भारत बना विश्व का नंबर-1 शिप रीसाइक्लिंग देश, 2030 का लक्ष्य पहले ही पूरा

The CSR Journal Magazine
भारत ने शिप रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में एक नई ऊँचाई हासिल की है। हाल ही में आई UNCTAD रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 35.4% तक पहुँच गई है। इस उपलब्धि को हासिल करने के चलते भारत ने मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 का लक्ष्य समय से पहले पूरा कर लिया है। 2025 में इंडिया ने अपने रीसाइक्लिंग आंकड़े 2.99 मिलियन ग्रॉस टन (GT) तक बढ़ा दिए, जो 2024 के मुकाबले लगभग 60% अधिक है।

भारत की स्थिति को मजबूत बनाते नीति सुधार

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत का यह उभरना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में निरंतर नीति सुधारों, उद्योग के प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय मानकों के पालन की सफलता का प्रतीक है। भारत अब जिम्मेदार और टिकाऊ शिप रीसाइक्लिंग के लिए एक वैश्विक केंद्र बन गया है।

विधान और योजनाएँ जो इस सफलता का आधार हैं

भारत ने शिप रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए शिप रीसाइक्लिंग एक्ट, 2019 लागू किया। इस एक्ट के तहत सरकार ने HKC के अनुरूप एक संरचना तैयार की है। इस काम में शिप-ब्रेकिंग क्रेडिट नोट योजना भी महत्वपूर्ण है, जिसमें शिप मालिकों को रीसाइक्ल किए गए जहाज के स्क्रैप मूल्य का 40% क्रेडिट नोट मिल सकता है। इस क्रेडिट नोट का उपयोग नए जहाजों की खरीद में किया जा सकता है।

भारत ला रहा है बदलाव

भारत सरकार अब विदेशी स्वीकृत रीसाइक्लिंग सुविधाओं की सूची में अपने शिप रीसाइक्लिंग यार्ड को शामिल करने पर काम कर रही है। इसके साथ ही, अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड के नियोजित विस्तार के माध्यम से भारत अपनी क्षमता को लगभग 9 मिलियन लाइट डिस्प्लेसमेंट टन (LDT) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

नए लक्ष्य और भविष्य की संभावना

बाल्टिक एंड इंटरनेशनल मैरीटाइम काउंसिल के अनुसार, अगले दशक में वैश्विक स्तर पर 16,000 से अधिक जहाजों के रीसायकल होने की संभावना है। ऐसे में, भारत 35.4% की वर्तमान बाजार हिस्सेदारी के साथ लगभग 500 से 600 जहाजों को रीसायकल करने की स्थिति में है।

भारत की बढ़ती रीसाइक्लिंग क्षमता

शिप रीसाइक्लिंग के इस क्षेत्र में भारत की प्रगति न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वैश्विक पर्यावरण तंत्र में भी अपने सशक्त योगदान का संकेत देती है। भारत अब शिप रीसाइक्लिंग में वैश्विक नेता बन चुका है और इसके प्रदर्शन को देखकर अन्य देश भी प्रेरित हो रहे हैं।

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