परिसीमन बिल की ‘चाबी नंबर-36’: क्या स्टालिन और शरद पवार सरकार को सफल बनाएंगे?

The CSR Journal Magazine
मानसून सत्र में परिसीमन बिल को पास कराना सरकार के लिए एक बड़ा चैलेंज है। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 36 और राज्यसभा में 6 अतिरिक्त वोट की जरूरत है। इस बीच, एनसीपी (Sharad Pawar) सांसद सुप्रिया सुले का बयान ने सियासी माहौल को और रुचिकर बना दिया है। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें सरकार परिसीमन बिल पेश करने की योजना बना रही है। इस बिल को पास कराने के लिए नंबरों की जोड़-तोड़ शुरू हो गई है।

सुप्रिया सुले का बयान

सुप्रिया सुले ने संकेत दिया कि एनसीपी केवल समर्थन तभी देगी जब सरकार दो मुद्दों पर स्पष्टता पेश करे: लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और 50 फीसदी आरक्षण की सीमा। अगर सरकार इन मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार होती है, तो एनसीपी परिसीमन बिल का समर्थन कर सकती है। इससे सियासी गणित में नया मोड़ आया है। बिल अभी आया नहीं, लेकिन समर्थन की शर्तें पहले से ही स्पष्ट हो रही हैं।

लोकसभा में नंबर गेम

लोकसभा की कुल प्रभावी संख्या 540 है, जिसमें दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए। एनडीए के पास 324 सांसद हैं, जिससे स्पष्ट है कि सरकार को 36 अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए सरकार विपक्षी खेमे के कई सांसदों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। समाजवादी पार्टी, आरजेडी और एनसीपी के सांसद इस खेल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सरकार का रणनीतिक प्लान

सरकार ने सिर्फ समर्थन जुटाने पर नहीं, बल्कि कई सांसदों को वोटिंग से दूर रखने के विकल्प पर भी विचार किया है। शरद पवार की पार्टी के 8 सांसद एक महत्वपूर्ण फैक्टर साबित हो सकते हैं। यदि सभी राज्यों में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने का फॉर्मूला बनता है, तो एनसीपी का रुख बदल सकता है। इन 8 सांसदों का समर्थन मिल जाने पर एनडीए का आंकड़ा 332 तक पहुंच जाएगा, लेकिन फिर भी 28 वोट की आवश्यकता होगी।

डीएमके का प्रभाव

अब यहां से शुरू होता है डीएमके का फैक्टर। डीएमके के लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। अगर डीएमके समर्थन में वोट करती है, तो सरकार का आंकड़ा 354 तक पहुंच जाएगा। मतलब, 360 के बहुमत से सिर्फ 6 मतों की दूरी रह जाएगी। लेकिन यदि डीएमके अनुपस्थित रहती है, तो सदन में मौजूद सांसदों की संख्या घटेगी और बहुमत का आंकड़ा भी नीचे आएगा। इसलिए, डीएमके का फैसला इस सियासी समीकरण में बहुत महत्वपूर्ण है।

राज्यसभा का नंबर गेम

राज्यसभा में भी सरकार का नंबर गेम लोकसभा के मुकाबले अधिक सरल दिखाई दे रहा है। बंगाल की तीन सीटों पर उपचुनाव के बाद सरकार की संख्या 158 हो जाएगी। यानी दो-तिहाई बहुमत के लिए केवल 6 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी। यदि 12 सांसद मतदान से दूर रहते हैं, तो गणित और आसान हो सकता है। यहां भी डीएमके का समर्थन या अनुपस्थिति महत्त्वपूर्ण साबित होगी।

अंततः…

इस बार का मानसून सत्र सिर्फ संविधान संशोधन का नहीं, बल्कि नंबर गेम और राजनीतिक मैनेजमेंट की एक महाकुंभ परीक्षा बनकर उभर रहा है। सुप्रिया सुले के बयान के बाद, सरकार के सामने नंबर

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