पंजाब बनेगा रोड सेफ्टी हब: AI, ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक से सड़क सुरक्षा में सुधार

The CSR Journal Magazine
जालंधर में 27 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सड़क सुरक्षा फोर्स (SSF) का औपचारिक शुभारंभ किया। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पंजाब में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए राज्य की सड़कों पर सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस बल का गठन विशेषतौर पर उच्च दुर्घटना दर वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके किया गया है।

ड्रोन और सैटेलाइट तकनीक का होगा उपयोग

पंजाब पुलिस ने अपनी सड़क सुरक्षा योजना में नई तकनीकों को शामिल किया है। एसएसएफ की टीमें ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी और AI-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियों का उपयोग करके दुर्घटनाओं की तत्काल जानकारी प्राप्त करने में सक्षम होंगी। यह पहल भारत में एक अनूठा मॉडल स्थापित करेगी, जो भारत के पहले 3डी पुलिस बल के रूप में कार्य करेगी।

सड़क सुरक्षा पर जोर

फरवरी 2024 से जनवरी 2026 के बीच, एसएसएफ ने 43,983 सड़क दुर्घटनाओं में पहुंचकर 47,386 व्यक्तियों की मदद की। इनमें से 19,973 लोगों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया और 27,413 घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। यह बल गंभीर आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए जाना जाएगा।

हाई-टेक वाहनों से सुसज्जित

एसएसएफ के पास 144 हाई-टेक वाहन हैं और 1,600 से अधिक विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मी कार्यरत हैं। इनमें से लगभग 28 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मी हैं। टीमों को राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के 4,100 किलोमीटर क्षेत्र में तैनात किया गया है। ये जवान दुर्घटनाओं पर औसतन 6 से 10 मिनट में पहुंचते हैं, जो वैश्विक मानकों के अनुसार तेज है।

प्राथमिक चिकित्सा का एंबुलेंस से पहले

अस्पताल में चिकित्सा सहायता पहुँचने से पहले एसएसएफ का लक्ष्य दुर्घटना पीड़ितों तक 6 से 8 मिनट में पहुंचना है। ये कर्मी प्राथमिक उपचार की उपलब्धता के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। एसएसएफ का काम केवल सड़क सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की सहायता में भी सक्रिय है।

फेज़-II के विस्तार की योजना, 7E फ्रेमवर्क के अंतर्गत यातायात प्रबंधन

फेज़-II के अंतर्गत एसएसएफ का कार्यक्षेत्र 5,500 किलोमीटर से बढ़ाकर 6,000 किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के अंतर्गत सैटेलाइट डेटा, AI, ड्रोन और जियोस्पेशियल तकनीकों का समावेश किया जाएगा। एसएसएफ की नीतियों में 7E फ्रेमवर्क—इंजीनियरिंग, एनफोर्समेंट, एजुकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स, इमरजेंसी केयर, एंगेजमेंट और इवैल्यूएशन—शामिल हैं। ये सभी तत्व मिलकर यातायात प्रबंधन में नए बदलाव लाने का संकेत देते हैं।

अन्य राज्यों से बेहतर तकनीकी दृष्टिकोण

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में सड़क सुरक्षा को लेकर अन्य राज्यों की तुलना में अधिक प्रगति हुई है। एसएसएफ की संरचना और तकनीकी दृष्टिकोण मौजूदा योजनाओं में महत्वपूर्ण सुधार लाई है। यह सड़क सुरक्षा और तकनीकी प्रबंधन में एक नया मापदंड स्थापित करेगा।

विशेष प्रशिक्षण और प्राथमिकता

एसएसएफ कर्मियों को प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इनकी प्राथमिकता केवल लोगों की जान बचाना है, जो इन्हें सामान्य पुलिस कार्यों से अलग करता है।

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