जोन्नागिरी स्वर्ण खदान: क्या भारत की पहली निजी सोने की खदान कम कर पाएगी 72 अरब डॉलर का आयात

The CSR Journal Magazine

भारत की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन चालू, सोने के आयात के झंझट में कटौती!

आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित जोन्नागिरी स्वर्ण खदान (अब स्वर्णगिरी) स्वतंत्र भारत की पहली एकीकृत निजी सोने की खदान बन गई है, जिसका व्यावसायिक परिचालन The Hindu के अनुसार 24 जून, 2026 को राज्य के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा शुरू किया गया।

सोना अब खदान से मिलेगा, बाजार में असर

आजादी के बाद भारत में पहली बार किसी निजी कंपनी की स्वामित्व वाली गोल्ड माइन ने कमर्शियल परिचालन शुरू कर दिया है। यह माइन आंध्र प्रदेश में स्थित है और इसके जरिए देश में सोने का उत्पादन बढ़ाने की उम्मीद है। कंपनी ने पहले साल में लगभग 400 किलोग्राम सोने का उत्पादन करने का लक्ष्‍य रखा है। यह सोने का उत्पादन भारत की सोने की मांग को पूरा करने में सहायक हो सकता है।

निजी क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम

पहली बार किसी निजी क्षेत्र की कंपनी ने सोने की खदान को ऑपरेट करना शुरू किया है, जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इस प्रोजेक्ट के जरिए स्थानीय रोजगार भी बढ़ने की संभावना है। खदान के संचालन से न केवल सोने की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों को भी कई आर्थिक लाभ होंगे।

भविष्य की बढ़ी संभावना

इस खदान को जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया (GMSI) और डेक्कन गोल्ड माइंस लिमिटेड (DGML) द्वारा लगभग ₹405 करोड़ के निवेश से विकसित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में लगभग 400 किलोग्राम सोने के उत्पादन की उम्मीद है। अगले कुछ वर्षों में प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार के साथ इसे सालाना 1 टन (1,000 किलोग्राम) और दीर्घकालिक योजना में 2 टन तक बढ़ाने का लक्ष्य है। यह अत्याधुनिक ‘ओपन-पिट’ माइनिंग (खुली खदान) और ‘कार्बन-इन-लीच’ प्रसंस्करण प्रणाली से लैस है, जिससे यहीं पर सोने की छड़ें (Dore Bars) तैयार की जा सकेंगी।

सोने के आयात में कमी की उम्मीद

भारत हर साल बड़े पैमाने पर सोने का आयात करता है, जिससे हमारी व्यापारिक स्थिति पर असर पड़ता है। इस नई गोल्ड माइन के शुरू होने से यह उम्मीद की जा रही है कि सोने के आयात में कमी आएगी। सोने की घरेलू उत्पादन से बाजार में खुदरा कीमतें भी स्थिर रह सकती हैं। यही नहीं, इससे देश की खुद की गोल्ड प्रोडक्शन क्षमता भी बढ़ेगी।

अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्तर पर प्रभाव

यह खदान 2015 और 2021 के नए खनन संशोधनों के तहत निजी क्षेत्र के लिए खुली पहली बड़ी खदान है। इसकी सफलता देश के अन्य हिस्सों में दबे हुए स्वर्ण भंडारों की खोज के लिए निजी निवेशकों को आकर्षित करेगी। सोने के मूल्य पर 4% की रॉयल्टी तय की गई है। इससे आंध्र प्रदेश सरकार को पहले वर्ष में ₹57 करोड़ और पूर्ण उत्पादन पर लगभग ₹144 करोड़ सालाना का राजस्व मिलेगा।

स्थानीय लोगों के लिए फायदे

गोल्ड माइन का चालू होना स्थानीय लोगों के लिए कई अवसर खोलेगा। रोजगार के नए आयाम खुलेंगे और इससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सकता है। इस प्लांट से लगभग 700 लोगों (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही स्वर्णगिरी में एक स्थानीय ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित करने की भी योजना है। इसकी वजह से क्षेत्र में निवेश भी बढ़ेगा, जो विकास को गति देगा। स्थानीय समुदाय के फायदे के साथ, यह परियोजना राष्ट्रीय विकास में भी योगदान दे सकती है।

सोने के निर्माण में नवीनतम तकनीक का प्रयोग

इस खदान में सोने के उत्पादन के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह न केवल उत्पादन की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगा, बल्कि प्रक्रिया को भी अधिक कुशल और सुरक्षित बनाएगा। विशेषज्ञों की राय है कि नई तकनीक का उपयोग कर कम समय में अधिक सोना निकाला जा सकता है।

सरकारी रुख और सहयोग

इस परियोजना को भारतीय सरकार का भी समर्थन हासिल है। सरकार ने निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियों में बदलाव किए हैं ताकि नए निवेश आकर्षित किए जा सकें। ऐसे में, यह परियोजना न केवल सोने के लिए अपितु भारतीय खनन उद्योग के लिए भी एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

आगे की संभावनाएं

इस गोल्ड माइन के चालू होने के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि कैसे यह भारत की सोने की बाजार में बदलाव लाता है। इसके अलावा, अगले साल के उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद यह देखने की आवश्यकता होगी कि क्या अन्य निजी कंपनियां भी इस क्षेत्र में प्रवेश करने को प्रेरित होंगी।

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