जंतर मंतर लाठीचार्ज घटना के बाद अचानक बढ़ी मांग, सरकार की सुरक्षा चिंताओं और डिजिटल अधिकारों की बहस के बीच चर्चा में आया Bitchat
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और उसके बाद कई बार मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के बीच एक नया मोबाइल एप Bitchat पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्टों के अनुसार, 24 जुलाई तक पिछले 30 दिनों में दुनिया भर में हुए 1.2 लाख से अधिक Bitchat डाउनलोड्स में से लगभग 53 प्रतिशत डाउनलोड भारत से हुए। वहीं कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में 17 से 23 जुलाई के बीच वैश्विक डाउनलोड्स में भारत की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से भी अधिक बताई गई है। इस तेज़ उछाल ने न केवल तकनीकी विशेषज्ञों बल्कि सरकार, साइबर सुरक्षा एजेंसियों और डिजिटल अधिकारों से जुड़े संगठनों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। एक ओर इसे इंटरनेट बंद होने की स्थिति में संवाद का वैकल्पिक माध्यम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियां इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जता रही हैं।
क्या है Bitchat?
Bitchat एक ब्लूटूथ मेष (Bluetooth Mesh) आधारित विकेंद्रीकृत मैसेजिंग एप है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मोबाइल इंटरनेट, वाई-फाई या पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क के बिना भी काम कर सकता है। ऐप में आसपास मौजूद स्मार्टफोन आपस में ब्लूटूथ के जरिए जुड़कर संदेशों को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक पहुंचाते हैं। इस तरह प्रत्येक फोन नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है और संदेश कई डिवाइसों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। ऐप के डेवलपर्स का दावा है कि इसमें किसी फोन नंबर, रजिस्ट्रेशन या केंद्रीय सर्वर की आवश्यकता नहीं होती और संदेश स्थानीय स्तर पर एन्क्रिप्टेड रहते हैं।
जंतर-मंतर की घटना के बाद क्यों बढ़े डाउनलोड?
20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और उसके बाद इंटरनेट सेवाओं में व्यवधान की खबरों के बीच प्रदर्शनकारियों और आम लोगों के बीच ऐसे प्लेटफॉर्म की तलाश बढ़ी जो इंटरनेट के बिना भी संचार की सुविधा दे सके। इसी दौरान Bitchat का नाम तेजी से सामने आया और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे डाउनलोड कर इसकी कार्यप्रणाली को आजमाना शुरू किया। मार्केट इंटेलिजेंस कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार, 19 जुलाई के बाद भारत में Bitchat डाउनलोड्स में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक कुछ दिनों के भीतर भारत में डाउनलोड्स 32 गुना तक बढ़ गए थे और दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
भारत बना सबसे बड़ा बाजार
हालिया रिपोर्टों के अनुसार 24 जुलाई तक पिछले 30 दिनों में हुए वैश्विक डाउनलोड्स में भारत की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत रही। इसका अर्थ है कि Bitchat की वैश्विक लोकप्रियता को सबसे बड़ा सहारा भारतीय उपयोगकर्ताओं से मिला। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरनेट बंद होने की आशंका, वैकल्पिक संचार माध्यमों में बढ़ती रुचि और सोशल मीडिया पर वायरल चर्चाओं ने इस बढ़ोतरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सरकार की बढ़ी चिंता
Bitchat की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही केंद्र सरकार ने भी इस पर गंभीर चिंता जताई। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने GitHub से ऐप के सोर्स कोड से जुड़े रिपॉजिटरी हटाने या उनकी पहुंच सीमित करने का निर्देश दिया। सरकार का कहना है कि इस प्रकार के विकेंद्रीकृत प्लेटफॉर्म कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए निगरानी और जांच को कठिन बना सकते हैं तथा इनका इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों, संगठित अपराध समूहों या अन्य असामाजिक तत्वों द्वारा किया जा सकता है। सरकारी नोटिस में यह भी कहा गया कि ऐसे प्लेटफॉर्म केंद्रीय सर्वर पर निर्भर नहीं होते, जिससे उपयोगकर्ताओं की पहचान और संदेशों की वैधानिक निगरानी बेहद कठिन हो जाती है।
जैक डोर्सी का दावा
Bitchat के निर्माता और ट्विटर (अब X) के सह-संस्थापक जैक डोर्सी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि भारत सरकार ने GitHub को Bitchat का कोड हटाने का नोटिस भेजा है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी तकनीक पसंद नहीं है जो इंटरनेट बंद होने की स्थिति में भी संचार संभव बनाती है। हालांकि सरकार ने इस पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया गया।
डिजिटल अधिकार बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
Bitchat को लेकर अब एक नई बहस शुरू हो गई है। डिजिटल अधिकारों से जुड़े कई संगठन मानते हैं कि इंटरनेट बंद होने की स्थिति में नागरिकों के पास संवाद का वैकल्पिक माध्यम होना चाहिए। उनका तर्क है कि केवल सोर्स कोड हटाने से ऐप पहले से इंस्टॉल किए गए उपकरणों पर काम करना बंद नहीं करेगा और इससे पारदर्शिता भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई ऐसा प्लेटफॉर्म पूरी तरह गुमनाम और बिना केंद्रीय नियंत्रण के संचालित हो तो कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
कैसे करता है काम?
Bitchat का पूरा नेटवर्क ब्लूटूथ मेष तकनीक पर आधारित है। यदि एक उपयोगकर्ता सीधे दूसरे तक नहीं पहुंच सकता तो बीच में मौजूद अन्य डिवाइस संदेश को आगे बढ़ा देते हैं। इस प्रक्रिया से सीमित दूरी के भीतर एक अस्थायी संचार नेटवर्क तैयार हो जाता है। हालांकि इसकी भी सीमाएं हैं। यह लंबी दूरी पर तभी प्रभावी होता है जब बीच में पर्याप्त संख्या में सक्रिय उपयोगकर्ता मौजूद हों। इसलिए इसका उपयोग मुख्य रूप से भीड़, सार्वजनिक आयोजनों या सीमित क्षेत्र में अधिक प्रभावी माना जाता है।
क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐप में एन्क्रिप्शन जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को पूरी तरह जोखिम-मुक्त नहीं माना जा सकता। उपयोगकर्ताओं को केवल आधिकारिक स्रोतों से ऐप डाउनलोड करना चाहिए और व्यक्तिगत या संवेदनशील जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
ऑफलाइन मैसेजिंग ऐप बना नई बहस का केंद्र
Bitchat को लेकर आने वाले दिनों में कानूनी और तकनीकी बहस और तेज होने की संभावना है। यदि सरकार की ओर से GitHub या अन्य प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई आगे बढ़ती है तो यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, डिजिटल गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा बन सकता है। वहीं यदि इंटरनेट प्रतिबंधों के दौरान ऐसे ऑफलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ता है तो भविष्य में इन तकनीकों के नियमन को लेकर नई नीतियों की आवश्यकता भी महसूस की जा सकती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 20 जुलाई की घटनाओं के बाद Bitchat केवल एक तकनीकी ऐप नहीं रहा, बल्कि भारत में डिजिटल संचार, इंटरनेट प्रतिबंध, निजता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी व्यापक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
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