Defence Technology: भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए जल्द ही हाइपरसोनिक मिसाइलों को विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। डीआरडीओ प्रमुख समीर वी. कामत ने अपने एक बयान में बताया कि देश ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल’ और ‘हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल’ से लैस होगा। ये मिसाइलें सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइलों से दोगुनी रफ्तार पर होंगी, जिससे कोई भी डिफेंस सिस्टम इन्हें रोक नहीं पाएगा।
Defence Technology: हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी का महत्त्व
डीआरडीओ प्रमुख ने कहा कि ग्लाइड मिसाइल का पहला परीक्षण जल्द ही होने की संभावना है। इसके अलावा, स्क्रैमजेट इंजन पर आधारित क्रूज मिसाइल पर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की गई हैं। हाल ही में स्क्रैमजेट प्रोपल्शन का 1,000 सेकंड से ज्यादा समय तक सफल परीक्षण हुआ। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद इसे सेना में शामिल करने का लक्ष्य 5 वर्षों में है।
ब्रह्मोस और हाइपरसोनिक का अंतर
जहां ब्रह्मोस मिसाइल की गति 3,500 km/h है, वहीं नई हाइपरसोनिक मिसाइलें 7,000 से लेकर 12,000 km/h तक पहुंच सकती हैं। ब्रह्मोस के लिए रडार की पहुंच में रहना संभव है, लेकिन हाइपरसोनिक मिसाइलें प्लाज्मा शील्ड के जरिए अपनी सुरक्षा करती हैं। ये रॉकेट बूस्टर की मदद से अंतरिक्ष के सीमा तक जाती हैं और फिर बिना इंजन के ध्वनि की गति से 5 गुना अधिक रफ्तार पकड़ती हैं।
हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल की विशेषताएँ
हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल पूरे समय स्क्रैमजेट इंजन के माध्यम से अपनी रफ्तार बनाए रखती हैं। यह हवा की ऑक्सीजन का इस्तेमाल ईंधन जलाने में करती हैं, जिससे ये हल्की और तेज बनती हैं। वर्तमान में चीन और रूस इस तकनीक में आगे हैं। रूस के पास ‘जिरकॉन’ और ‘किंजल’ हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं, जबकि चीन ने ‘डीएफ-जेडएफ’ मिसाइल तैनात की है।
Defence Technology: अग्नि-6 प्रोजेक्ट की तैयारी
डीआरडीओ प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि अग्नि-6 मिसाइल कार्यक्रम के लिए तकनीकी तैयारी पूरी है। जैसे ही सरकार से अनुमति मिलेगी, इस पर काम तुरंत शुरू किया जाएगा। अग्नि-6 एक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल होगी, जिसमें 10,000 से 12,000 किलोमीटर की मारक क्षमता होगी। यह मिसाइल एक साथ कई परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम होगी, जो इसे और भी प्रभावशाली बनाती है।
भारत के डिफेंस में क्रांतिकारी बदलाव
इन तकनीकी विकासों के साथ, भारत की रक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव आ सकता है। हाइपरसोनिक मिसाइलों के आगमन से भारत की सामरिक क्षमता में वृद्धि होगी। आने वाले समय में, ये मिसाइलें देश की रक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। भारत का इरादा अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले तकनीकी बढ़त हासिल करना है ताकि सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
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