कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बनाए 56 लाख फॉलोअर्स
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) वास्तव में कोई आधिकारिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक व्यंग्यात्मक (satirical) डिजिटल आंदोलन है। इस वर्चुअल पार्टी ने अपने 5-सूत्रीय एजेंडे में महिलाओं के लिए संसद और कैबिनेट दोनों में 50% आरक्षण देने का वादा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस मुहिम के फॉलोअर्स और सदस्यों की संख्या बहुत तेजी से लाखों में पहुँच गई है।
सोशल मीडिया पर धूम मचाए CJP
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने महज 5 दिन में इंस्टाग्राम पर 56 लाख से ज्यादा और X (पूर्व में ट्विटर) पर करीब 1 लाख 21 हजार फॉलोअर्स जुटाए हैं। इनमें से 30 लाख लोग सिर्फ एक ही दिन में जुड़ गए। यह पार्टी महाराष्ट्र के अभिजीत दिपके द्वारा बनाई गई है और इसका मूल नारा है- ‘सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी’। सोशल मीडिया पर इस प्लेटफार्म का तेजी से विस्तार हो रहा है।
CJP के पीछे की कहानी
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ से की है। हालांकि बाद में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के लिए थी, लेकिन तब तक युवाओं का गुस्सा भड़क उठा। इसी बयान के बाद अभिजीत ने सोशल मीडिया पर यह प्लेटफॉर्म बनाने का निर्णय लिया। इसके बाद का दृश्य अद्भुत था, जब लाखों लोग उनसे जुड़ना शुरू कर दिए। अभिजीत ने पार्टी का लोगो भी जारी किया है और चार प्रमुख मुद्दों पर मैनिफेस्टो प्रकाशित किया है।
अभिजीत दीपके ने चलाया आंदोलन
इस आंदोलन की शुरुआत 16 मई 2026 को अभिजीत दीपके ने की, जो एक सोशल मीडिया स्ट्रेटेजिस्ट हैं और वर्तमान में बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहे हैं। मजाकिया तौर पर इस ग्रुप से जुड़ने के लिए व्यक्ति का बेरोजगार, आलसी, 11 घंटे से ज्यादा फोन चलाने वाला (chronically online) और बेहतरीन तरीके से दुखड़ा रोने (rant professionally) में माहिर होना जरूरी बताया गया है। महुआ मोइत्रा जैसे कुछ मौजूदा सांसदों ने भी सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड का समर्थन किया है। भले ही यह एक इंटरनेट मजाक (Meme Trend) के रूप में शुरू हुआ हो, लेकिन यह देश के युवाओं में पेपर लीक और बेरोजगारी को लेकर छिपे गहरे गुस्से और निराशा को दर्शा रहा है।
पार्टी का 5-सूत्रीय मैनिफेस्टो (घोषणापत्र)
इस व्यंग्यात्मक आंदोलन के घोषणापत्र में युवाओं और सिस्टम से जुड़े गंभीर मुद्दों को मजाकिया लहजे में उठाया गया है। महिलाओं को केवल 33% नहीं, बल्कि संसद और कैबिनेट की सभी सीटों पर 50% आरक्षण दिया जाए। रिटायरमेंट के बाद किसी भी चीफ जस्टिस (CJI) को राज्यसभा सीट या सरकारी पद न दिया जाए। पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों के चुनाव लड़ने पर 20 साल का प्रतिबंध हो। वैध वोट डिलीट होने पर चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ सख्त कार्रवाई (UAPA के तहत) की जाए। बड़े कॉर्पोरेट घरानों (जैसे अडानी-अंबानी) के मालिकाना हक वाले मीडिया चैनलों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
महिलाओं के लिए विशेष आरक्षण
CJP ने अपने मैनिफेस्टो में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण देने का वादा किया है। पार्टी का मानना है कि यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने और समाज में समानता लाने में मदद करेगा। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो कई युवा मतदाताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
अभिजीत की पृष्ठभूमि
अभिजीत ने 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में काम किया है और अब वह अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में मास्टर डिग्री कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें CJP का आइडिया आया। अभिजीत ने अपनी बात रखते हुए कहा, ‘मैं एक्स पर सीजेई का बयान देख रहा था, और मैंने सोचा कि अगर सब कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा।’ इसके बाद युवाओं को एकजुट होने का आइडिया आया।
सामाजिक मुद्दों पर जोर
CJP ने न केवल युवाओं को एकजुट करने का प्रयत्न किया है, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया है। पार्टी ऐसी आवाजों को स्वीकार करती है जो सिस्टम की आलोचना करती हैं। इसे लेकर अभिजीत ने कहा कि यह पार्टी उन सभी युवाओं के लिए है जो अपने विचारों को व्यक्त करना चाहते हैं।
साक्षात्कार में अभिजीत की बात
एक साक्षात्कार में, अभिजीत ने कहा कि युवाओं ने उन्हें बताया कि वे एक प्लेटफार्म चाहते हैं जहां वे अपनी आवाज उठा सकें। ऐसे में CJP का गठन हुआ, जो केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन भी है। इसके माध्यम से युवा जन आंदोलन को बढ़ावा देने और सच्चाई के लिए खड़े होने का प्रयास करेंगे।
CJI का विवादित बयान
सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताते हुए कहा कि कुछ युवा ऐसे होते हैं जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और सिस्टम पर हमला करते हैं। इस बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है और युवकों को और भी ज्यादा प्रेरित किया है कि वे अपने विचारों के लिए संगठित हों।
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