कृष्ण 5 बार नमाज पढ़ते थे- मौलाना के दावे पर संत ने कहा-जुबान काट दो

The CSR Journal Magazine

मौलाना का विवादित बयान- श्रीकृष्ण 5 बार नमाज पढ़ते थे, संत ने कहा- मौलाना की जीभ काटने वाले को 10 लाख इनाम देंगे

उत्तर प्रदेश के इटावा में रहने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी का भगवान श्रीकृष्ण पर एक विवादित बयान सामने आया है। मौलाना ने दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और वे दिन में पांच बार नमाज पढ़ा करते थे। उनका यह बयान जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लखनऊ में हिंदू महासभा ने मौलाना की तस्वीरों को पैरों से रौंदकर विरोध जताया और हजरतगंज कोतवाली में उनके खिलाफ FIR करने की शिकायत दर्ज कराई।

संतों का तीखा जवाब

अयोध्या के संत विष्णु दास ने मौलाना के बयान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि जो भी मौलाना जर्जिस की जीभ काटकर लाएगा, उसे 10 लाख रुपये का नकद इनाम देंगे। उनके अनुसार, मौलाना का यह बयान न केवल गलत है बल्कि यह हिंदू धर्म के प्रति अपमान भी है। वह इस बयान को लेकर काफी चिंतित हैं और इसे लेकर कानून की कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बयान की गंभीरता और असलियत

मौलाना ने अपनी बात में एक श्लोक का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं के साथ जोड़ने की कोशिश की। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौलाना ने इस श्लोक की गलत व्याख्या की है। असल में, श्रीमद्भगवद्गीता के इस श्लोक में नमाज या इस्लाम का कोई उल्लेख नहीं है। श्लोक का असली अर्थ एक योगी की साधना पर केंद्रित है, जिसमें वह अपने मन, शरीर और आत्मा को एकत्रित कर परमात्मा में विलीन होता है।

पूरा मामला और विवाद की वजह

झारखंड के देवघर जिले में आयोजित एक जलसे के दौरान मौलाना जर्जिस अंसारी ने मंच से दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण मुस्लिम थे और वे दिन में पांच बार नमाज पढ़ते थे। अपने इस दावे को साबित करने के लिए मौलाना ने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक का हवाला दिया।
श्लोक: योगी युञ्जीत सततमात्मानं रहसि स्थितः। एकाकी यतचित्तात्मा निराशीरपरिग्रहः॥
मौलाना ने इस श्लोक की मनगढ़ंत व्याख्या करते हुए इसे नमाज और इस्लाम से जोड़ दिया। जबकि, इस श्लोक का वास्तविक अर्थ साधक को एकांत में मन और इंद्रियों को नियंत्रित कर ध्यान (योग) लगाने का उपदेश देना है। इस श्लोक में नमाज या इस्लाम का कोई उल्लेख नहीं है।

लखनऊ में भारी प्रदर्शन

इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों में तीव्र आक्रोश है। लखनऊ में हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर मौलाना के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया और उनके पोस्टरों को पैरों से कुचला। हिंदू महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने लखनऊ के हजरतगंज कोतवाली में मौलाना के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में लिखित शिकायत दर्ज कराई है और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।

अयोध्या के संत का बड़ा ऐलान

मौलाना के इस बयान पर अयोध्या के प्रसिद्ध संत महंत विष्णु दास ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर खुले मंच से ऐलान किया है कि जो कोई भी भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करने वाले मौलाना जर्जिस अंसारी की जीभ काटकर लाएगा, उसे वह ₹10 लाख का नकद इनाम देंगे।

देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग

उन्होंने मांग की है कि मौलाना को संस्कृत का कोई ज्ञान नहीं है और वह सनातन धर्म के ग्रंथों की गलत व्याख्या कर देश का माहौल बिगाड़ रहा है, इसलिए उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। संत विष्णु दास ने इस मामले पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।

राजनीति का रंग भी चढ़ा

कांग्रेस पार्टी ने मौलाना के बयान को राजनीतिक चारा बताया है। उनके प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत का कहना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, ऐसे विवाद खड़े होने की संभावना बढ़ जाती है। इस मामले को लेकर टिप्पणी करते हुए विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि मौलाना जर्जिस पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं और अब उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना चाहिए।

धार्मिक भावनाओं का मामला

अयोध्या के संतों और अन्य धार्मिक नेताओं ने मौलाना के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। संत धर्मदास महाराज ने कहा कि मौलाना की बातें केवल धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि मौलाना को इतिहास की सही जानकारी नहीं है और उन्हें अपने बयानों के लिए कोई सजा मिलनी चाहिए। भारतीय समाज में ऐसे बयानों का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

सार्वजनिक सुरक्षा की चिंता

इस घटना ने समाज में वैमनस्यता बढ़ाने का काम किया है। संत विष्णु दास ने कहा कि मौलाना के बयान के बाद लाखों कृष्ण भक्तों की भावनाएँ आहत हुई हैं। हिंदू समाज और संतों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण का इतिहास 5000 साल से भी अधिक पुराना है, जबकि इस्लाम का इतिहास 1400 साल का है, ऐसे में इस तरह के बेतुके बयान केवल धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और सुर्खियों में आने के लिए दिए जा रहे हैं।

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