बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री का एक और बयान चर्चा में आ गया है। नागपुर में कथा के दौरान उन्होंने कहा, ‘आजकल पुरुषों की बात छोड़ दीजिए, बड़े घरानों की माताएं भी पी रही हैं। राम-राम, राम-राम… बजरंग बली बचाएं।’ इस बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। शास्त्री के इस विवादास्पद बयान पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
कांग्रेस का कड़ा विरोध
छतरपुर में कांग्रेस नेता दीप्ति पांडे ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि व्यासपीठ से इस तरह की टिप्पणी करना बहुत अनुपयुक्त है। उन्होंने कहा, ‘पूरा देश आपको सुनता है, ऐसे में माताओं के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए।’ इसके साथ ही उन्होंने शास्त्री से अपील की कि वह ऐसी गलत भाषा का उपयोग करना बंद करें।
धीरेंद्र शास्त्री का बयान और उसकी गंभीरता
धीरेंद्र शास्त्री ने 28 अप्रैल को एक और विवादास्पद टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा, ‘जब कई माताएं ही विचित्र संस्कारों वाली हो जाएंगी तो बच्चों को क्या हलुआ संस्कार देंगे?’ यह बयान भी काफी चर्चा का विषय बना। शास्त्री ने यह भी कहा कि पहले समाज में मर्यादा और संस्कार थे, लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। इसके चलते कई लोगों ने उनकी टिप्पणियों पर नाराजगी जताई।
दीप्ति पांडे का सख्त संदेश
कांग्रेस नेता दीप्ति पांडे ने कहा, ‘मां ही बच्चे की प्रथम गुरु होती हैं। यदि आपने मातृ शक्ति के खिलाफ कोई और टिप्पणी की तो हमें आपके खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ेगा।’ इस बयान के जरिए उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को चेताया कि महिलाओं के खिलाफ अनावश्यक टिप्पणियों से बचें।
अतीत में भी ऐसे बयान
कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने नवंबर 2022 में भी इसी तरह का विवादित बयान दिया था। इंदौर में उन्होंने कहा था कि शराब की दुकान पर लड़कियों की संख्या लड़कों से ज्यादा थी। इस सब विवादों ने यह साबित कर दिया है कि ऐसे बयानों का असर समाज पर गंभीर हो सकता है।
धीरेंद्र शास्त्री की चुनौती
हाल ही में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के श्याम मानव शास्त्री ने शास्त्री को चुनौती दी कि वह 10 लोगों के नाम और उनके विवरण बताएं। शास्त्री ने इसे स्वीकार किया और कहा, ‘अगर किसी को खुजली है, तो दरबार आ जाओ।’ उनकी यह चुनौती भी चर्चा के केंद्र में है।
समाज में महिलाओं की स्थिति पर बहस
इस तरह के बयानों ने समाज में महिलाओं की स्थिति और उनके प्रति दृष्टिकोण पर बहस छेड़ दी है। जब लोग प्रभावशाली पदों पर बैठे व्यक्तियों की बातें सुनते हैं, तब उन्हें उनके प्रति गंभीरता से विचार करना चाहिए। ऐसे बयानों के पीछे की सोच और उनके संभावित प्रभावों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
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