AI नहीं छीन रहा नौकरी, बदल रहा है खेल: LinkedIn की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा

The CSR Journal Magazine

AI से नहीं, बदलाव से डरिए: रोजगार की असली तस्वीर क्या है?

तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर यह धारणा तेजी से फैल रही है कि यह इंसानों की नौकरियां छीन रहा है। लेकिन हाल ही में LinkedIn द्वारा जारी आंकड़ों ने इस धारणा को चुनौती दी है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में AI सीधे तौर पर नौकरियों को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि कार्य करने के तरीकों में बदलाव ला रहा है। यह निष्कर्ष उस समय सामने आया है जब पूरी दुनिया में रोजगार को लेकर असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

छँटनी की वजह AI नहीं

LinkedIn के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद से वैश्विक स्तर पर भर्ती में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही, विभिन्न क्षेत्रों में हजारों कर्मचारियों की छंटनी भी लगातार देखने को मिल रही है। इसके बावजूद, कंपनी का स्पष्ट कहना है कि इस गिरावट का मुख्य कारण AI नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक परिस्थितियां हैं। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में जो बदलाव हो रहा है, वह तकनीकी से अधिक आर्थिक कारकों से प्रभावित है।

योग्यता में हो रहा बदलाव

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि एक औसत नौकरी के लिए आवश्यक कौशलों में लगभग 25 प्रतिशत तक बदलाव आ चुका है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह बदलाव 65 से 70 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इसका अर्थ यह है कि नौकरी खत्म नहीं हो रही, बल्कि उसके लिए जरूरी योग्यताएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में कर्मचारियों के लिए लगातार नई स्किल्स सीखना अनिवार्य हो गया है।

AI से मिल रहा रचनात्मक समय

AI की भूमिका को समझना भी आवश्यक है। यह तकनीक दोहराए जाने वाले और समय लेने वाले कार्यों को स्वचालित बनाती है, जिससे कार्यक्षमता बढ़ती है। उदाहरण के तौर पर, डेटा प्रोसेसिंग, ग्राहक सेवा और रिपोर्ट तैयार करने जैसे काम अब AI के जरिए तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। इससे कर्मचारियों को अधिक रचनात्मक और विश्लेषणात्मक कार्यों पर ध्यान देने का अवसर मिलता है, जो उनकी उत्पादकता को बढ़ाता है।

बढ़ती महंगाई है वजह

भर्ती में गिरावट के पीछे आर्थिक कारणों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर मंदी, बढ़ती ब्याज दरें और निवेश में कमी ने कंपनियों को खर्च घटाने के लिए मजबूर किया है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान कई कंपनियों ने जरूरत से ज्यादा भर्ती कर ली थी, जिसका असर अब दिख रहा है। ऐसे में कंपनियां नई नियुक्तियों को लेकर सतर्क रुख अपना रही हैं।

भर्ती में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

हालांकि, इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव युवा वर्ग और नए नौकरी तलाशने वालों पर पड़ा है। एंट्री-लेवल नौकरियों में कमी आई है और कंपनियां अब अधिक अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके साथ ही, भर्ती प्रक्रिया में AI आधारित स्क्रीनिंग के उपयोग से प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ गई है, जिससे फ्रेशर्स के लिए नौकरी पाना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

AI से पैदा हुईं लाखों नौकरियां

दूसरी ओर, AI ने नई संभावनाओं के द्वार भी खोले हैं। AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग विशेषज्ञ और साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल जैसी नई नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। विभिन्न अनुमानों के अनुसार, AI तकनीक ने वैश्विक स्तर पर लाखों नई नौकरियां भी पैदा की हैं। यह दर्शाता है कि तकनीक जहां कुछ अवसरों को समाप्त करती है, वहीं नए अवसर भी उत्पन्न करती है।

परंपरा के साथ आधुनिक कौशल ज़रूरी

नीतिगत स्तर पर भी इस परिवर्तन को समझना बेहद जरूरी है। शिक्षा प्रणाली को अब पारंपरिक ज्ञान के बजाय कौशल आधारित बनाना होगा। साथ ही, कर्मचारियों के लिए री-स्किलिंग और अप-स्किलिंग की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। सरकारों और संस्थानों को मिलकर ऐसे कार्यक्रम तैयार करने होंगे, जो लोगों को बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप ढाल सकें।

AI चुनौती नहीं, बल्कि अवसर

अंततः यह स्पष्ट है कि AI को लेकर जो डर पैदा किया जा रहा है, वह पूरी तरह सही नहीं है। असली चुनौती AI नहीं, बल्कि तेजी से हो रहा बदलाव है। जो लोग और संस्थाएं इस बदलाव को स्वीकार कर उसे अपनाने के लिए तैयार हैं, वही भविष्य में सफल होंगे। इसलिए जरूरत इस बात की है कि हम तकनीक से डरने के बजाय उसे समझें और अपने विकास का माध्यम बनाएं।

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