अंत तक भारतीय नौसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। पिछले वर्ष अप्रैल में INS Aridhaman (S4) को पूरी गोपनीयता से बेड़े में शामिल किया गया, जिसके बाद अब इस चौथी पनडुब्बी पर पूरा ध्यान केंद्रित किया गया है।

‘कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस’ का लक्ष्य

INS Arisudan का नाविक बेड़े में शामिल होना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है। जब भारत के पास चार परमाणु पनडुब्बियां होंगी, तब भारत ‘Continuous At-Sea Deterrent’ (CASD) का दर्जा हासिल कर लेगा। इसका मतलब है कि कम से कम एक परमाणु पनडुब्बी हमेशा समुद्र में परिक्रमा करती रहेगी, जबकि अन्य पनडुब्बियां रखरखाव या प्रशिक्षण के लिए बाहर होंगी।

INS अरिसुदन की ताकत और विशेषताएं

यह पनडुब्बी अपनी पूर्ववर्ती पनडुब्बियों की तुलना में अधिक घातक और बड़ी है। यह INS अरिहंत से लगभग 10 मीटर लंबी है, जिससे इसका वजन करीब 7,000 टन हो गया है। इसमें आठ वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) के मिसाइल ट्यूब हैं, जो इसे एक साथ आठ K-4 मिसाइलें या 24 K-15 सागरिका मिसाइलें ले जाने की क्षमता प्रदान करते हैं।

आत्मनिर्भरता का प्रतीक

INS Arisudan में 80% से अधिक कंपीटेंट्स पूरी तरह मेड-इन-इंडिया हैं, जो भारत की आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसके अपग्रेडेड 83 MW का कॉम्पैक्ट लाइट-वाटर रिएक्टर इसकी विशेषताओं में चार चांद लगाता है। इसकी कम आवाज के कारण इसे दुश्मन के सोनार के लिए पहचानना लगभग असंभव होगा। यह पनडुब्बी भविष्य के और अधिक एडवांस S5-क्लास परमाणु पनडुब्बियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आधार साबित होगी।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos