राजस्थान के भरतपुर में मानव तस्करी का सनसनीखेज खुलासा नाबालिग को चार राज्यों में घुमाया, ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह के तार आए सामने

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश से लापता हुई एक नाबालिग की कहानी ने मानव तस्करी, देह व्यापार, यौन शोषण और कथित ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बाल कल्याण समिति की जांच में सामने आया है कि नाबालिग को दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, मथुरा और राजस्थान के भरतपुर तक ले जाया गया। इस दौरान उससे घरेलू काम कराने, देह व्यापार में धकेलने और फर्जी पहचान के जरिए विवाह करवाकर लोगों से धन उगाही करने के आरोप सामने आए हैं। मामले में पुलिस जांच जारी है।

पिता की प्रताड़ना से घर छोड़ा, शुरू हुआ दर्दनाक सफर

बाल कल्याण समिति के अनुसार उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक नाबालिग 3 फरवरी को घर छोड़कर चली गई थी। उसके पिता द्वारा 5 फरवरी को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। नाबालिग ने जांच में बताया कि वह पिता की प्रताड़ना से परेशान होकर नौकरी की तलाश में घर से निकली थी। दिल्ली पहुंचने पर उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जिसने मदद का भरोसा देकर उसे अपने साथ रखा। बाद में उसे जम्मू भेज दिया गया, जहां कुछ समय तक उससे घरेलू कार्य कराए गए। समिति की रिपोर्ट के अनुसार बाद में वह एक होटल में पहुंची, जहां उससे बर्तन साफ कराने के साथ-साथ रात में देह व्यापार कराने के गंभीर आरोप सामने आए। कुछ समय बाद वह वहां से भाग निकली और दोबारा दिल्ली पहुंच गई।

मथुरा में नशीला पदार्थ देकर किया गया यौन शोषण

दिल्ली लौटने के बाद नाबालिग की मुलाकात एक युवक से हुई, जो उसे मथुरा ले गया। वहां दोनों किराए के कमरे में रहने लगे। पीड़िता के अनुसार युवक उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाता था और उसके साथ दुष्कर्म करता था। वह बाहर जाते समय कमरे को बाहर से बंद कर देता था। घटना ने नया मोड़ तब लिया जब एक दिन युवक अपना मोबाइल कमरे में छोड़ गया। उसी मोबाइल पर आए एक फोन कॉल के जरिए नाबालिग की बातचीत अंजलि नामक महिला से हुई। नाबालिग ने अपनी पूरी आपबीती महिला को बताई। इसके बाद वह महिला उससे मिलने पहुंची और कथित रूप से उसे एक अन्य महिला के हवाले कर दिया गया।

भरतपुर में बदली पहचान, बनाया गया ‘लुटेरी दुल्हन’ का हिस्सा

जांच में सामने आया कि झारखंड निवासी एक महिला नाबालिग को राजस्थान के भरतपुर जिले के खेड़ली मोड़ क्षेत्र में लेकर आई। यहां उसकी पहचान बदल दी गई और नया नाम दिया गया। इसके बाद उसे एक युवक से विवाह करने के लिए तैयार किया गया। समिति के अनुसार नाबालिग को समझाया गया कि कुछ दिन ससुराल में रहने के बाद गहने और सामान लेकर वापस लौट आना है। विवाह के बाद गिरोह ने एक नई साजिश रची। महिला ने थाने में नाबालिग की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी और बाद में गिरोह के सदस्य ससुराल पक्ष के लोगों को यह कहकर डराने लगे कि उन्होंने नाबालिग से शादी कर कानून का उल्लंघन किया है। कार्रवाई के भय का फायदा उठाकर कथित रूप से धन उगाही की गई और नाबालिग को वहां से वापस ले जाया गया।

फर्जी दस्तावेजों से खुला राज, पुलिस जांच में जुटी

मामले की जानकारी मिलने पर बाल कल्याण समिति ने पुलिस को सूचित किया। बाद में संबंधित महिला नाबालिग को अपनी बेटी बताकर उसे अपने साथ ले जाने समिति के सामने पहुंची। संदेह होने पर समिति ने महिला द्वारा प्रस्तुत आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र की जांच करवाई। सोशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट (एसआईआर) में खुलासा हुआ कि जिन दस्तावेजों के आधार पर महिला दावा कर रही थी, वे किसी दूसरी लड़की के थे, जो अपने वास्तविक माता-पिता के साथ रह रही थी। इस खुलासे के बाद फर्जी पहचान, मानव तस्करी और संगठित अपराध के शक को बल मिला।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजाराम भूतौली ने बताया कि प्रारंभिक जांच में लड़कियों की तस्करी, देह व्यापार और ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह जैसे संगठित अपराधों के संकेत मिले हैं। मामले में सेवर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है और पुलिस विभिन्न राज्यों में फैले इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।

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