Instagram पर बाल यौन शोषण विज्ञापन मामले में नोटिस: सरकार ने 7 दिन में जबाव मांगा

The CSR Journal Magazine
भारत सरकार ने इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उसे 7 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। यह नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया था।

खतरनाक कंटेंट पर कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, IT मंत्रालय ने इंस्टाग्राम से आग्रह किया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत हटा दे। बीबीसी ने अपनी एक जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया था कि इंस्टाग्राम भारतीय उपयोगकर्ताओं को ऐसे विज्ञापन दिखा रहा है, जो बेहद चिंता का विषय है।

पूर्ववर्ती कदम भी उठाया गया

1 जुलाई को, सरकार ने Meta को WhatsApp के यूजरनेम फीचर को लेकर भी एक नोटिस भेजा था। इस प्रकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो रहा है कि सरकार सामाजिक मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए संकल्पित है।

कानूनी प्रावधानों की जानकारी

बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना और शेयर करना भारतीय कानून के तहत अपराध है। IT Act की धारा 67B के अनुसार, पहली बार दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार में सजा 7 साल तक बढ़ जाती है।

सोशल मीडिया की जिम्मेदारियां

सोशल मीडिया कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वे अवैध कंटेंट को हटा दें और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करें। बच्चों के यौन शोषण का कंटेंट तुरंत पहचानने और रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय करने की आवश्यकता है। इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई जरूरी है।

तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह

अगर किसी उपयोगकर्ता को ऐसे खतरनाक कंटेंट का सामना करना पड़े, तो उसे उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उस कंटेंट को संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए।

सरकार की कार्यवाहियां

सरकार ऐसी सोशल मीडिया कंपनियों से इस तरह के मामले पर जवाब मांग सकती है और उन्हें कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। इस मामले में आपराधिक जांच शुरू करने के लिए जांच एजेंसियों की मदद ली जा सकती है।

रुचि का विषय: केवल प्लेटफार्म नहीं, सभी जिम्मेदार

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार नहीं होते। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्तियों पर भी भारतीय कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाना और कार्रवाई करना आवश्यक है।

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