Arun Kumar Tiwari: ‘वो अब भगवान शिव की शरण में’; परिवार ने माउंट एवरेस्ट पर ही क्यों छोड़ी बॉडी?

The CSR Journal Magazine
Arun Kumar Tiwari: पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी की मौत का मामला रोचक और भावनात्मक है। 21 मई को उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करते समय अपनी जान गंवा दी। तिवारी के परिवार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने तय किया कि वे अपने प्रियजन का शव माउंट एवरेस्ट पर ही छोड़ देंगे। यह निर्णय तब लिया गया जब परिवार ने शव को वापस लाने की तकनीकी जटिलताओं और अपने धार्मिक विश्वासों पर विचार किया।

आस्था का बड़ा सवाल

परिवार का मानना है कि माउंट एवरेस्ट एक पवित्र स्थल है और अरुण तिवारी का शरीर वहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि अब वह भगवान शिव की शरण में हैं। तिवारी की मां ने कहा, “हम चाहते हैं कि उनका शरीर वहीं रहे, जिसे वह हमेशा से प्यार करते थे।” यह भावनात्मक पहलू इस निर्णय को और मजबूती देता है।

प्रशिक्षण और जोखिम

अरुण तिवारी एक अनुभवी पर्वतारोही थे, जिन्होंने कई कठिन चढ़ाइयां की थीं। उनके प्रशिक्षकों का कहना है कि माउंट एवरेस्ट पर जाने से पहले उन्हें पूरी तैयारी करने की सलाह दी गई थी। फिर भी, उस दिन कुछ अप्रत्याशित हुआ और तिवारी को अपनी जान गंवानी पड़ी। उनके परिवार वालों का मानना है कि यह पर्वत की कठोरता का गुण था।

क्या हैं तकनीकी मुश्किलें?

शव को माउंट एवरेस्ट से वापस लाना एक कठिन कार्य है। ऊंचाई, ठंड और वातावरण ऐसे कई पहलू हैं जो इसे चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शव को लाने की कोशिश की जाती है, तो यह जानलेवा भी हो सकता है। इस वजह से परिवार ने अपने प्रियजन को वहीं छोड़ने का निर्णय लिया है।

Arun Kumar Tiwari: एक पर्वतारोही की यादें

अरुण की पर्वतारोहण की कहानियाँ परिवार और दोस्तों में प्रसिद्ध थीं। उन्हें हमेशा से वहां की ऊँचाई और चुनौती भरे मौसम का सामना करने वाले एक साहसी व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। उनका सपना माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना था, और वे इसे पूरा करने में सफल रहे। हालांकि, उनकी यात्रा का अंत दुखद रहा।

भावनाओं का सैलाब

परिवार में अब शोक की लहर है, लेकिन साथ ही उनके निर्णय पर गर्व भी है। यह कुछ पारिवारिक सदस्य कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है, जिन्होंने अपनी जिदंगी से इस सपने को पूरा किया। माउंट एवरेस्ट का यह अनुभव अब उनके लिए एक स्थायी याद बन गया है।

शिव की शरण में अरुण तिवारी

परिवार का मानना है कि अरुण तिवारी अब भगवान शिव के पास हैं। वे उनका हमेशा ध्यान रखेंगे और इस निर्णय से खुश हैं। यह मामला न केवल एक परिवार की कहानी है, बल्कि पर्वतारोहण की चुनौतियों और आस्था का भी प्रतीक है। वे चाहते हैं कि लोग इस फैसले को समझें और इसकी भावनाओं को महसूस करें।

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