अयोध्या राम मंदिर दान विवाद: चंपत राय ने PMO को क्यों नहीं दिया खर्च का ब्यौरा?

The CSR Journal Magazine

राम मंदिर के दान-खर्च का हिसाब देने से ट्रस्ट ने किया इनकार

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को दान और वित्तीय लेनदेन का हिसाब देने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस फैसले के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की चल रही जांच का हवाला दिया है।

देशभर में चर्चा का विषय बने दान की गड़बड़ी

अयोध्या का राम मंदिर इस समय देश में चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। मंदिर को मिले दान व चंदों में कथित गड़बड़ियों के आरोप लग रहे हैं। इस मुद्दे पर हाल ही में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने अयोध्या प्रशासन से स्पष्ट आदेश दिए थे कि मंदिर ट्रस्ट को अपने खर्च और दान राशि का हिसाब देना चाहिए।

SIT जांच का हवाला देते हुए ट्रस्ट का इनकार

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने PMO के आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया है। ट्रस्ट ने कहा कि वर्तमान में एक विशेष जांच टीम (SIT) जांच कर रही है, इसलिए वे अपनी फंडिंग और खर्चों का ब्योरा नहीं दे सकते। यह स्थिति सवाल उठाती है कि क्या वाकई में ट्रस्ट के पास कोई सही रिकॉर्ड नहीं है। चंपत राय का कहना है कि दान और खर्चों से जुड़े वित्तीय दस्तावेज वर्तमान में SIT के पास जांच के अधीन हैं, इसलिए इस समय उनकी जानकारी सार्वजनिक या साझा नहीं की जा सकती।  अयोध्या मंदिर में चंदे और चढ़ावे में कथित हेराफेरी व चोरी की शिकायतों के बाद PMO ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन के माध्यम से ट्रस्ट से वित्तीय ब्यौरा मांगा था।

राम मंदिर ट्रस्ट का बचाव या गड़बड़ी का सबूत?

ट्रस्ट के इस निर्णय ने कई लोगों को चिंतित कर दिया है। अयोध्या के भक्त और सामान्य लोग जानना चाहते हैं कि आखिर इन चंदों का किया क्या जा रहा है। हालाँकि ट्रस्ट ने अपनी भूमिका को स्पष्ट करने के लिए कोई ठोस जानकारी प्रस्तुत नहीं की है। इससे ट्रस्ट की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि और SIT का गठन

अयोध्या के पूर्व सपा विधायक पवन पांडे और विपक्ष के अन्य नेताओं ने राम मंदिर की दान पेटियों से नकदी गिनती में धांधली और बहुमूल्य सोना-चांदी गायब होने के आरोप लगाए थे। सार्वजनिक दबाव और पारदर्शिता के लिए खुद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जांच का अनुरोध किया था। इसके बाद 13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई में 3 सदस्यीय SIT का गठन किया। SIT ने मंदिर परिसर का दौरा कर और लगभग 150 लोगों (बैंक कर्मियों, टीसीएस और ट्रस्ट कर्मचारियों) से पूछताछ कर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है।

संजय सिंह ने SIT को सौंपे अयोध्या में जमीन खरीद की गड़बड़ियों के दस्तावेज

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने अयोध्या में जमीन खरीद में हुई गड़बड़ियों के दस्तावेज कमिश्नर विजय विश्वास पंत को सौंपे हैं। उन्होंने इसे “बहुत बड़ा भ्रष्टाचार और घोटाला” बताया और मामले की जांच के लिए SIT को सबूत भी दिए हैं। संजय सिंह ने कहा कि अयोध्या की जमीनों की खरीद-फरोख्त की जांच बेहद जरूरी है, और इस बारे में कुछ कदम उठाए जाने चाहिए। संजय सिंह ने अयोध्या में दान पत्र चोरी के मामले में कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस मामले में रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि श्री राम की पादुका और हार भी चोरी हो चुके हैं। इसके अलावा, चढ़ावे में हुई चोरी के कुछ पैसों की बरामदगी की गई है।

SIT की कार्रवाई का आश्वासन

संजय सिंह ने कहा कि SIT के अध्यक्ष ने उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक FIR क्यों नहीं दर्ज की गई, यह वाकई में जांच का विषय है। उन्होंने चर्चा के दौरान साफ तौर पर कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है और इसकी जांच अत्यंत आवश्यक है। इस दौरान, संजय सिंह ने अयोध्या में जमीन खरीद के मामले में सभी सबूत SIT को सौंपते हुए इसे गंभीर मुद्दा बताया।

अयोध्या की धार्मिक गरिमा पर असर

राम मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक भी है। ऐसे में जब इस पर ऐसी विवादास्पद बातें सामने आती हैं, तो एक संवेदनशील मुद्दा बन जाता है। भक्त और श्रद्धालु चाहते हैं कि राम मंदिर से जुड़ी सभी वित्तीय गतिविधियों की पूरी जानकारी हो, ताकि उनके विश्वास को बनाए रखा जा सके। इस मामले में SIT की जांच उम्मीद जगाती है, लेकिन ट्रस्ट का इनकार लोगों में संशय पैदा कर रहा है। अयोध्या प्रशासन अब क्या कदम उठाएगा, यह देखना जरूरी होगा।

राजनीतिक घमासान और सुप्रीम कोर्ट का रुख

मामले की कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, लेकिन देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है, जिसमें मामले की CBI जांच और कैग (CAG) से स्पेशल फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेता लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहे हैं और जांच में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगा रहे हैं।

आगे की राह क्या होगी?

अब जबकि SIT जांच चल रही है, इस सबके बीच यह देखना होगा कि ट्रस्ट कब तक पीएमओ के आदेशों का पालन करता है। क्या ट्रस्ट अपने देनदारी को स्वीकार करेगा या SIT की जांच में कुछ नए तथ्यों का सामने आना संभव है? इस पर सभी की निगाहें हैं। SIT की अंतिम रिपोर्ट आने और अदालती कार्यवाहियों के बाद ही इस मामले की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो पाएगी।

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