बेंगलुरु कॉर्पोरेट डे-केयर मामला: प्रताड़ना के बाद बच्चों के मन में बैठा गहरा डर

The CSR Journal Magazine

बेंगलुरु डे-केयर मामला: बच्चों में डर, कराहते हैं देखभाल करने वालों की आवाज सुनकर

बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड (Brookefield) स्थित कैपजेमिनी (Capgemini) कैंपस के कॉर्पोरेट डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ अमानवीय और क्रूर व्यवहार का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यह घटना तब उजागर हुई जब सेंटर में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी द्वारा बनाए गए वीडियो वायरल हो गए, जिसमें 2 से 3 साल तक के मासूम बच्चों को प्रताड़ित करते और डराते हुए देखा गया।

मासूम बच्चों के साथ की हैवानियत

वायरल हुए सबूतों और पुलिस जांच के आधार पर, देखभाल करने वाली (केयरगिवर) महिलाओं पर बच्चों को वॉशिंग मशीन में डालने, टॉयलेट जेट स्प्रे से पानी पिलाने, और रोने पर बाथरूम में बंद करने जैसे संगीन आरोप लगे हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी केयरटेकर विजयलक्ष्मी (55) सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है और पांच महिला कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और किशोर न्याय (JJ) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है

बच्चों में बढ़ा डर का अहसास

बेंगलुरु के एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ हुई बदसलूकी के मामले में नया खुलासा सामने आया है। हाल ही में वायरल हुए वीडियो में एक बच्ची के साथ की गई बर्बरता ने सभी को चौंका दिया। बच्ची की मां ने बताया कि उनके बच्चे के मन में डर घर कर गया है। वह बाथरूम जाने से मना करती है और रोने लगती है। इस सच्चाई से पता चलता है कि डे-केयर सेंटर में दाखिल होने के दो महीने बाद ही यह बदलाव आ गया था।

मानसिक आघात में बच्चे

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह की प्रताड़ना और डराने-धमकाने वाली घटनाएं छोटे बच्चों के कोमल दिमाग पर गहरा और स्थायी असर छोड़ सकती हैं। प्रताड़ित किए गए बच्चों में गहरा डर बैठ गया है। बच्चों में अपनी देखभाल करने वालों या डे-केयर के कर्मचारियों की आवाज सुनकर कांपने और डरने के लक्षण देखे जा रहे हैं। कुछ माता-पिता ने पुलिस को बताया कि उनके बच्चों में वॉशरूम या बाथरूम के प्रति इतना खौफ पैदा हो गया है कि वे वहां जाने से बुरी तरह डरते हैं और रोने लगते हैं।

खौफजदा बच्चे और माता-पिता की चिंताएं

एक अन्य तीन साल के बच्चे के माता-पिता ने भी उसी तरह की बातें साझा कीं। उनके बेटे में भी बदलाव दिखा, वह कुछ देखभाल करने वालों की आवाज सुनकर कांप जाता था। यह स्थिति तब सामने आई जब 1 जुलाई को कैपजेमिनी के एचएएल कैंपस स्थित डे-केयर के बारे में disturbing वीडियो वायरल हुआ। इसमें बच्चों को टॉयलेट में बंद करने और अन्य तरह के भारी शोषण के प्रमाण मिले थे।

पुलिस का संज्ञान और कार्रवाई

पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पांच महिला केयरगिवर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिनमें से एक को गिरफ्तार भी किया गया है। डीसीपी सैदुलु अडावथ ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है, जिसमें प्रोफेशनल्स के बच्चों के साथ बुरा व्यवहार किया गया। पुलिस अब यह भी जांच रही है कि क्या डे-केयर का संचालन सीधे कैपजेमिनी द्वारा किया जा रहा था या कोई बाहरी एजेंसी इसकी जिम्मेदारी संभाल रही थी।

बाल अधिकार आयोग की कार्रवाई

कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और अपने स्तर पर भी जांच शुरू की है। एचएएल कैंपस के प्रोबेशन अधिकारी, तिलकेश कुमार ने बताया कि उन्हें लंबे समय से बच्चों के साथ गलत व्यवहार की आशंका थी, लेकिन हाल में सामने आए वीडियो ने इस पर पूरी तरह से रौशनी डाली।

कॉर्पोरेट प्रतिक्रिया और सुरक्षा पर सवाल

घटना के बाद कैपजेमिनी प्रबंधन ने कैंपस के उस डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी द्वारा प्रभावित परिवारों को काउंसलिंग (Counselling) हेल्पलाइन और फ्लेक्सिबल वर्क अरेंजमेंट की सुविधा दी जा रही है। इस घटना ने कार्यस्थलों पर मौजूद डे-केयर सुविधाओं की सुरक्षा, पारदर्शी निगरानी और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैपजेमिनी की तरफ से सख्त कदम

कैपजेमिनी ने इस घटना के बाद अपने डे-केयर सेंटर को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने कहा कि कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है। कैपजेमिनी एक बड़ी IT कंपनी है, जो सॉफ्टवेयर, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसी सेवाएं प्रदान करती है।

डे-केयर सेंटर का महत्व

डे-केयर सेंटर छोटे बच्चों की देखभाल और शुरुआती शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र होते हैं। बड़े शहरों में दोनों माता-पिता का नौकरी करना सामान्य है, ऐसे में वे अपने बच्चों को डे-केयर में छोड़ते हैं। इसके बदले में माता-पिता को हर महीने एक निर्धारित फीस चुकानी होती है। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को डे-केयर की सुविधाएं भी देती हैं, जैसे कैपजेमिनी।

कानूनी विकल्प और सावधानियाँ

अगर किसी डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ गलत व्यवहार का मामला सामने आता है, तो माता-पिता को तुरंत पुलिस थाने में शिकायत करनी चाहिए। साथ ही, संबंधित बाल सुरक्षा अधिकारियों या बाल कल्याण समितियों से भी संपर्क करना जरूरी है। बच्चे की मेडिकल जांच करवाना और कानूनी सलाह लेना भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, माता-पिता को डे-केयर सेंटर की नियमित निगरानी करना जरूरी है।

आगे की जांच और नियम

घटना की गंभीरता को देखते हुए, कर्नाटक सरकार और महिला बाल विकास आयोग (SCPCR) ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है। सरकार द्वारा डे-केयर सेंटरों के लिए अनिवार्य मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) और सीसीटीवी (CCTV) की सख्त निगरानी जैसे नियमों को लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos